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संदर्भ: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 जनवरी को अपने लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र गांधीनगर में जैव-सुरक्षा स्तर 4 (BSL-4) रोकथाम सुविधा और प्रयोगशाला का शिलान्यास किया।
अन्य संबंधित जानकारी:
• यह भारत में ऐसी दूसरी नागरिक अनुसंधान सुविधा होगी और पहली ऐसी प्रयोगशाला होगी जो पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित और नियंत्रित होगी।
• वैश्विक स्तर पर, वर्तमान में 69 BSL-4 प्रयोगशालाएं संचालित हैं या विकासाधीन हैं।
नई BSL-4 जैव-रोकथाम सुविधा की मुख्य विशेषताएं
• स्थल और पूंजीगत परिव्यय: BSL-4 प्रयोगशाला का निर्माण गुजरात राज्य जैव प्रौद्योगिकी मिशन (GSBTM) के तहत गांधीनगर (गुजरात) में 11,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में ₹362 करोड़ की लागत से किया जा रहा है।
• समयसीमा: इसकी योजना 2022 के मध्य में बनाई गई थी और तीन साल से अधिक समय के बाद 13 जनवरी, 2026 को इसका शिलान्यास किया गया।
• निगरानी: यह प्रयोगशाला गुजरात जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान केंद्र (GBRC) के अधीन कार्य करेगी। GBRC के पास वर्तमान में BSL-2+ प्रयोगशाला है और यह भारत में कोविड महामारी के कारक SARS-CoV-2 कोरोनावायरस के संपूर्ण जीनोम अनुक्रम को डिकोड करने वाले पहले संस्थानों में से एक था।
• बुनियादी ढांचा और अनुसंधान क्षमता:
- इस सुविधा में BSL-4, BSL-3, BSL-2 के साथ-साथ ABSL-4 और ABSL-3 प्रयोगशाला मॉड्यूल, उन्नत उपयोगिताएँ और सहायक बुनियादी ढाँचा होगा।
- ABSL-4 (Animal BSL) प्रयोगशाला के दो घटक होंगे: पहला नमूनों का परीक्षण करेगा, और दूसरा पशुओं में एंटीबॉडी से टीके तैयार करेगा।
• विस्तृत परामर्श: इस परियोजना के परामर्शदाताओं में शामिल हैं:
- भारत का राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), जिसे BSL-3 लैब स्थापित करने का अनुभव है।
- स्विट्जरलैंड की बास्लर एंड हॉफमैन एजी (Basler & Hoffmann AG) जैव-सुरक्षा सलाहकार के रूप में।
- जर्मनी का एचटी ग्रुप (HT Group GmbH), और अन्य।
• सख्त अंतर्राष्ट्रीय मानकों का अनुपालन: यह प्रयोगशाला अमेरिकी सी़डीसी (CDC), अमेरिकी एनआईएच (NIH), जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) भारत, और आईसीएमआर (ICMR) द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुपालन में विकसित की जा रही है।
BSL-4 सुविधा क्या है?
• तकनीकी शब्द: जैव-सुरक्षा स्तर 4 जैविक रोकथाम के उच्चतम स्तर का प्रतिनिधित्व करता है। ये प्रयोगशालाएं दुनिया के सबसे खतरनाक और जीवन के लिए घातक रोगजनकों पर सुरक्षित रूप से शोध करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं क्योंकि ये रोगजनक अत्यधिक संक्रामक होते हैं और इनके लिए प्रायः प्रभावी टीके या उपचार उपलब्ध नहीं होते हैं।
• स्व-स्थाने (In-situ) परिवेश: इन प्रयोगशालाओं में, अंतर्राष्ट्रीय मानकों के आधार पर समय-समय पर निरीक्षण और निगरानी की जाने वाली अत्यंत नियंत्रित स्थितियों के तहत, वैज्ञानिक उच्च जोखिम वाले रोगजनकों पर उन्नत शोध करते हैं, नैदानिक टीके और उपचार के विकास के त्रिकोण पर काम करते हैं, तथा बीमारियों के एकाएक प्रसार की त्वरित जांच करके प्रतिक्रिया का संचालन करते हैं।
भारत में मौजूदा BSL-4 और ABSL-4 प्रयोगशालाएं
• BSL-4 प्रयोगशाला:
- नागरिक: वर्तमान में भारत में केवल एक नागरिक BSL-4 प्रयोगशाला कार्यात्मक है, जो पुणे (महाराष्ट्र) में राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) में स्थित है।
- रक्षा: 2024 के अंत में, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में अपनी स्वयं की BSL-4 प्रयोगशाला स्थापित की।
• BSL-3/ABSL-3 प्रयोगशाला: वर्तमान में भारत में सबसे घातक पशुजन्य रोगों का अध्ययन करने के लिए केवल दो उच्च-सुरक्षा प्रयोगशालाएं हैं:
- भोपाल (मध्य प्रदेश) में स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान (ICAR-NIHSAD) जिसकी वर्तमान रेटिंग ABSL-3 है और जून 2025 की घोषणा के अनुसार इसे ABSL-4 में अपग्रेड किया जाना प्रस्तावित है।
- भुवनेश्वर (ओडिशा) में स्थित अंतर्राष्ट्रीय खुरपका और मुँहपका रोग केंद्र (ICAR-ICFMD)।
• इसके अतिरिक्त, भारत में 154 BSL-2 और 11 BSL-3 प्रयोगशालाएं (सार्वजनिक और निजी दोनों) हैं।
जैव-रोकथाम सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख पहल और नीतियां
• महामारी और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन हेतु प्रयोगशालाओं का राष्ट्रव्यापी नेटवर्क: यह ‘विषाणु अनुसंधान और नैदानिक प्रयोगशालाओं’ (VRDL) का नेटवर्क स्थापित करने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
• उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अनुसंधान का गहनीकरण (IRHPA) कार्यक्रम: इस योजना के तहत, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) ने 5 BSL/ABSL-3 प्रयोगशालाओं को वित्तपोषित किया है।
• राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन (NOHM): इसमें विभिन्न मंत्रालयों में BSL-3 प्रयोगशालाओं का नेटवर्क स्थापित करना और कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण आयोजित करना शामिल है।
• जैव-प्रौद्योगिकी विभाग (DBT):विभिन्न DBT संस्थानों में भी कई 26 जैव-सुरक्षा प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं।
• भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR): विभिन्न ICAR संस्थानों में 9 जैव-सुरक्षा प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं।
• वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR): विभिन्न CSIR संस्थानों में 11 जैव-सुरक्षा प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं।
BSL-4 प्रयोगशाला सुविधा का महत्त्व
• महामारी की तैयारी को सुदृढ़ करना: यह न केवल रियल टाइम में मानव रोग के प्रकोपों पर त्वरित प्रतिक्रिया देने में मदद करेगा, बल्कि पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले ज़ूनोटिक रोगों पर अनुसंधान और टीकों के विकास में भी सहायता करेगा।
• भारत के लिए “स्वास्थ्य कवच”: BSL-2, BSL-3 और BSL-4 प्रयोगशालाओं के बढ़ते नेटवर्क के साथ जैव-सुरक्षा बुनियादी ढांचे का विस्तार देश में “स्वास्थ्य सुरक्षा और जैव प्रौद्योगिकी के एक नए युग की शुरुआत” है।
• महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढाँचा: गांधीनगर के सेक्टर-28 में निर्मित होने वाली यह BSL-4 प्रयोगशाला, एनिमल बायो-सेफ्टी लेवल (ABSL) सुविधा के साथ, एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति होगी जहाँ मानव जाति के लिए ज्ञात सबसे घातक रोगजनकों (pathogens) पर शोध किया जाएगा।
• वन हेल्थ दृष्टिकोण: ज़ूनोटिक रोगों पर शोध मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को सामूहिक रूप से संबोधित करता है।
