संबंधित पाठ्यकम

सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करार; भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय; महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

संदर्भ: हाल ही में, नई दिल्ली में भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक आयोजित की गई जिसमें भारत के विदेश मंत्री, अरब देशों के विदेश मंत्रियों और अरब लीग (LAS) के महासचिव ने भाग लिया।

अन्य संबंधित जानकारी

• भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक (IAFMM) भारत-अरब सहयोग का मार्गदर्शन करने वाली सर्वोच्च संस्थागत प्रणाली है और लगभग एक दशक के बाद इसका आयोजन किया गया था।

• भारत-अरब विदेश मंत्रियों की पहली बैठक जनवरी 2016 में मनामा, बहरीन में आयोजित की गई थी और इसमें ‘मनामा घोषणापत्र’ तथा ‘कार्यकारी कार्यक्रम (2016-17)’ को अपनाया गया था।

चर्चा के प्रमुख क्षेत्र

• प्रौद्योगिकी, नवाचार और स्टार्टअप: स्टार्टअप इकोसिस्टम, डिजिटल प्रौद्योगिकियों और क्षेत्रीय अनुप्रयोगों में भागीदारी को बढ़ावा देना।

  • राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करते हुए नैतिक, नियामक और प्रशासन ढांचे के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सहयोग की दिशा में आगे बढ़ना।

• स्वास्थ्य सेवा और फार्मास्यूटिकल्स: किफायती और उच्च गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और दवाएं उपलब्ध कराने हेतु सहयोग।

  • भारत ने घरेलू नियामक ढांचे के अंतर्गत अरब देशों में ‘इंडियन फार्माकोपिया’ को मान्यता देने का आग्रह किया।

• अंतरिक्ष और युवा सहयोग: सामाजिक लाभ के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने हेतु अंतरिक्ष के क्षेत्र में बेहतर विनिमय।

  • सांस्कृतिक और नवाचार पहलों में भागीदारी, क्षमता निर्माण और विनिमय के माध्यम से युवा सहयोग का सुदृढ़ीकरण।

• शांति स्थापना और वैश्विक सुरक्षा: संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों में भारत और अरब देशों के महत्वपूर्ण योगदान को मान्यता देना।

  • संयुक्त प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से गहन सहयोग पर बल देना। इस परिप्रेक्ष्य में अरब मंत्रियों ने भारत की पहलों की सराहना की।

• रक्षा और आतंकवाद विरोधी रणनीति: दोनों पक्षों ने आतंकवाद के प्रति ‘शून्य सहिष्णुता’ की पुनः पुष्टि की, सीमा पार हमलों की निंदा की और आतंकवाद के सभी रूपों के विरुद्ध संयुक्त प्रयासों के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की, जिसमें उनके नेटवर्क को ध्वस्त करना, प्रौद्योगिकियों और ड्रोन के दुरुपयोग को रोकना तथा न्याय सुनिश्चित करना शामिल है।

  • उन्होंने अरब देशों की पहलों और दाएश (Da’esh) के विरुद्ध इराक और सीरिया की भूमिका को सराहा तथा पहलगाम हमले की निंदा करते हुए क्षेत्रीय सुरक्षा व स्थिरता पर जोर दिया।
  • दोनों पक्षों ने अल्जीरिया की पहल पर और ‘आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नई एवं उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग का मुकाबला करने’ पर परिषद के ‘2022 के दिल्ली घोषणापत्र’ के अनुसरण में, सुरक्षा परिषद द्वारा ‘उभरती प्रौद्योगिकियों के माध्यम से आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने पर अल्जीरिया मार्गदर्शक सिद्धांतों’ को सर्वसम्मति से अपनाए जाने का स्वागत किया।
  • दोनों पक्षों ने विश्व स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादियों, आतंकवादी संस्थाओं और उनके प्रतिनिधियों, प्रायोजकों और वित्तपोषकों के विरुद्ध निर्णायक और समन्वित कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता जताई, जिनमें UNSC 1267 प्रतिबंध समिति के तहत सूचीबद्ध लोग भी शामिल हैं।

क्षेत्रीय मुद्दे

• फिलीस्तीन और लेबनान: 1967 की सीमाओं पर आधारित ‘दो-राज्य समाधान’ के प्रति समर्थन की पुष्टि की; गाज़ा में हाल ही में हुए युद्धविराम, मानवीय पहुंच, UNRWA की भूमिका और अरब-इस्लामी पुनर्निर्माण योजना का स्वागत किया; फिलीस्तीनी संक्रमणकालीन शासन व्यवस्था का समर्थन किया; और लेबनान की संप्रभुता, विशिष्ट राज्य अधिकार, UNSCR 1701 के कार्यान्वयन और शत्रुता की समाप्ति के लिए अपने समर्थन को दोहराया।

• खाड़ी और उत्तरी अफ्रीका: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के तीन द्वीपों (ग्रेटर टुनब, लेसर टुनब और अबू मूसा) का शांतिपूर्ण समाधान करने के लिए UAE के प्रयासों का समर्थन किया; लीबिया के नेतृत्व में राजनीतिक प्रक्रिया, राष्ट्रीय एकता, संप्रभुता और शीघ्र राष्ट्रपति तथा संसदीय चुनावों के लिए समर्थन की पुष्टि की।

• हॉर्न ऑफ अफ्रीका और सूडान: सूडान की संप्रभुता, एकता, क्षेत्रीय अखंडता, मानवीय पहुंच और समानांतर संस्थाओं की अस्वीकृति के लिए अपना समर्थन दोहराया तथा सोमालिया की संप्रभुता, एकता, क्षेत्रीय अखंडता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं का सम्मान करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

Source
MEA
Embassy of India
EEAS

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