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सामान्य अध्ययन-2: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, एजेंसियाँ और मंच  – उनकी संरचना, अधिदेश।

संदर्भ: विश्व आर्थिक मंच (WEF) द्वारा संकलित वैश्विक जोखिम रिपोर्ट 2026′ इस वार्षिक प्रतिवेदन का 21वाँ संस्करण है। यह रिपोर्ट एक अस्थिर एवं अशांत दशक के उत्तरार्ध (दूसरी छमाही) के प्रारंभ का संकेत देती है।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • यह रिपोर्ट निर्णयकर्ताओं को वर्तमान संकटों और दीर्घकालिक प्राथमिकताओं के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायता प्रदान करने हेतु तीन समय-सीमाओं के माध्यम से वैश्विक जोखिमों का विश्लेषण करती है:
    • वर्तमान या तत्काल अवधि (2026 में),
    • अल्पकालिक से मध्यम अवधि (2028 तक),
    • और दीर्घकालिक अवधि (2036 तक)।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

  • प्रतिस्पर्धा का एक नया युग: चूँकि वैश्विक जोखिमों के विस्तार, परस्पर जुड़ाव और गति में निरंतर वृद्धि हो रही है, अतः 2026 निम्नलिखित कारणों से प्रतिस्पर्धा के युग को चिह्नित करता है:
    • चरमराती सहकारी व्यवस्थाएँ
    • बहुपक्षीय फ्रेमवर्क से सरकारों का पीछे हटना
    • सहयोग के बजाय टकराव
    • सहयोग के आधार ‘विश्वास’ के महत्त्व को कम आँकना।
  • पीछे हटता बहुपक्षवाद: बढ़ते संरक्षणवाद के साथ कम होता विश्वास, पारदर्शिता में कमी और विधि के शासन के प्रति घटता सम्मान मिलकर लंबे समय से चले आ रहे अंतर्राष्ट्रीय संबंधों, व्यापार और निवेश के लिए खतरा उत्पन्न कर रहे हैं और संघर्ष की प्रवृत्ति को बढ़ा रहे हैं।
  • 2026 में शीर्ष वैश्विक जोखिम:
    • भू-आर्थिक टकराव: यह 2026 में महत्वपूर्ण वैश्विक संकट बनकर उभरने वाला शीर्ष जोखिम कारक है।
    • राज्य-आधारित सशस्त्र संघर्ष: यह दूसरे स्थान पर है, जो निरंतर जारी भू-राजनीतिक तनावों और संघर्षों को दर्शाता है जिनमें और वृद्धि हो सकती है।
  • बढ़ते आर्थिक जोखिम: आर्थिक जोखिम, जिनमें आर्थिक मंदी, भू-आर्थिक टकराव, परिसंपत्ति की कीमतों का अचानक बढ़ना और फिर घटना और मुद्रास्फीति शामिल हैं, में अगले दो वर्षों में रैंकिंग में सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। यद्यपि पिछले वर्ष इनकी रैंकिंग तुलनात्मक रूप से कम थी।
  • अनियंत्रित तकनीकी जोखिम: भ्रामक सूचना और दुष्प्रचार, साइबर असुरक्षा, और एआई (AI) जैसी अग्रणी तकनीकों के प्रतिकूल परिणाम, जो श्रम बाजार से लेकर सूचना की सत्यनिष्ठा और स्वायत्त हथियार प्रणालियों तक विभिन्न क्षेत्रों में नए गंभीर जोखिम उत्पन्न कर रहे हैं।
  • समाज हाशिये पर हैं:
    • बढ़ते सामाजिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण से लोकतांत्रिक प्रणालियों पर दबाव पड़ रहा है।
    • “सड़क बनाम कुलीन वर्ग” के विमर्श की व्यापकता पारंपरिक शासन संरचनाओं के प्रति बढ़ते मोहभंग को दर्शाती है।
    • असमानता, धन का संकेंद्रण, जीवन निर्वाह की लागत में वृद्धि और स्थायी रूप से K-आकार की अर्थव्यवस्थाएं सामाजिक अनुबंध पर प्रश्न चिह्न लगाती हैं।
  • पर्यावरणीय चिंताओं को प्राथमिकता न देना: पर्यावरणीय जोखिम जैसे-चरम मौसमी घटनाएं, प्रदूषण, जैव विविधता की हानि और पारिस्थितिकी तंत्र के क्षरण के लिए पिछले वर्ष के निष्कर्षों की तुलना में दो वर्ष की समय सीमा हेतु गंभीरता स्कोर में गिरावट आई है, जो पर्यावरण की चिंताओं से पूर्ण विचलन को दर्शाता है।

रिपोर्ट में भारत-विशिष्ट निष्कर्ष

  • कार्यकारी जनमत सर्वेक्षण (EOS) 2025 द्वारा चिन्हित शीर्ष पांच जोखिमों में शामिल हैं:
    • साइबर असुरक्षा,
    • असमानता (आय और धन),
    • अपर्याप्त सार्वजनिक सेवाएं और सामाजिक सुरक्षा (शिक्षा, पेंशन, बुनियादी ढांचा),
    • आर्थिक गिरावट (मंदी और ठहराव) और
    • राज्य-आधारित सशस्त्र संघर्ष (प्रॉक्सी, गृह युद्ध, तख्तापलट, आतंकवाद)।
  • व्यापार में प्राकृतिक संसाधन: भारत, व्यापार और रणनीतिक वार्ताओं में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग रणनीतिक शक्ति के रूप में कर रहा है।
  • संभावित भू-राजनीतिक संघर्ष बिंदु:
    • पाकिस्तान के साथ सिंधु नदी बेसिन जल सुरक्षा के मुद्दे।
    • जल विचलन और संसाधनों का दबाव जो पड़ोसियों के साथ भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा सकता है।
  • लोकतंत्र में भ्रामक सूचना: संयुक्त राज्य अमेरिका, आयरलैंड, नीदरलैंड, पाकिस्तान, जापान, भारत और अर्जेंटीना के हालिया चुनावों में सोशल मीडिया पर प्रसारित गढ़ी गई सामग्री  एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी है। यह सामग्री काल्पनिक घटनाओं का चित्रण करने अथवा राजनीतिक प्रत्याशियों की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से प्रसारित की गई है, जिसके परिणामस्वरूप तथ्य एवं कल्पना के मध्य का अंतर अत्यंत अस्पष्ट हो गया है।

रिपोर्ट में मुख्य सिफारिशें

  • बहुपक्षीयता के साथ बहुध्रुवीयता: वैश्विक जोखिमों के प्रबंधन के लिए बहुपक्षीय ढाँचों को सुदृढ़ करना और विश्वास-आधारित सहयोग को बहाल करना।
  • सामाजिक ध्रुवीकरण का सामना: भ्रामक सूचनाओं और डीपफेक के अनियंत्रित प्रसार को नियंत्रित करने हेतु मीडिया साक्षरता, तथ्य-जाँच फ्रेमवर्क और पारदर्शी संचार रणनीतियों को सुदृढ़ करना अनिवार्य है। ये तत्व न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बाधित करते हैं, बल्कि सार्वजनिक विश्वास को भी क्षीण करते हैं।
  • तकनीकी प्रशासन: साइबर सुरक्षा को उन्नत करना, एआई (AI) के लिए अनुकूलनीय नियम बनाना और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करना।
  • सामाजिक सुरक्षा अंतरालों को पाटना: समावेशी विकास, इक्विटी, सामाजिक सुरक्षा जाल और सेवाओं तक न्यायसंगत पहुंच को बढ़ावा देना।

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