संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन 1: विश्व के भौतिक भूगोल की  मुख्य विशेषताएँ।

सामान्य अध्ययन 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण।

संदर्भ: ‘नेचर’ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन दर्शाता है कि गंगा-ब्रह्मपुत्र सहित विश्व के अधिकांश प्रमुख नदी डेल्टाओं का समुद्र स्तर की वृद्धि की तुलना में कहीं अधिक तीव्र गति से अवतलन हो रहा है। इस तरह भूमि के निरंतर धँसने के कारण इन क्षेत्रों में बाढ़ का संकट अत्यंत गंभीर हो गया है।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • इस शोध में पांच महाद्वीपों के 29 देशों के 40 प्रमुख नदी डेल्टाओं का परीक्षण किया गया।
    • नदी डेल्टा एक कम ऊंचाई वाला मैदान होता है जो नदी द्वारा लाए गए और अपने मुहाने पर जमा किए गए अवसादों से बना होता है।
  • शोधकर्ताओं ने अवतलन दरों और भूमि की क्षैतिज गति के आधार पर डेल्टाओं का चयन किया, जिसमें 30 लाख से अधिक आबादी वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

शोध के मुख्य निष्कर्ष:

वैश्विक संदर्भ:

  • डेल्टा का तीव्र अवतलन: 2014 और 2023 के बीच, आधे से अधिक डेल्टाओं में प्रति वर्ष 3 मिमी. से अधिक की अवतलन दर दर्ज की गई।
    • अध्ययन में पाया गया कि जिन डेल्टा क्षेत्र का विश्लेषण किया गया था उनमें से कुल डेल्टा क्षेत्र का 35% हिस्सा धँस रहा है, और 40 में से 38 डेल्टाओं के आधे से अधिक क्षेत्र में ऐसी प्रवृत्ति देखी गई।
  • समुद्र-स्तर की वृद्धि की तुलना में अधिक अवतलन: नील, पो, विस्तुला, सेहान, ब्राह्मणी, महानदी, चाओ फ्राया, मेकांग, रेड, सिलीवुंग, ब्रांटास, गोदावरी और येलो रिवर सहित 13 डेल्टाओं में औसत अवतलन दर लगभग 4 मिमी. प्रति वर्ष की अनुमानित वैश्विक औसत समुद्र-स्तर वृद्धि से अधिक रही।
  • आवासीय डेल्टा भू-भाग का अवतलन: 40 नदी डेल्टाओं के विश्लेषण से पता चलता है कि विश्व के लगभग 54-65% आवासीय डेल्टा भू-भाग अब धँस रहे हैं।
  • बड़े डेल्टाओं के कारण अधिकांश भूमि का अवतलन: विश्व भर के कुल अवतलन वाले डेल्टा क्षेत्र का लगभग 57% हिस्सा -ब्रह्मपुत्र, नील, मेकांग, यांग्त्ज़ी, अमेज़न, इरावदी और मिसिसिपी जैसे सात प्रमुख डेल्टाओं में केन्द्रित हैं।

भारत-विशिष्ट निष्कर्ष:

  • भारत के डेल्टाओं में भूमि का अवतलन: भारत के ब्राह्मणी, महानदी और गंगा-ब्रह्मपुत्र सहित अध्ययन किए गए लगभग 50% डेल्टाओं में गंभीर अवतलन का अनुभव किया गया है, जिससे उनके कुल क्षेत्रफल का 90% से अधिक हिस्सा प्रभावित हुआ।
    • विश्लेषण किए गए 40 में से 18 डेल्टाओं में, जिनमें भारत के ब्राह्मणी, महानदी, गंगा-ब्रह्मपुत्र और गोदावरी शामिल हैं, स्थानीय भूमि अवतलन क्षेत्रीय भू-केंद्रित समुद्र-स्तर की वृद्धि की तुलना में अधिक तेजी से हो रहा है।
    • कावेरी और काबिनी डेल्टा भी गंभीर भूमि अवतलन का अनुभव करने वालों में शामिल हैं।
  • डेल्टा जिनका तेजी से अवतलन हो रहा है: ब्राह्मणी और महानदी डेल्टा सबसे तेजी से धँसने वाले डेल्टा हैं, जिनके क्रमशः 77% और 69% क्षेत्र का अवतलन हो रहा है, जिसमें से अधिकांश भाग 5 मिमी. प्रति वर्ष से अधिक की दर से धँस रहा है।
  • डेल्टा शहरों का अवतलन: डेल्टा क्षेत्रों में स्थित प्रमुख शहर भी अपने आसपास के परिदृश्य के बराबर या उससे अधिक की दर से धँस रहे हैं।
    • गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में स्थित कोलकाता, नील डेल्टा में अलेक्जेंड्रिया, चाओ फ्राया डेल्टा में बैंकॉक, ढाका और शंघाई के साथ गंभीर अवतलन का अनुभव करने वाले शहरों में शामिल है।
  • “न्यूनतम तैयारियों के साथ” भारतीय डेल्टा: शोधकर्ताओं ने उल्लेख किया कि भारतीय डेल्टा उच्च सापेक्षिक समुद्र-स्तर में वृद्धि का अनुभव कर रहे हैं, जबकि उनमें पर्याप्त अनुकूलन के लिए संस्थागत और वित्तीय क्षमता का अभाव है।

डेल्टाओं के अवतलन को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारक:

  • भूजल की अत्यधिक निकासी: अध्ययन में गंगा-ब्रह्मपुत्र और कावेरी डेल्टा में अवतलन के प्रमुख कारक के रूप में मुख्य रूप से कृषि, उद्योग और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में घरेलू उपयोग के लिए भूजल की अत्यधिक निकासी का उल्लेख किया गया है।
  • अवसाद की आपूर्ति में कमी: महानदी और काबिनी डेल्टा भूजल की कमी, ऊपरी प्रवाह वाले बांधों और तटबंधों के कारण कम अवसाद आपूर्ति, और जनसंख्या वृद्धि के कारण भूमि-उपयोग परिवर्तनों से प्रभावित हैं।
  • बाढ़-नियंत्रण उपाय: अध्ययन इस बात पर प्रकाश डालता है कि नील, पो और मिसिसिपी डेल्टा में, बांधों और बाढ़-नियंत्रण उपायों के कारण अवसाद में आई है और तीव्र अवतलन हुआ है।
  • भूमि का अवतलन: पृथ्वी की सतह का धीरे-धीरे धँसना नदी डेल्टाओं में जोखिम के एक प्रमुख कारक के रूप में उभरा है।

नदी डेल्टाओं के अवतलन का प्रभाव:

  • बाढ़ के प्रति सुभेद्यता: डेल्टाओं का अवतलन तटीय बाढ़ के प्रति सुभेद्यता को बढ़ाता है, भले ही समुद्र के जलस्तर में अत्यधिक वृद्धि न हो।
  • बुनियादी ढांचे की क्षति: अवतलन कृषि भूमि को नुकसान पहुँचाता है, ताजे पानी की आपूर्ति को बाधित करता है, खारे पानी के प्रवेश को बढ़ावा देता है और आर्द्रभूमि के नुकसान को बढ़ाता है।
  • दीर्घकालिक विस्थापन: भूमि का नुकसान और ताजे पानी की कमी पलायन के लिए मजबूर कर सकती है, सीमित संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा में तेजी आ सकती है और सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।
  • स्वदेशी और ग्रामीण समुदायों पर प्रभाव: ये समुदाय अक्सर समुद्र तल से एक मीटर से भी कम ऊँचाई वाले क्षेत्रों में रहते हैं, भूमि के साथ अपने सांस्कृतिक, आर्थिक और निर्वाह संबंधों के कारण पुनर्वास में गंभीर चुनौतियों का सामना करते हैं।
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