संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।
संदर्भ: 2 फरवरी को मनाए जाने वाले ‘विश्व आर्द्रभूमि दिवस’ से पहले वैश्विक रामसर कन्वेंशन के तहत दो आर्द्रभूमियों को अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की सूची (रामसर स्थलों) में शामिल किया गया है।
अन्य संबंधित जानकारी
- भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि एटा (उत्तर प्रदेश) स्थित पटना पक्षी अभयारण्य और कच्छ (गुजरात) स्थित छारी-ढंढ को रामसर स्थल घोषित किया गया है।
- रामसर कन्वेंशन के तहत इन दो स्थलों के शामिल होने के साथ ही भारत में ऐसे आर्द्रभूमि स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 98 हो गई है।
- यह मान्यता भारत की विस्तृत होती रामसर सूची को संवर्धित करती है, जो सतत विकास, पर्यावास संरक्षण और स्थानीय एवं वैश्विक स्तर पर ‘पर्यावरणीय नेतृत्व’ के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता को व्यक्त करती है।
हाल ही में जोड़े गए रामसर स्थलों से संबंधित प्रमुख जानकारी
1. पटना पक्षी अभयारण्य (उत्तर प्रदेश)
- इसमें मीठे पानी के दलदल, वृक्षभूमि (वुडलैंड्स) और घास के मैदान शामिल हैं, जो कृषि भू-भागों से घिरे हुए हैं।
- ये विभिन्न परिदृश्य मिलकर आवासों की एक विस्तृत श्रृंखला बनाते हैं और उच्च स्तर की जैव विविधता का समर्थन करते हैं। यहाँ पक्षियों की 178 प्रजातियाँ और पौधों की 252 प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- यह जलपक्षियों की आबादी के संरक्षण के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है और इसे बर्डलाइफ इंटरनेशनल द्वारा ‘महत्वपूर्ण पक्षी और जैव विविधता क्षेत्र’ (IBA) के रूप में नामित किया गया है।
2. छारी-ढंढ (गुजरात)
- यह गुजरात राज्य का पहला ‘संरक्षण रिजर्व’ है।
- रामसर कन्वेंशन के अनुसार, यह कच्छ के प्रसिद्ध बन्नी घास के मैदानों और नमक के मैदानों के बीच स्थित एक मौसमी लवणीय आर्द्रभूमि है।
- यह जलपक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण शीतकालीन प्रवास स्थल है, जहाँ गंभीर रूप से लुप्तप्राय सोशिएबल लैपविंग, संवेदनशील कॉमन पोचार्ड और विशेष रूप से प्रतिवर्ष लगभग 30,000 कॉमन क्रेन आते हैं।
रामसर कन्वेंशन के बारे में
- रामसर कन्वेंशन एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है जिसे 1971 में स्थापित किया गया था।
- इसका उद्देश्य जैव विविधता के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए आर्द्रभूमियों का संरक्षण और उनका बुद्धिमानीपूर्ण तरीके से उपयोग सुनिश्चित करना है।
- इन्हें ‘अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि’ के रूप में भी जाना जाता है।
- परिभाषा: कन्वेंशन के अनुसार, आर्द्रभूमि दलदल, फेन, पीटभूमि या पानी के क्षेत्र हैं, चाहे वे प्राकृतिक हों या कृत्रिम, स्थायी हों या अस्थायी, जिनमें पानी स्थिर या बहता हुआ, मीठा, लवणीय या खारा हो सकता है। इसमें समुद्री जल के वे क्षेत्र भी शामिल हैं जिनकी गहराई निम्न ज्वार के समय 6 मीटर से अधिक नहीं होती।
- वर्ष 1997 से प्रतिवर्ष 2 फरवरी को विश्व आर्द्रभूमि दिवस मनाया जाता है।
भारत में रामसर स्थल
- भारत 1 फरवरी, 1982 को आर्द्रभूमि पर रामसर कन्वेंशन में शामिल हुआ।
- भारत में एशिया के सर्वाधिक रामसर स्थल (98) हैं और विश्व में यूनाइटेड किंगडम (176) और मैक्सिको (144) के बाद इसका तीसरा स्थान है।
- तमिलनाडु में भारत के सर्वाधिक (20) रामसर स्थल हैं, इसके बाद उत्तर प्रदेश (11) का स्थान है।
- पश्चिम बंगाल स्थित सुंदरवन आर्द्रभूमि (4,230 वर्ग किमी) भारत का सबसे बड़ा रामसर स्थल है, जबकि हिमाचल प्रदेश की रेणुका झील (0.2 वर्ग किमी) सबसे छोटी है।
- ये आर्द्रभूमियां विभिन्न राष्ट्रीय कानूनों के तहत संरक्षित हैं, जिनमें भारतीय वन अधिनियम (1927), वन (संरक्षण) अधिनियम,1980, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम,1986 और भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम,1972 शामिल हैं।
Sources:
The Hindu
DD News
Indian Express
