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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

संदर्भ: हाल ही में, IIT कानपुर के शोधकर्ताओं ने अंतरिक्ष में स्थापित उपग्रहों के माध्यम से प्राप्त सूर्य की सतह के चुंबकीय क्षेत्र के 30 वर्षों के प्रेक्षणों को एक त्रि-आयामी (3D) गणनात्मक मॉडल में समाहित करके पहली बार सूर्य के आंतरिक चुंबकीय क्षेत्र की मैपिंग की है।

अन्य संबंधितजानकारी

  • ये निष्कर्ष आईआईटी कानपुर के भौतिकी विभाग द्वारा द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में दर्ज किए गए हैं।
  • इस डेटा-आधारित 3D डायनेमो मॉडल से सूर्य के संपूर्ण आंतरिक चुंबकीय क्षेत्र का पुनर्निर्माण किया जा सकता है।
  • इसका मुख्य आधार यह है कि सूर्य की गहराई में स्थित चुंबकीय क्षेत्र ही सतह के चुंबकत्व को आकार देते हैं, और इसलिए उनके संकेत दीर्घकालिक सतही प्रेक्षणों में मौजूद रहते हैं।
  • यह अध्ययन सूर्य के आंतरिक चुंबकीय क्षेत्रों के परिमाण, संरचना और विकास का तीन दशकीय अभूतपूर्व अनुमान प्रदान करता है।
  • सूर्य का चक्रीय चुंबकीय व्यवहार सौर डायनेमो द्वारा संचालित होता है, जो सौर आंतरिक भाग की गहराई में चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है और समय-समय पर ध्रुवीय उत्क्रमण का कारण भी बनता है।
    • सौर डायनेमो: यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा सूर्य विभेदी घूर्णन और संवहन के माध्यम से अपना चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है, जिससे लगभग प्रत्येक सौर चक्र में उसकी चुंबकीय ध्रुवता उलट जाती है।

सौर चक्र के बारे में

  • सूर्य विद्युत आवेशित गर्म गैस (प्लाज्मा) का एक विशाल गोला है जिसकी गति से शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। यह चुंबकीय क्षेत्र समय के साथ बदलता रहता है, जिसे सौर चक्र के रूप में जाना जाता है।
  • लगभग प्रत्येक 11 वर्ष में, सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र उलट जाता है, जिससे इसके उत्तर और दक्षिण ध्रुव अपना स्थान बदल लेते हैं; उन्हें वापस अपनी स्थिति में आने में अगले 11 वर्ष लगते हैं।
  • ये चुंबकीय परिवर्तन सौर सतह की गतिविधियों में भिन्नता लाते हैं, जिनमें सौर कलंकों (Sunspots) का बनना भी शामिल है।

चक्र के चरण

  • सौर न्यूनतम (Solar Minimum): यह सौर चक्र की शुरुआत का प्रतीक है, जब सूर्य में सबसे कम सौर कलंक होते हैं और चुंबकीय गतिविधि का स्तर न्यूनतम होता है। यह चरण तुलनात्मक रूप से शांत सूर्य को इंगित करता है।
  • सौर अधिकतम (Solar Maximum): यह सौर चक्र के मध्य में होता है, जब सौर गतिविधि अपने चरम पर होती है और सौर कलंकों की संख्या सर्वाधिक होती है। जैसे-जैसे चक्र इस बिंदु से आगे बढ़ता है, गतिविधि धीरे-धीरे कम होती जाती है और नया चक्र शुरू होने से पहले पुनः सौर न्यूनतम की स्थिति आ जाती है।
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