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सामान्य अध्ययन-3: आईटी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-प्रौद्योगिकी, जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जागरुकता।

संदर्भ: हाल ही में भारत ने फुल-स्केल एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट इंजन का लंबी अवधि का सफल जमीनी परीक्षण (ग्राउंड टेस्ट) करके हाइपरसोनिक मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

परीक्षण के मुख्य बिंदु

  • यह परीक्षण रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा हैदराबाद में स्थित इसकी रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला (DRDL) के माध्यम से किया गया।
  • DRDL ने ‘एक्टिवली कूल्ड फुल-स्केल स्क्रैमजेट कंबस्टर’ का लंबी अवधि का सफल ग्राउंड टेस्ट किया।
  • इंजन का परीक्षण ‘स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप परीक्षण सुविधा में बारह मिनट से अधिक समय तक किया गया और फिर सतत सुपरसोनिक दहन की पुष्टि हुई।
  • यह परीक्षण अप्रैल 2025 में किए गए एक सफल सब-स्केल स्क्रैमजेट परीक्षण के बाद किया गया है और हाइपरसोनिक प्रणोदन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।
  • कंबस्टर और परीक्षण सुविधा दोनों को DRDL द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया है और भारतीय उद्योग भागीदारों के सहयोग से विकसित किया गया है।
  • यह उपलब्धि लंबी अवधि की हाइपरसोनिक उड़ान के लिए ‘एयर ब्रीदिंग प्रोपल्शन सिस्टम’ की प्रभावशीलता को दर्शाती है।

रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला (DRDL) के बारे में

  • DRDL, DRDO के अंतर्गत 1961 में स्थापित भारत की एक प्रमुख बहु-विध प्रयोगशाला है। यह मिसाइल प्रणालियों के डिजाइन और विकास के लिए समर्पित है।
  • DRDL युद्ध संबंधी और रणनीतिक मिसाइल प्रणालियों के लिए मुख्य “डिजाइन और विकास केंद्र” के रूप में कार्य करता है।
    • विशेषज्ञता: DRDL को एरोडायनामिक्स (वायुगतिकी), एयरफ्रेम डिजाइन, कंप्यूटेशनल फ्लूइड डायनेमिक्स (CFD), और प्रणोदन (ठोस,तरल, रैमजेट और स्क्रैमजेट) के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल है।
    • मुख्य कार्यक्रम: DRDL ने एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) का नेतृत्व किया, जिसके तहत पृथ्वी, अग्नि, आकाश, त्रिशूल और नाग जैसी प्रसिद्ध मिसाइलों को विकसित किया गया।

परीक्षण का महत्त्व

  • रणनीतिक निवारण: हाइपरसोनिक हथियार उन्नत हवाई रक्षा प्रणालियों को भेद सकते हैं, जो भारत की विश्वसनीय न्यूनतम निवारण की क्षमता को और बढ़ाते हैं।
  • भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम का आधार: यह सफल परीक्षण भारत की हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को विकसित करने की क्षमता को शक्ति प्रदान करता है, जो लंबे समय तक ध्वनि की गति से पांच गुना से अधिक (5+ मैक) गति से उड़ान भर सकती हैं।
  • रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत: सबसे जटिल प्रणोदन प्रौद्योगिकियों में से एक को अपने देश में विकसित करने की क्षमता हासिल करने से रॉकेट प्रणोदन और अगली पीढ़ी के लंबी दूरी के हथियारों पर भारत की निर्भरता कम होगी।
  • हाइपरसोनिक ‘एलीट क्लबमें भारत का प्रवेश: विश्व के केवल कुछ ही देशों (अमेरिका, रूस और चीन) ने अब तक ऑपरेशनल स्क्रैमजेट-आधारित हाइपरसोनिक क्षमता का प्रदर्शन किया है।

Source:
Hindustan Times
The Hindu
PIB
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