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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ: भारत में 16 जनवरी, 2026 को राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस मनाया गया। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष  2016 में शुरू की गई ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल का एक दशक पूरा हो चुका है।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • यह दिन ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल (16 जनवरी, 2016) की शुरुआत की स्मृति में मनाया जाता है और नवाचार तथा आर्थिक विकास को गति देने में उद्यमियों की भूमिका को मान्यता देता है।
  • यह पहल एक नीतिगत प्रोत्साहन से विकसित होकर एक पूर्ण जीवन-चक्र सहायता प्रणाली बन गई है, जिसमें विचार, वित्त पोषण, परामर्श और विस्तार शामिल हैं।

स्टार्टअप इंडिया पहल 

• ‘स्टार्टअप इंडिया’ भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसे जनवरी 2016 में शुरू किया गया था। इसका नेतृत्व वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा किया जाता है।

• इसकी शुरुआत एक सुदृढ़ और समावेशी स्टार्टअप इकोसिस्टम के निर्माण के लिए की गई थी, जो नवाचार को प्रोत्साहित करता है, उद्यमिता का समर्थन करता है और बड़े पैमाने पर रोजगारों का सृजन करता है।

• इस पहल का उद्देश्य नियामक बाधाओं को कम करके, पूंजी तक पहुंच में सुधार करके और उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ाकर भारत को एक वैश्विक नवाचार केंद्र में बदलना है।

• यह पहल तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है:

  • सरलीकरण और हैंडहोल्डिंग: स्व-प्रमाणन और शीघ्र निकास तंत्र के माध्यम से नियामक बोझ को कम करना।
  • वित्त पोषण सहायता और प्रोत्साहन: विभिन्न सरकार-समर्थित निधियों के माध्यम से कर छूट और पूंजी प्रदान करना।
  • उद्योग-अकादमिक भागीदारी और इनक्यूबेशन: नवाचार केंद्र और MAARG जैसे परामर्श मंचों की स्थापना करना।

10 वर्षों में ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल की उपलब्धियां (2016–2026)

• वैश्विक दायरा और रैंकिंग: स्टार्टअप इंडिया ने भारत को विश्व के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में बदल दिया है। यह 2016 में 500 से भी कम स्टार्टअप्स से बढ़कर आज 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स तक पहुँच गया है, जो अभूतपूर्व उद्यमशीलता के पैमाने को दर्शाता है।

• यूनिकॉर्न (Unicorns) का उदय और मूल्य सृजन: यूनिकॉर्न की संख्या 2014 में 4 से बढ़कर लगभग 125 सक्रिय यूनिकॉर्न हो गई है, जो भारतीय स्टार्टअप्स के सुदृढ़ मूल्य सृजन, निवेशकों के विश्वास और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रदर्शित करती है।

• रोजगार सृजन और आर्थिक प्रभाव: स्टार्टअप्स प्रमुख रोजगार प्रदाता के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगारों का सृजन किया है। अकेले वर्ष 2025 में लगभग 44,000 नए स्टार्टअप्स का पंजीकरण हुआ, जो अब तक की सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि है।

• उद्यमिता का लोकतंत्रीकरण: स्टार्टअप इंडिया ने महानगरीय और कुलीन बाधाओं अंत कर दिया है, जिससे टियर-II, टियर-III शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी जमीनी स्तर और वास्तविक विश्व की समस्याओं के समाधान पर केंद्रित उद्यम विकसित करने में सक्षम हुए हैं।

  • लगभग 50 प्रतिशत स्टार्टअप्स टियर-II और टियर-III शहरों के होते  हैं।

• महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप की वृद्धि: मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में से 45% से अधिक में अब कम से कम एक महिला निदेशक या भागीदार है। यह भारत को महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप वित्त पोषण के लिए विश्व के दूसरे सबसे बड़े इकोसिस्टम के रूप में स्थापित करता है और समावेशी विकास को बढ़ावा देता है।

• सुदृढ़ नवाचार इकोसिस्टम: अटल टिंकरिंग लैब्स, हैकथॉन, इनक्यूबेटर्स और एक्सेलेरेटर्स जैसी पहलों ने स्कूल से स्टार्टअप स्तर तक नवाचार को संस्थागत बना दिया है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि विचारों को त्यागने के बजाय उन्हें पोषित किया जाना चाहिए।

  • ‘स्टार्टअपब्लिंक ग्लोबल स्टार्टअप इकोसिस्टम इंडेक्स 2025’ के अनुसार, स्टार्टअप इकोसिस्टम के मामले में भारत विश्व स्तर पर 22वें स्थान पर है।

• नियामक सुधार: स्व-प्रमाणन, जन विश्वास अधिनियम के तहत 180 से अधिक प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर निकालने और सरलीकृत निकास जैसे उपायों के माध्यम से, इस पहल ने अनुपालन बोझ को कम किया है और विश्वास-आधारित शासन को बेहतर बनाया है।

• पूंजी तक पहुंच और वित्तीय सहायता: ₹25,000 करोड़ से अधिक निवेश वाले ‘स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स’ (FFS), सीड फंड योजनाओं और क्रेडिट गारंटी ढांचे जैसे सरकार-समर्थित तंत्रों ने सुनिश्चित किया है कि संपार्श्विक की कमी नवाचार को हतोत्साहित न करे।

• सार्वजनिक खरीद और बाजार पहुंच: GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) के माध्यम से, लगभग 35,000 स्टार्टअप्स और छोटे व्यवसायों को ₹50,000 करोड़ मूल्य के लगभग 5 लाख ऑर्डर प्राप्त हुए हैं, जिससे स्टार्टअप्स, सरकारी आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत हुए हैं।

‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल के मुद्दे और चुनौतियां

  • निम्न उत्तरजीविता दर: कमजोर ‘उत्पाद-बाजार फिट’ (product-market fit), सीमित इंक्यूबेशन के बाद सीमित सहायता और बाजार पहुंच संबंधी मुद्दों के कारण भारतीय स्टार्टअप्स की विफलता दर उच्च है।
  • कमजोर उद्योग-अकादमिक संबंध: विश्वविद्यालयों से अनुसंधान का पर्याप्त व्यावसायीकरण न होना और सीमित कुशल एवं रोजगार योग्य कार्यबल के कारण स्टार्टअप इकोसिस्टम कमजोर बन हुआ है।
  • सीमित डीप-टेक (Deep-Tech) स्टार्टअप्स: भारत के स्टार्टअप विकास का झुकाव अभी भी मुख्य रूप से ई-कॉमर्स, फिनटेक (Fintech) और एड-टेक (Ed-tech) क्षेत्रों की ओर है।

Source:
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