संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन एवं कार्यान्वयन से संबंधित विषय।
सामान्य अध्ययन -3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।
संदर्भ: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा तैयार किए गए एक रोडमैप के अनुसार, भारत की योजना अगले दो दशकों में 100 गीगावाट (GW) पंप स्टोरेज जलविद्युत क्षमता प्राप्त करने की है क्योंकि यह सौर और पवन ऊर्जा के बढ़ते प्रभाव वाले विद्युत तंत्र को स्थिरता प्रदान करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
अन्य संबंधित जानकारी
• CEA द्वारा तैयार “2035-36 तक 100 गीगावाट पंप स्टोरेज जलविद्युत परियोजनाओं के लिए रोडमैप” नामक रिपोर्ट को हिमाचल प्रदेश के परवाणू में विद्युत मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर‘ में जारी किया गया।
• इस शिविर में विद्युत वितरण उपयोगिताओं (डिस्कॉम) की 14वीं एकीकृत रेटिंग और रैंकिंग रिपोर्ट भी जारी की गई।
- टॉरेंट पावर अहमदाबाद और टॉरेंट पावर सूरत ने वित्त वर्ष 2024-25 की रेटिंग में शीर्ष स्थान प्राप्त किया।
- राज्य स्वामित्व वाले डिस्कॉम में उत्तर गुजरात विज कंपनी लिमिटेड (UGVCL) ने सर्वश्रेष्ठ रेटिंग प्राप्त की।
• चिंतन शिविर के दौरान विद्युत संशोधन विधेयक, 2026 के मसौदे पर चर्चा की गई ताकि वित्तीय व्यवहार्यता, आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता और ऊर्जा संक्रमण सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही, विकसित भारत 2047 के विजन को पूरा करने के लिए विद्युत नीति, 2026 के मसौदे पर भी विचार-विमर्श हुआ।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
• बढ़ती ऊर्जा भंडारण मांग का समाधान करने की भारत की रणनीति: गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता को 2030 तक 500 GW और 2035 तक 701 GW तक बढ़ाना।
• लक्षित क्षमता:
- अल्पावधि: 2029-30 तक कुल ऊर्जा भंडारण आवश्यकता का 62 GW
- मध्यम अवधि: नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती पैठ के कारण 2034-35 तक 161 GW
- दीर्घावधि: 2035-36 तक 100 GW पंप स्टोरेज परियोजनाओं (PSPs) को कमीशन करना।
• स्थल क्षमता: 120 से अधिक संभावित पंप स्टोरेज स्थलों की पहचान की गई है जिनकी कुल क्षमता 180 GW से अधिक है, जो चरणबद्ध विकास के लिए लचीलापन प्रदान करते हैं।
• वर्तमान प्रगति: लगभग 22 GW की पंप स्टोरेज परियोजनाएं विकास के विभिन्न चरणों में हैं, और अन्य 50-60 GW को 2032-37 के बीच शुरू करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
• निवेश की आवश्यकता: 100 GW क्षमता के निर्माण के लिए अनुमानित संचयी निवेश ₹5-6 लाख करोड़ (लगभग $77 बिलियन) है और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और बाजार-आधारित खरीद से वित्तपोषण में सुधार की अपेक्षा है।
• प्रारंभिक केंद्र: आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्य इस विस्तार के शुरुआती केंद्र होंगे। ये राज्य सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने के लिए मौजूदा जलाशयों और ‘क्लोज्ड-लूप’ प्रणालियों का उपयोग करेंगे।
पंप स्टोरेज परियोजनाओं (PSPs) के बारे में
• परिभाषा: पंप स्टोरेज परियोजनाएं, जिन्हें पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज (PHS) भी कहा जाता है, बड़े पैमाने की ऊर्जा भंडारण प्रणालियां हैं जो बिजली संचय और उत्पादन के लिए जल की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का उपयोग करती हैं।
• PSPs के प्रकार:
- ऑन-स्ट्रीम (On-stream) योजना: दोनों जलाशय किसी नदी/धारा/नाले पर स्थित होते हैं।
- ऑफ-स्ट्रीम ओपन लूप (Off-stream open loop) योजना: एक जलाशय नदी/धारा पर होता है, जबकि दूसरा (ऑफ-स्ट्रीम जलाशय) किसी बारहमासी नदी या धारा पर स्थित नहीं होता है।
- ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड लूप (Off-stream closed loop) योजना: कोई भी जलाशय किसी नदी या बारहमासी धारा पर स्थित नहीं होता है।
• पंप स्टोरेज परियोजनाओं की आवश्यकता और लाभ
- नवीकरणीय स्रोतों के साथ एकीकरण: नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की तेजी से बढ़ती हिस्सेदारी विशेष रूप से परिवर्तनशील और रुक-रुक कर मिलने वाली सौर एवं पवन ऊर्जा के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों का राष्ट्रीय ग्रिड में सुचारू एकीकरण सुनिश्चित करने के लिए यह अनिवार्य है।
- लंबी और विश्वसनीय भंडारण अवधि:
- वैश्विक स्तर पर, स्थापित ऊर्जा भंडारण क्षमता में पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं (PSPs) की हिस्सेदारी 95% से अधिक है, जो लगभग 9,000 GWh विद्युत का भंडारण करती हैं; यह बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण समाधान के रूप में इनकी प्रमाणित प्रभावशीलता को रेखांकित करता है।
- ये प्रतिदिन लगभग आठ घंटे तक के लंबी अवधि के डिस्चार्ज के साथ गीगावाट-स्तर का भंडारण प्रदान करने में सक्षम हैं, और बार-बार होने वाले ‘स्टार्ट-स्टॉप’ संचालन तथा त्वरित रैंपिंग क्षमताओं के माध्यम से परिचालन संबंधी लचीलापन प्रदान करते हैं।
- इनका जीवन चक्र लगभग 100 वर्ष लंबा होता है (इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम के आवधिक रखरखाव के साथ), जो इन्हें टिकाऊ और संधारणीय परिसंपत्ति बनाता है।
- पर्यावरण के अनुकूल: उच्च घरेलू सामग्री वाली स्वच्छ और हरित तकनीक होने के कारण, ये ऊर्जा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर’ बनने में योगदान देते हैं।

रिपोर्ट का महत्व
• यह रोडमैप रेखांकित करता है कि भारत का ‘स्वच्छ ऊर्जा निवेश अभियान’ कैसे परिवर्तनशील नवीकरणीय पीढ़ी और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति के बीच के अंतर को पाटने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह ऊर्जा सुरक्षा, लागत दक्षता और जलवायु लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
• यह रणनीति पंप स्टोरेज को ग्रिड-स्केल ऊर्जा भंडारण के आधार के रूप में स्थापित करती है, जो पीक डिमांड के प्रबंधन, 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने और देश के नेट जीरो संक्रमण का समर्थन करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
• यह रिपोर्ट भारत के उन स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप है जिनके तहत 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम की जा सके।
