भारत की वित्त मंत्री, श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट 2026-27 (लगातार 9वां बजट) प्रस्तुत किया। यहाँ बजट की मुख्य विशेषताएं दी गई हैं:
केंद्रीय बजट के बारे में

- संविधान का अनुच्छेद 112 यह प्रावधान करता है कि प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए “वार्षिक वित्तीय विवरण”, जिसे लोकप्रिय रूप से ‘बजट’ के रूप में जाना जाता है, संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखा जाएगा।
- संविधान में ‘बजट‘ शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है।
- वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) का बजट प्रभाग केंद्रीय बजट तैयार करने के लिए जिम्मेदार है।
- बजट एक वित्तीय वर्ष में सरकार की अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का विवरण होता है।
- वित्त मंत्री के बजट भाषण के अतिरिक्त, संसद में निम्नलिखित बजट दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते हैं:
- वार्षिक वित्तीय विवरण (AFS) जैसा कि अनुच्छेद 112 के तहत प्रावधान है।
- केंद्र सरकार के लिए अनुदान की मांगें (अनुच्छेद 113 के अंतर्गत)।
- वित्त विधेयक (जैसाकि अनुच्छेद 110 (1)(a) के अंतर्गत दिया गया है)।
- वित्त विधेयक के प्रावधानों की व्याख्या करने वाला ज्ञापन।
- राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003 के अंतर्गत राजकोषीय नीति विवरण।
- व्यय का बजट
- प्राप्तियों का बजट
- व्यय रूपरेखा
- बजट: एक नजर में
- बजट की मुख्य विशेषताएं
- 2026-27 की योजनाओं के लिए निर्गत परिणाम ढांचा
- 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई का व्याख्यात्मक ज्ञापन।

- वित्त मंत्री के बजट भाषण के दो खंड होते हैं – भाग ‘क‘ और भाग ‘ख‘:
- भाग ‘क‘ (Part A): बजट भाषण का पहला भाग पिछले और वर्तमान वर्षों की अर्थव्यवस्था का सिंहावलोकन प्रस्तुत करता है, और अगले वित्तीय वर्ष के लिए बजट अनुमान भी प्रस्तुत करता है। इस प्रकार, यह अर्थव्यवस्था के ‘समष्टि’ पहलू से संबंधित है।
- भाग ‘ख‘ (Part B): बजट भाषण का दूसरा भाग अगले वित्तीय वर्ष के लिए सरकार के कर प्रस्तावों पर प्रकाश डालता है, और इसका नागरिकों के व्यक्तिगत वित्त पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है।
बजट : एक नजर में
- व्यय: बजट अनुमान (BE) 2026-27 में कुल व्यय ₹53,47,315 करोड़ अनुमानित है, जिसमें से कुल पूंजीगत व्यय ₹12,21,821 करोड़ और प्रभावी पूंजीगत व्यय ₹17,14,523 करोड़ है।
- ब्याज भुगतान ₹14,03,972 करोड़ अनुमानित है, जो कुल व्यय के 26% से अधिक है।
- प्राप्तियां: उधारियों के अतिरिक्त कुल प्राप्तियां ₹36,51,547 करोड़ अनुमानित हैं, जिनमें से राजस्व प्राप्तियां ₹35,33,150 करोड़ और पूंजीगत प्राप्तियां (उधारियों को छोड़कर) ₹1,18,397 करोड़ हैं।
- बाजार उधारियां ₹16,95,768 करोड़ अनुमानित हैं।
- घाटा:
- वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी (GDP) का 4.3% रखा गया है, जो कि वर्ष 2025-26 के 4.4% के संशोधित अनुमान (RE) से कम है।
- वर्ष 2026-27 में राजस्व घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 1.5% निर्धारित किया गया है, जो वर्ष 2025-26 के 1.5% के संशोधित अनुमान के समान है।
- सकल घरेलू उत्पाद (GDP): वित्तीय वर्ष 2026-27 में सांकेतिक जीडीपी (Nominal GDP) की वृद्धि दर, वित्तीय वर्ष 2025-26 के प्रथम अग्रिम अनुमानों की तुलना में 10.1% रहने का अनुमान लगाया गया है। (सांकेतिक जीडीपी वृद्धि दर, वास्तविक वृद्धि और मुद्रास्फीति का योग होती है।)
- राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा प्रकाशित प्रथम अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4% रहने का अनुमान है।
- ऋण: केंद्र सरकार का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2030-31 तक ऋण-जीडीपी अनुपात को 50±1 प्रतिशत के स्तर तक लाना है। बजट अनुमान (BE) 2026-27 में, सरकार की कुल बकाया देनदारियां जीडीपी की 55.6% अनुमानित हैं।



भागA
- केंद्रीय बजट 2026-27 3 कर्तव्यों द्वारा निर्देशित है:
- सतत आर्थिक विकास: उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि करके आर्थिक विकास को गति देना और उसे बनाए रखना, तथा अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों के प्रति लचीलापन विकसित करना।
- क्षमता निर्माण: लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनका क्षमता निर्माण करना, ताकि वे भारत की समृद्धि के मार्ग में सशक्त भागीदार बन सकें।
- सबका साथ, सबका विकास: यह सुनिश्चित करना कि प्रत्येक परिवार, समुदाय, क्षेत्र और क्षेत्रक की संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों तक पहुँच हो, जिससे उनकी सार्थक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
A. पहला कर्तव्य — सतत आर्थिक विकास को गति देना (इसमें 6 हस्तक्षेप प्रस्तावित हैं)
- रणनीतिक और अग्रणी क्षेत्रों में विनिर्माण का विस्तार
बायोफार्मा शक्ति/SHAKTI
- भारत को वैश्विक बायोफार्मा विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 5 वर्षों में ₹10,000 करोड़ का परिव्यय।
- 3 नए नाइपर (NIPERs) की स्थापना और 7 मौजूदा नाइपर के उन्नयन के साथ एक बायोफार्मा नेटवर्क की स्थापना।
- संपूर्ण भारत में 1,000+ मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइटों का निर्माण।
भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- उपकरणों और सामग्रियों के उत्पादन, फुल-स्टैक इंडियन आईपी (IP) डिजाइन, और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं पर ध्यान केंद्रित करना।
- उन्नत तकनीक विकसित करने और कुशल जनशक्ति के लिए उद्योग के नेतृत्व वाले अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र।
इलेक्ट्रॉनिक्स और महत्वपूर्ण खनिज
- इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना का परिव्यय बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ किया गया है।
- खनन, प्रसंस्करण और विनिर्माण के लिए ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में समर्पित रेयर अर्थ कॉरिडोर।
रसायन एवं पूंजीगत वस्तुएं
- चुनौती-आधारित, क्लस्टर-उन्मुख ‘प्लग-एंड-प्ले‘ मॉडल के माध्यम से 3 रसायन पार्कों के लिए राज्यों को सहायता।
- निम्नलिखित के माध्यम से पूंजीगत वस्तु क्षेत्र का सुदृढ़ीकरण:
- केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) द्वारा दो स्थानों पर हाई-टेक टूल रूम की स्थापना।
- निर्माण एवं अवसंरचना उपकरण (CIE) संवर्धन योजना।
- 5 वर्षों में ₹10,000 करोड़ के परिव्यय के साथ कंटेनर विनिर्माण योजना।
कपड़ा क्षेत्र
- वस्त्रों के लिए एकीकृत कार्यक्रम, जिसमें शामिल हैं:
- प्राकृतिक, मानव निर्मित और आधुनिक युग के रेशों के लिए राष्ट्रीय रेशा योजना ।
- पारंपरिक क्लस्टरों के लिए वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना।
- तकनीकी वस्त्रों पर केंद्रित मेगा टेक्सटाइल पार्क।
- खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प के लिए वैश्विक ब्रांडिंग और कौशल सहायता के साथ महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल।
2. पुराने औद्योगिक क्षेत्रों का कायाकल्प
- लागत प्रतिस्पर्धात्मकता और दक्षता बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे तथा प्रौद्योगिकी उन्नयन के माध्यम से 200 पुराने औद्योगिक क्लस्टरों को पुनर्जीवित करने की योजना।
3. ‘चैंपियन’ एसएमई (SME) का सृजन और सूक्ष्म उद्यमों को सहायता
- वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी “चैंपियन एसएमई” को विकसित करने के लिए ₹10,000 करोड़ का एसएमई ग्रोथ फंड।
- सूक्ष्म उद्यमों के लिए जोखिम पूंजी हेतु ‘आत्मनिर्भर भारत कोष’ में अतिरिक्त ₹2,000 करोड़ का प्रावधान।
- ‘कॉर्पोरेट मित्र’ तैयार करने के लिए पेशेवर संस्थानों (ICAI, ICSI, ICMAI) द्वारा विशेष रूप से टियर-II और टियर-III शहरों हेतु मॉड्यूल-आधारित पाठ्यक्रम तैयार करना।
3. बुनियादी ढांचे को प्रोत्साहन
- वित्तीय वर्ष 2026-27 में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया गया है।
- निर्माण चरण के दौरान निजी निवेश के जोखिम को कम करने के लिए ‘अवसंरचना जोखिम गारंटी कोष’ की स्थापना।
- समर्पित REITs (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स) के माध्यम से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) की अचल संपत्ति का मुद्रीकरण।
4.हरित लॉजिस्टिक्स एवं परिवहन
- दानकुनी-सूरत को जोड़ने वाला नया समर्पित माल गलियारा।
- 5 वर्षों में 20 राष्ट्रीय जलमार्गों का परिचालन शुरू करना।
- वाराणसी और पटना में अंतर्देशीय जहाज मरम्मत इकोसिस्टम की स्थापना।
- 2047 तक जलमार्गों और तटीय शिपिंग की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 12% करने के लिए तटीय माल संवर्धन योजना ।
- सीप्लेन VGF योजना और स्वदेशी सीप्लेन विनिर्माण के लिए प्रोत्साहन।
5. दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना
- कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS) प्रौद्योगिकियों के लिए 5 वर्षों में ₹20,000 करोड़ का आवंटन।
6. शहर आर्थिक क्षेत्रों (CERs) का विकास
- चुनौती-आधारित और सुधार-सम्बद्ध वित्तपोषण के माध्यम से प्रत्येक CER के लिए 5 वर्षों में ₹5,000 करोड़ का प्रावधान।
- विकास संयोजकों के रूप में 7 हाई-स्पीड रेल गलियारों का विकास:
- मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी, वाराणसी-सिलीगुड़ी।
- विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति का गठन।
- पैमाना और दक्षता बढ़ाने के लिए PFC और REC का पुनर्गठन।
- निवेशक-अनुकूल ढांचे के लिए FEMA (गैर-ऋण साधन) नियमों की समीक्षा।
- ₹1,000 करोड़ से अधिक के नगरपालिका बॉन्ड जारी करने पर ₹100 करोड़ का प्रोत्साहन।
B. दूसरा कर्तव्य — क्षमता निर्माण (इसमें 5 हस्तक्षेप प्रस्तावित हैं)
1. शिक्षा से रोजगार का जुड़ाव
- सेवा क्षेत्रक पर विशेष ध्यान देने के साथ एक उच्चाधिकार प्राप्त ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यम‘ स्थायी समिति का गठन।
2.विकसित भारत हेतु पेशेवरों का सृजन
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाएँ
- संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों (AHPs) के लिए संस्थानों का उन्नयन और विस्तार।
- अगले 5 वर्षों में 1 लाख नए संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों (AHPs) को जोड़ना।
- चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 5 क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों की स्थापना।
आयुष (AYUSH)
- 3 नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना।
पशुपालन
- 20,000 से अधिक पशु चिकित्सा पेशेवरों को जोड़ना।
- पशु चिकित्सा कॉलेजों, अस्पतालों, प्रयोगशालाओं और प्रजनन केंद्रों के लिए ऋण-सम्बद्ध पूंजीगत सब्सिडी।
3. ऑरेंज इकोनॉमी (रचनात्मक अर्थव्यवस्था)
- मुंबई स्थित भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान के लिए सहायता।
- 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) सामग्री निर्माता प्रयोगशालाओं की स्थापना।
4. शिक्षा अवसंरचना
- औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गलियारों के निकट 5 विश्वविद्यालय टाउनशिप का निर्माण।
- VGF (व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण) या पूंजीगत सहायता के माध्यम से प्रत्येक जिले में एक बालिका छात्रावास की स्थापना।
5.पर्यटन, विरासत एवं खेल
- ‘नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट’ को ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी‘ में अपग्रेड करना।
- 20 गंतव्यों में 10,000 पर्यटक गाइडों के कौशल विकास हेतु पायलट कार्यक्रम।
- विरासत के दस्तावेजीकरण के लिए ‘नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड‘ की स्थापना।
- 15 पुरातात्विक स्थलों को ‘अनुभवजन्य सांस्कृतिक गंतव्यों’ के रूप में विकसित करना।
- दीर्घकालिक खेल इकोसिस्टम के विकास के लिए ‘खेलो इंडिया मिशन‘ का शुभारंभ।
C. तीसरा कर्तव्य — सबका साथ, सबका विकास (इसमें 4 हस्तक्षेप प्रस्तावित हैं)
1.किसानों की आय में वृद्धि
- 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास।
- उच्च मूल्य वाली फसलों (नारियल, चंदन, कोको, काजू) को प्रोत्साहन।
- उत्पादकता बढ़ाने के लिए नारियल संवर्धन योजना।
- भारत-VISTAAR का शुभारंभ, जो AgriStack और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के ज्ञान प्रणालियों को एकीकृत करने वाला एक बहुभाषी एआई (AI) प्लेटफॉर्म है।
- दिव्यांगजनों का सशक्तिकरण
- आईटी (IT), एवीजीसी (AVGC), आतिथ्य और खाद्य एवं पेय (F&B) क्षेत्रों में कार्य-उन्मुख रोजगार को सक्षम करने के लिए दिव्यांगजन कौशल योजना।
3.मानसिक स्वास्थ्य और ट्रॉमा केयर के प्रति प्रतिबद्धता
- उत्तर भारत में निमहांस-2 (NIMHANS-2) की स्थापना।
- रांची और तेजपुर स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का क्षेत्रीय शीर्ष केंद्रों के रूप में अपग्रेडेशन।
4. पूर्वोदय राज्यों और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करना
- दुर्गापुर नोड के साथ एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक का विकास।
- पूर्वोदय राज्यों में 5 पर्यटन स्थलों का विकास।
- 4,000 ई-बसों का परिचालन।
- अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट का विकास।
भागB
A. प्रत्यक्ष कर
1.नया आयकर अधिनियम, 2025
- आयकर अधिनियम, 1961 के स्थान पर नया आयकर अधिनियम, 2025 लाया गया है, जो अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा।
2. TDS / TCS का युक्तिकरण
- विदेश भ्रमण कार्यक्रम पैकेजों पर TCS को घटाकर 2% कर दिया गया है (पूर्व में यह 2–20% था)।
- शिक्षा और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए LRS प्रेषण पर TCS को 5% से घटाकर 2% किया गया।
- श्रम-प्रधान क्षेत्रों को लाभ पहुँचाने के लिए जनशक्ति आपूर्ति हेतु TDS प्रावधानों का सरलीकरण।
- छोटे करदाताओं के लिए कम या नगण्य TDS प्रमाणपत्र प्राप्त करने हेतु स्वचालित नियम-आधारित योजना।
3. सहकारी समितियों के लिए उपाय
- निम्नलिखित की आपूर्ति करने वाली सहकारी समितियों के लिए कटौती का विस्तार:
- दूध, तिलहन, फल और सब्जियों के अतिरिक्त अब पशु आहार और बिनौला (Cotton seed) भी शामिल है।
- अंत-सहकारी लाभांश आय कटौती योग्य होगी, यदि इसे आगे सदस्यों को वितरित किया जाता है।
- 31.01.2026 तक किए गए निवेशों पर अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी संघों के लिए 3-वर्षीय लाभांश छूट।
4.वैश्विक व्यापार एवं निवेश को आकर्षित करना
- भारत से वैश्विक क्लाउड सेवाएँ प्रदान करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए 2047 तक टैक्स हॉलिडे (कर अवकाश) का प्रावधान।
- संबंधित-पक्ष डेटा सेंटर सेवा प्रदाताओं के लिए लागत पर 15% सेफ हार्बर (Safe Harbour) की सुविधा।
- बॉन्डेड वेयरहाउस में घटकों के भंडारण के लिए इनवॉइस मूल्य (Invoice Value) के 2% पर सेफ हार्बर का प्रावधान।
- बॉन्डेड ज़ोन में ‘टोल मैन्युफैक्चरर्स’ को पूंजीगत वस्तुओं/उपकरणों की आपूर्ति करने वाले अनिवासियों के लिए 5-वर्षीय आयकर छूट।
- अधिसूचित योजनाओं के तहत अनिवासी विशेषज्ञों की वैश्विक आय को 5 वर्षों के लिए छूट।
- अनुमानित आधार पर कर देने वाले अनिवासियों के लिए न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) से छूट।
B. अप्रत्यक्ष कर
1. टैरिफ का सरलीकरण
- समुद्री, चमड़ा एवं वस्त्र:
- समुद्री खाद्य प्रसंस्करण इनपुट के लिए टैरिफ मुक्त आयात सीमा FOB मूल्य के 1% से बढ़ाकर 3% की गई।
- चमड़ा/सिंथेटिक फुटवियर निर्यात के लिए टैरिफ मुक्त आयात की सुविधा का विस्तार।
- ऊर्जा संक्रमण:
- लिथियम-आयन बैटरी विनिर्माण हेतु पूंजीगत वस्तुओं पर BCD (बुनियादी सीमा शुल्क) छूट का विस्तार।
- सोलर ग्लास के लिए ‘सोडियम एंटीमोनेट’ को शुल्क मुक्त किया गया।
- परमाणु ऊर्जा: BCD छूट को 2035 तक बढ़ाया गया।
- महत्वपूर्ण खनिज: प्रसंस्करण हेतु पूंजीगत वस्तुओं पर BCD छूट।
- बायोगैस मिश्रित CNG: उत्पाद शुल्क की गणना के लिए बायोगैस के मूल्य को बाहर रखा गया।
- नागरिक एवं रक्षा विमानन: विमान के पुर्जों और MRO (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल) इनपुट पर BCD छूट।
- इलेक्ट्रॉनिक्स: विशिष्ट माइक्रोवेव ओवन घटकों पर BCD छूट।
- विशेष आर्थिक क्षेत्र: निर्धारित निर्यात अनुपात तक DTA (घरेलू टैरिफ क्षेत्र) में एकमुश्त रियायती बिक्री की अनुमति।
2. जीवन की सुगमता (सीमा शुल्क)
- व्यक्तिगत आयात पर शुल्क दर 20% से घटाकर 10% की गई।
- 17 दवाओं/औषधियों को BCD से छूट दी गई।
- 7 अतिरिक्त दुर्लभ बीमारियों के लिए दवाओं/भोजन के व्यक्तिगत आयात को शुल्क मुक्त किया गया।
- शुल्क मुक्त भत्ते बढ़ाने के लिए बैगेज नियमों (Baggage Rules) में संशोधन।
- ईमानदार करदाताओं को दंड के बदले अतिरिक्त राशि का भुगतान कर विवादों को निपटाने की अनुमति।
3. सीमा शुल्क प्रक्रिया एवं विश्वास-आधारित प्रणाली
- AEO टियर-2 और टियर-3 के लिए शुल्क आस्थगन 15 से बढ़ाकर 30 दिन किया गया।
- अग्रिम निर्णयों की वैधता 3 से बढ़ाकर 5 वर्ष की गई।
- भरोसेमंद आयातकों के लिए स्वचालित मंजूरी व्यवस्था।
- सीमा शुल्क भंडारण को ‘ऑपरेटर-केंद्रित’ और ‘स्व-घोषणा’ मॉडल पर स्थानांतरित किया गया।
- पत्तन पर एआई-आधारित गैर-विघटनकारी स्कैनिंग का विस्तार।
4. व्यापार सुगमता
- वित्तीय वर्ष के अंत तक कार्गो निकासी के लिए एकल डिजिटल विंडो।
- खाद्य, औषधि, पादप, पशु और वन्यजीव निकासी (लगभग 70% निषेध) अप्रैल 2026 तक संचालित होगी।
- 2 वर्षों में सीमा शुल्क एकीकृत प्रणाली (CIS) की शुरुआत।
5. नए निर्यात अवसर
- EEZ (अनन्य आर्थिक क्षेत्र) या उच्च/खुले सागर में पकड़ी गई मछलियों को शुल्क मुक्त किया गया; विदेश में लैंडिंग को निर्यात माना जाएगा।
- एमएसएमई (MSMEs) और ई-कॉमर्स को बढ़ावा देने के लिए कूरियर निर्यात पर ₹10 लाख प्रति खेप की सीमा को हटाया गया।
