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संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के तीव्र विस्तार वाले स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए उद्यम पूंजी जुटाने हेतु ₹10,000 करोड़ के कोष के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी दी।
अन्य संबंधित जानकारी
- यह योजना स्टार्टअप इंडिया पहल (2016) के तहत प्रारंभिक चरण के वित्तपोषण अंतराल को दूर करने के लिए शुरू की गई है और ‘स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स’ (FFS) के पहले चरण पर आधारित है।
- इसका लक्ष्य घरेलू पूंजी बढ़ाकर, उद्यम पूंजी (VC) इकोसिस्टम को सुदृढ़ करके और नवाचार-आधारित उद्यमिता का समर्थन करके भारत की स्टार्टअप यात्रा के “अगले चरण” में तेजी लाना है।
- उद्यम पूंजी निजी इक्विटी वित्तपोषण का एक रूप है जो निवेशकों द्वारा उच्च विकास क्षमता वाले स्टार्टअप और शुरुआती चरणों की कंपनियों को इक्विटी (हिस्सेदारी) के बदले प्रदान किया जाता है।
- राष्ट्रीय विजन ‘विकसित भारत @ 2047’ के अनुरूप, यह फंड उद्यमियों को सशक्त बनाने, नवाचार को बढ़ावा देने और भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की पूर्ण क्षमता को उजागर करने के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
योजना की मुख्य विशेषताएँ
- कोष और संरचना: ₹10,000 करोड़ का सरकार समर्थित कोष प्रत्यक्ष स्टार्टअप फंडिंग के बजाय वैकल्पिक निवेश कोष (AIFs) के माध्यम से बनाया गया है, जो पेशेवर पूंजी आवंटन सुनिश्चित करता है।
- वैकल्पिक निवेश कोष भारत में सेबी (SEBI) द्वारा विनियमित निवेश माध्यम हैं जो निजी इक्विटी, हेज फंड, उद्यम पूंजी और रियल एस्टेट जैसी गैर-पारंपरिक संपत्तियों में निवेश करने के लिए उच्च-नेटवर्थ वाले व्यक्तियों या संस्थानों से पूंजी जुटाते हैं।
- क्षेत्रीय प्राथमिकता: डीप टेक्नोलॉजी, फ्रंटियर इनोवेशन और तकनीक-संचालित विनिर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया है, जहाँ लंबी विकास अवधि और उच्च जोखिम के कारण निजी निवेश सीमित होता है।
- जीवनचक्र सहायता: प्रारंभिक विकास और स्केलिंग-स्टेज (विस्तार चरण) वाले स्टार्टअप पर जोर दिया गया है, जो सीड (प्रारंभिक) पूँजी और वाणिज्यिक व्यवहार्यता के बीच के वित्तपोषण अंतराल को संबोधित करता है।
- भौगोलिक विविधीकरण: FoF 2.0 पूंजी का टियर-1 महानगरों से आगे विस्तार करने का प्रयास करता है, जिससे टियर-II/III शहरों और अल्प-सेवित क्षेत्रों में नवाचार सक्षम हो सकेगा।
- जोखिम-पूंजी जुटाना: इसे घरेलू संस्थागत पूंजी को आकर्षित करने और भारत के उद्यम पूंजी आधार, विशेष रूप से लघु और उभरते फंड के लिए डिजाइन किया गया है।
- शासन ढांचा: एक अधिकार प्राप्त समिति फंड का मार्गदर्शन करेगी, AIFs का चयन करेगी और नीतिगत प्राथमिकताओं एवं विवेकपूर्ण जोखिम प्रबंधन के साथ समन्वय सुनिश्चित करेगी।
फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स 1.0 (FFS 1.0) पर आधारित
- 2016 में लॉन्च किए गए FFS 1.0 की राशि भी ₹10,000 करोड़ थी; पूरी राशि 145 AIFs को आवंटित की जा चुकी है।
- इन AIFs ने कृषि, एआई (AI), रोबोटिक्स, ऑटोमोटिव, क्लीन-टेक, स्वास्थ्य सेवा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और बायोटेक सहित विभिन्न क्षेत्रों के 1,370 से अधिक स्टार्टअप्स में ₹25,500 करोड़ से अधिक का निवेश किया है।
- FFS 1.0 को पहली बार के संस्थापकों को प्रोत्साहित करने, निजी पूंजी को उत्प्रेरित करने और भारत के VC इको सिस्टम की संस्थागत नींव रखने का श्रेय दिया जाता है।
- जहाँ FFS 1.0 ने मुख्य रूप से शुरुआती फंडिंग अंतराल को पाटा और आत्मविश्वास बढ़ाया, वहीं FoF 2.0 को डीप-टेक, उन्नत विनिर्माण और स्केलिंग-अप पूंजी पर ध्यान केंद्रित करके “भारतीय नवाचार को अगले स्तर पर ले जाने” का कार्य सौंपा गया है।
योजना का महत्व
- नवाचार-आधारित आर्थिक विकास: यह विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रौद्योगिकियों, उत्पादों और प्लेटफॉर्मों के विकास का समर्थन करता है, जिससे उभरते उद्योगों में भारत की स्थिति सुदृढ़ होती है।
- विनिर्माण और आत्मनिर्भरता: पूंजी को उन्नत विनिर्माण और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों की ओर निर्देशित करता है, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों का पूरक है।
- रोजगार सृजन और उत्पादकता: उच्च-वृद्धि वाले स्टार्टअप डिजिटल और औद्योगिक अर्थव्यवस्था में कुशल रोजगार और मूल्य श्रृंखलाओं में योगदान देते हैं।
- घरेलू पूंजी निर्माण: उद्यम वित्तपोषण में संस्थागत और निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करता है, जिससे अस्थिर विदेशी पूंजी प्रवाह पर निर्भरता कम होती है।
- संतुलित क्षेत्रीय विकास: बड़े शहरों से परे वित्तपोषण का विस्तार करके, FoF 2.0 उद्यमिता का लोकतंत्रीकरण कर सकता है।
स्टार्टअप्स के बारे में
- स्टार्टअप इंडिया फ्रेमवर्क के तहत, स्टार्टअप एक युवा, नवाचार-संचालित इकाई है जो आयु (10 वर्ष से कम), टर्नओवर (अब ₹200 करोड़ तक विस्तारित) और नवाचार क्षमता से संबंधित मानदंडों को पूरा करती है।
- भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम 500 से कम स्टार्टअप से बढ़कर आज 2 लाख से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप तक पहुँच गया है।
- वर्ष 2025 में अब तक का सबसे अधिक वार्षिक स्टार्टअप पंजीकरण दर्ज किया गया।
- यूनिकॉर्न की संख्या 2014 में 4 से बढ़कर लगभग 125 हो गई है, जिनमें से लगभग आधे स्टार्टअप टियर-II और टियर-III शहरों से हैं।
- हाल ही में, DPIIT ने राज्यों की स्टार्टअप इकोसिस्टम रैंकिंग का 5वां संस्करण जारी किया है।
- गुजरात श्रेणी A में लगातार पांचवें वर्ष शीर्ष प्रदर्शनकर्ता रहा, जबकि अरुणाचल प्रदेश और गोवा श्रेणी B में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ता रहे।
- स्टार्टअप प्रमुख रोजगार प्रदाता के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने देश भर में अनुमानित 21 लाख नौकरियों का सृजन किया है।
- वर्तमान में, 36 में से 31 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की अपनी समर्पित स्टार्टअप नीति है।
