संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-1: भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान—महत्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं (जल-निकायों और हिम-छत्रकों सहित) तथा वनस्पति एवं प्राणिजगत में परिवर्तन और ऐसे परिवर्तनों के प्रभाव।

सामान्य अध्ययन -3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।
संदर्भ: हाल ही में, बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित लोनार क्रेटर झील में उभरते पारिस्थितिक और विरासत संकट को देखते हुए स्वतः संज्ञान जनहित याचिका शुरू की।
अन्य संबंधित जानकारी
• झील के जल स्तर में हुई भारी वृद्धि की सूचनाओं के उपरांत न्यायालय ने इस प्रकरण में हस्तक्षेप किया है। वस्तुतः, यह स्थिति न केवल वहां स्थित प्राचीन मंदिरों के अस्तित्व के लिए संकट उत्पन्न कर रही है, अपितु इस क्रेटर के विशिष्ट लवणीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी गंभीर चुनौती प्रस्तुत कर रही है।
• यह कार्रवाई झील की प्राकृतिक स्थिति को बनाए रखने और क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों के संरक्षण हेतु की गई है।
• इस संबंध में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें कहा गया था कि लोनार झील में जल स्तर में लगभग 20 फीट की वृद्धि हुई है, जिससे क्रेटर के किनारे स्थित सदियों पुरानी कई विरासत संरचनाएँ आंशिक और पूर्ण रूप से जलमग्न हो गई हैं।
- इस क्षेत्र के पंद्रह प्राचीन मंदिरों में से नौ, जिनके बारे में ऐसा अनुमान है कि वे 1,200 वर्ष से भी अधिक पुराने हैं, अब या तो आंशिक रूप से या पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं। कमलजा देवी, दैत्य सूदन, मोठा मारुति और गोमुख मंदिर तत्काल खतरे का सामना कर रहे हैं।
• याचिका में चेतावनी दी गई है कि मीठे पानी के अंतर्वाह से झील की लवणता में कमी आ रही है और इसके pH स्तर में गिरावट आ रही है। इस परिवर्तन से मीठे पानी की प्रजातियाँ भी झील में प्रवेश कर सकती हैं, जिससे उन दुर्लभ जीवाणुओं, कवक और प्रोटोजोआ के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है जो केवल अत्यधिक लवणीय परिस्थितियों में ही जीवित रह सकते हैं।
लोनार झील में जल स्तर बढ़ने के कारण:
• वर्ष 2025 में हुई अत्यधिक वर्षा।
• झील में प्रवेश करने वाला अनुपचारित सीवेज जल।
• वन विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा चलाए गए अत्यधिक वृक्षारोपण अभियान के परिणामस्वरूप मिट्टी की नमी धारण करने की क्षमता बढ़ गई है, वाष्पीकरण में कमी आई है और अतिरिक्त पानी क्रेटर में चला गया है।
• जल का रिसना, क्रेटर से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थित किनी परकोलेशन टैंक से संभावित रिसाव।
लोनार झील के बारे में
• लोनार झील महाराष्ट्र राज्य के बुलढाणा जिले में स्थित है। इसका निर्माण प्लीस्टोसीन कल्प के दौरान उल्कापिंड के प्रभाव से हुआ था।
• यह विश्व की एकमात्र ज्ञात लवणीय क्रेटर झील है, जो लगभग 50,000 साल पहले एक उल्कापिंड के टकराने से बनी थी।
• इसका पानी समुद्र के पानी से लगभग सात गुना अधिक लवणीय है। इस झील का व्यास लगभग 1.2 किलोमीटर है जबकि गहराई 150 मीटर तक है और यह 75 डिग्री तक ऊँची पहाड़ियों से घिरी हुई है।
• लोनार झील के पानी का गुलाबी रंग, लवणानुरागी ‘हैलोआर्चिया’ सूक्ष्मजीवों के प्रसार के कारण होता है, जो उच्च लवणता और क्षारीय परिस्थितियों में लाल रंग के कैरोटीनॉयड रंजक उत्पन्न करते हैं।
• यह दक्कन के पठार की बेसाल्टिक चट्टान में एकमात्र ज्ञात इम्पैक्ट क्रेटर है, जिसका निर्माण 6.5 करोड़ वर्ष पहले हुए विशाल ज्वालामुखी उद्गारों से हुआ था।
• उल्कापिंड के प्रभाव से एक शॉक वेव उत्पन्न हुई जिसने बेसाल्ट को पिघला दिया और चूर-चूर कर दिया। इससे ‘मास्केलिनाइट’ नामक कांच जैसा पदार्थ बना।
• इसे वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया है, इसके पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्त्व के कारण इसे नवंबर 2020 में रामसर साइट के रूप में मान्यता दी गई थी, और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा इसे एक राष्ट्रीय भू-विरासत स्मारक के रूप में संरक्षित किया गया है।
• यह झील में वनस्पतियों और जीवों की समृद्ध विविधता है, जिनमें से कुछ इस क्षेत्र के लिए स्थानिक हैं।
