ओलिव रिडले कछुओं की सेटेलाइट टैगिंग
संदर्भ: तमिलनाडु राज्य ने ओलिव रिडले कछुओं को ट्रैक करने के लिए सैटेलाइट टेलीमेट्री अध्ययन की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य प्रजनन व्यवहार और प्रवास पैटर्न की वैज्ञानिक निगरानी के माध्यम से उनका तटीय संरक्षण सुनिश्चित करना है।
अन्य संबंधित जानकारी
- दो वर्षीय वैज्ञानिक अध्ययन के हिस्से के रूप में जनवरी 2026 में चेन्नई के समुद्र तटों पर ओलिव रिडले समुद्री कछुओं की सैटेलाइट टैगिंग शुरू की गई।
- बेसेंट नगर के पास प्रजनन के लिए तट पर आए दो मादा ओलिव रिडले कछुओं की सैटेलाइट टैगिंग की गई और फिर उन्हें वापस समुद्र में छोड़ दिया गया।
- यह पहल तमिलनाडु तट पर इस तरह का पहला रेडियो टेलीमेट्री अध्ययन है।
- यह अध्ययन 2025 से 2027 तक किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य समुद्री कछुओं के संरक्षण प्रयासों को वैज्ञानिक रूप प्रदान करना है।
- यह परियोजना तमिलनाडु के पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग द्वारा अगस्त 2025 में जारी एक सरकारी आदेश के बाद शुरू की गई है।
- इस अध्ययन का कार्यान्वयन संयुक्त रूप से राज्य वन विभाग, भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और उन्नत वन्यजीव संरक्षण संस्थान (AIWC), वंडालूर द्वारा किया जा रहा है।
- सैटेलाइट टैग नवंबर से अप्रैल तक चलने वाली प्रजनन ऋतु के दौरान तट के समीपवर्ती पानी में कछुओं की गतिविधियों को ट्रैक करने में मदद करेंगे।
- कछुओं के प्रवास के पैटर्न, प्रजनन के स्थान के प्रति अनुकूलन और उत्तरजीविता की दीर्घकालिक निगरानी के लिए ‘फ्लिपर टैग‘ का भी उपयोग किया जाएगा।
- इस परियोजना के लिए कुल स्वीकृत राशि लगभग 84 करोड़ रुपये है।
- टैगिंग से प्राप्त डेटा मछली पकड़ने की गतिविधियों को विनियमित करने और प्रजनन अवधि के दौरान कछुओं की आकस्मिक मृत्यु होने की दर को कम करने में मदद करेगा।
ओलिव रिडले समुद्री कछुओं के बारे में

- ओलिव रिडले कछुए विश्व की सबसे छोटी और सबसे अधिक संख्या में पायी जाने वाली समुद्री कछुओं की प्रजातियों में से एक हैं।
- ये भारतीय तटरेखा के पास अपने सामूहिक प्रजनन के लिए प्रसिद्ध हैं, जिन्हें ‘अरिबाडा‘ (Arribadas) कहा जाता है।
- भारत में, इनके मुख्य प्रजनन स्थल ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ क्षेत्र हैं।
- इस प्रजाति को IUCN रेड लिस्ट में ‘संवेदनशील‘ के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
- मछली पकड़ने के जाल, तटीय विकास, प्लास्टिक प्रदूषण और कृत्रिम रोशनी ओलिव रिडले कछुओं के लिए गंभीर खतरा बनते हैं।
- सैटेलाइट और ‘फ्लिपर टैगिंग’ उनके प्रवास के मार्गों, भोजन के क्षेत्रों और मछली पकड़ने के उच्च-जोखिम क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करते हैं।
- सेटेलाइट टैगिंग, साक्ष्य-आधारित संरक्षण नीतियों और प्रजनन वाले समुद्र तटों पर सुरक्षा उपायों को बेहतर करने में सहायक होती है।
राष्ट्रीय युवा दिवस 2026
संदर्भ: स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती के उपलक्ष्य में देश में 12 जनवरी, 2026 को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जा रहा है।
राष्ट्रीय युवा दिवस

- वर्ष 1984 में इस दिवस को मनाने की घोषणा करने के बाद भारत में 12 जनवरी 1985 को पहला ‘राष्ट्रीय युवा दिवस‘ मनाया गया था और तब से यह प्रतिवर्ष मनाया जाता है।
- वर्ष 2026 के लिए इस दिवस का विषय “स्वयं को जाग्रत करें, विश्व को प्रभावित करें” है जो एक सफल और दो-चरणीय ढांचागत दृष्टिकोण की पेशकश करता है।
- अनुस्मारक अवसर से कहीं अधिक, राष्ट्रीय युवा दिवस भारत के युवाओं की आकांक्षाओं, ऊर्जा और उत्तरदायित्वों को प्रतिबिंबित करने का क्षण है। उल्लेखनीय है कि युवा ‘विकसित भारत @2047′ की यात्रा में देश की प्रगति का आधार हैं।
राष्ट्रीय युवा दिवस के उद्देश्य
- स्वामी विवेकानंद के जीवन और संदेश के बारे में जागरूकता का सृजन करना, ताकि युवाओं को राष्ट्र-निर्माण में भाग लेने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया जा सके।
- युवाओं को विभिन्न गतिविधियों में शामिल करना और उनमें सेवा की भावना तथा स्वयंसेवा के विचार का संवर्धन करना।
युवा कौन हैं?
- युवा आयु वर्ग की कोई सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत अंतर्राष्ट्रीय परिभाषा नहीं है। सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए, संयुक्त राष्ट्र 15 से 24 वर्ष के आयु वर्ग के व्यक्तियों को ‘युवा’ के रूप में परिभाषित करता है।
- राष्ट्रीय युवा नीति 2014 के अनुसार, युवाओं को 15-29 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों के रूप में परिभाषित किया गया है, जो भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 40% है।
युवा और उनके विकास के लिए प्रमुख सरकारी योजनाएं
- मेरा युवा भारत (MY Bharat): यह एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो युवाओं को स्वयंसेवा, नेतृत्व, कौशल विकास और राष्ट्र-निर्माण के अवसरों से जोड़ता है, ताकि सक्रिय नागरिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जा सके।
- स्किल इंडिया मिशन (PMKVY सहित): यह युवाओं को प्रशिक्षण, पुन: कौशल और प्रमाणन के माध्यम से उद्योग-प्रासंगिक कौशल से परिपूर्ण करने की एक प्रमुख पहल है, ताकि उनकी रोजगार क्षमता को बढ़ाया जा सके।
- अग्निपथ योजना: यह एक अल्पकालिक सैन्य भर्ती कार्यक्रम है जो युवाओं को अनुशासित प्रशिक्षण, तकनीकी कौशल और सेवा के बाद रोजगार सहायता प्रदान करता है।
- स्टार्टअप इंडिया: यह युवाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली एक व्यापक पहल है, जो स्टार्टअप्स के लिए ‘व्यापार सुगमता’ वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन और बाजार तक पहुंच प्रदान करती है।
परम शक्ति
संदर्भ: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने IIT मद्रास में ‘परम शक्ति‘ नामक एक सुपरकंप्यूटिंग सुविधा का शुभारंभ किया जहाँ स्वदेशी रूप से विकसित ‘परम रुद्र‘ सिस्टम स्थापित गया है।
अन्य संबंधित जानकारी

- इस सिस्टम को राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के हिस्से के रूप में उन्नत कंप्यूटिंग विकास केंद्र (C-DAC) द्वारा डिजाइन और स्थापित किया गया था।
- C-DAC (MeitY के अंतर्गत) उन्नत कंप्यूटिंग और सूचना प्रौद्योगिकियों में भारत का प्रमुख अनुसंधान एवं विकास (R&D) संगठन है। यह भारत के रणनीतिक, वैज्ञानिक और डिजिटल मिशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की एक संयुक्त पहल है।
- इस सुविधा में एकीकृत बिजली, कूलिंग और डेटा सेंटर अवसंरचना हैं, ताकि निर्बाध हाई परफॉरमेंस कंप्यूटिंग संचालन सुनिश्चित किया जा सके।
- यह नई सुविधा एयरोस्पेस, पदार्थ विज्ञान, परमाणु अनुसंधान और दवा की खोज जैसे क्षेत्रों में कंप्यूटिंग क्षमताओं को बढ़ावा देगी।
- राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के तहत, ‘परम शक्ति’ में ‘परम रुद्र’ सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित है, जिसमें निरंतर बिजली आपूर्ति, कुशल कूलिंग और डेटा सेंटर परिचालन की सुविधाएं मौजूद हैं।
परम शक्ति के बारे में
- यह ‘परम रुद्र’ सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर द्वारा संचालित है, जिसे C-DAC की स्वदेशी ‘रुद्र’ (RUDRA) श्रृंखला के सर्वरों का उपयोग करके बनाया गया है।
- परम रुद्र एक अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटिंग सुविधा है जिसे राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के चरण-3 के तहत विकसित किया गया है। इसे C-DAC द्वारा डिजाइन और स्थापित किया गया है ताकि IIT बॉम्बे और अन्य क्षेत्रीय अनुसंधान एवं इंजीनियरिंग संस्थानों की उन्नत गणना संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति की जा जा सके।
- यह सिस्टम 3.1 पेटाफ्लॉप्स की अधिकतम कंप्यूटिंग क्षमता प्रदान करता है, जिसका अर्थ है कि यह प्रति सेकंड 3.1 क्वाड्रिलियन (3.1 हजार लाख करोड़) से अधिक गणनाएँ कर सकता है।
- पेटाफ्लॉप (Petaflop), कंप्यूटर प्रोसेसिंग गति को मापने का पैमाना है, जो प्रति सेकंड एक क्वाड्रिलियन जटिल दशमलव गणनाएँ (Floating-Point Operations) का प्रतिनिधित्व करता है।
- यह सुविधा पूर्णतः भारत में विकसित और विनिर्मित है, और यह ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर जिसमें AlmaLinux और C-DAC द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित ‘सिस्टम सॉफ्टवेयर स्टैक’ शामिल है, पर चलती है।
नेशनल IED डेटा मैनेजमेंट सिस्टम
संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय गृह मंत्री ने नेशनल IED डेटा मैनेजमेंट सिस्टम (NIDMS) के परिचालन की शुरुआत की। यह परिष्कृत विस्फोटक उपकरण (Improvised Explosive Device) की घटनाओं से संबंधित डेटा प्रबंधन के लिए एक केंद्रीकृत और सुरक्षित राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है।
अन्य संबंधित जानकारी
- NIDMS एक व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यह IED घटनाओं की मानक रिकॉर्डिंग और रियल टाइम विश्लेषण के लिए विकसित किया गया है। इसमें विस्फोटकों के प्रकार, उन्हें सक्रिय करने के तरीके, घटनास्थल, फोरेंसिक निष्कर्ष और संचालन के पैटर्न जैसी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध होती है।
- इसे गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU), IIT-दिल्ली, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के सहयोग से राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) द्वारा विकसित किया गया है।
- यह “आतंकवाद के खिलाफ अगली पीढ़ी के सुरक्षा कवच” के रूप में कार्य करेगा। यह आतंकवादी गतिविधियों की जांच करने, विस्फोटों की प्रवृत्ति को समझने और उनके विरुद्ध प्रभावी रणनीतियां तैयार करने में मदद करेगा।
- इस नए सिस्टम का लक्ष्य विभिन्न डेटासेट को एकीकृत करना और विश्लेषण के लिए उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित उपकरणों का उपयोग करना है। यह विभिन्न डेटा स्रोतों को जोड़ने के प्रयासों में तेजी लाएगी और देश की आंतरिक सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
- मुख्य विशेषताएँ:
- यह केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक दो-तरफा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा। इससे राष्ट्रव्यापी स्तर पर आईईडी और विस्फोट से संबंधित डेटा को अपलोड करना और जांच में सहायता के लिए उसका विश्लेषण करना संभव होगा।
- यह प्रणाली साक्ष्य-आधारित अभियोजन का समर्थन करेगी, जिससे अपराधियों को सजा दिलाना आसान होगा, और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित होगा।
- इसे ICJS-2 के साथ एकीकृत किया जाएगा। साथ ही, अन्य डेटाबेस से जुड़ने और विश्लेषण के लिए इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी उपयोग किया जाएगा।
- ICJS-2 (इंटर–ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम) भारत के इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम का दूसरा चरण है। इसका उद्देश्य सभी आपराधिक न्याय संस्थानों के बीच निर्बाध डिजिटल एकीकरण के माध्यम से त्वरित, पारदर्शी और कुशल न्याय वितरण सुनिश्चित करनी है।
- यह पहल “वन नेशन, वन डेटा रिपॉजिटरी” के दृष्टिकोण के अनुरूप है। इसके तहत विभिन्न विभागों का डेटा एक राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में उपलब्ध होगा।
भारत वाइमर ट्रायंगल फॉर्मेट में शामिल हुआ
संदर्भ: हाल ही में भारत वाइमर ट्रायंगल फॉर्मेट में शामिल हुआ। इस अवसर पर भारत के विदेश मत्री ने यूरोप के मंत्रियों के साथ महत्त्वपूर्ण चर्चाएँ कीं।
अन्य संबंधित जानकारी:
- भारत के विदेश मंत्री ने फ्रांस के विदेश मंत्री, जर्मनी के यूरोप और जलवायु कार्य राज्य मंत्री तथा पोलैंड के विदेश मंत्री के साथ चर्चा की।
- उन्होंने इन वार्ताओं को संक्षिप्त लेकिन गहन और स्पष्ट कहा, जिनमें भारत-यूरोपीय संघ (EU) संबंधों, हिंद-प्रशांत क्षेत्र और यूक्रेन में चल रहे संघर्ष जैसे विषय शामिल थे।
- भारत के विदेश मंत्री ने फ्रांस के विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की, जिसमें भारत-फ्रांस विशेष रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की गई, जोकि यूरोप में इस तरह की पहली साझेदारी है।
- मुख्य बिंदु:
- यूरोपीय संघ के साथ-साथ अलग-अलग देशों के स्तर पर भी भारत और यूरोप के संबंधों में असीमित संभावनाएं मौजूद हैं, जिन्हें अभी पूरी तरह से काम में नहीं लाया गया है। भविष्य के लिए सहयोग के कई नए क्षेत्रों की पहचान की जानी अभी शेष है।
- उभरते हुए बहुध्रुवीय वैश्विक परिदृश्य में जहाँ अस्थिरता और अनिश्चितताएं विद्यमान हैं, साझा हितों और एक समान विजन वाले समान विचारधारा के देशों के बीच गहन सहयोग की आवश्यकता है।
वाइमर ट्रायंगल के बारे में

- वाइमर ट्रायंगल फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड का एक क्षेत्रीय गठबंधन है, जिसे 1991 में जर्मनी के शहर ‘वाइमर’ में गठित किया गया था।
- इसका उद्देश्य यूरोप के भविष्य के संबंध में साझा मौलिक हितों की पहचान करना और सीमा पार सहयोग का विस्तार करना था।
- एक 10-सूत्रीय घोषणापत्र में, मंत्रियों ने यूरोपीय एकीकरण की प्रक्रिया में इन तीनों द्वारा निभाई जाने वाली प्रमुख जिम्मेदारियों को रेखांकित किया।
- इन तीनों देशों के विदेश और यूरोपीय मामलों के मंत्री वर्तमान राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करने और संयुक्त पहल विकसित करने के लिए त्रिपक्षीय वार्ता हेतु नियमित रूप से बैठक करते हैं।
