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सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास एवं प्रबंधन संबंधित विषय।
संदर्भ: हाल ही में जारी स्कूल शिक्षा विकास सूचकांक (SEDI) 2025-26 में चंडीगढ़ और केरल ने शीर्ष दो में स्थान प्राप्त किया है। चंडीगढ़ ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सर्वाधिक समग्र स्कोर दर्ज किया।
SEDI 2025-26 के प्रमुख निष्कर्ष
• समग्र प्रदर्शन में मामूली सुधार: राष्ट्रीय औसत SEDI 2024-25 के 0.566 से बढ़कर 2025-26 में 0.568 हो गया।
• शीर्ष प्रदर्शनकर्ता: चंडीगढ़ (0.826) और केरल (0.798) शीर्ष दो स्थान पर बने रहे, जिसके बाद पुडुचेरी (0.737), गोवा (0.713) और दिल्ली (0.709) का स्थान रहा।
• सबसे निचले प्रदर्शनकर्ता: बिहार (0.382), अरुणाचल प्रदेश (0.358) और मेघालय (0.307) निचले तीन स्थानों पर बने रहे, जो लगातार बनी हुई संरचनात्मक असमानताओं को दर्शाता है।
• भागीदारी सबसे कमजोर क्षेत्र: भागीदारी का राष्ट्रीय औसत 0.487 रहा, जो 0.484 से महत्वपूर्ण सुधार है। यह SC/ST और लैंगिक समानता, नामांकन तथा संक्रमण दर से जुड़ी लगातार बनी रहने वाली चुनौतियों को दर्शाता है।
• बुनियादी ढाँचा सबसे आगे: बुनियादी ढाँचे का राष्ट्रीय औसत 0.748 रहा, जिसमें 0.741 की तुलना में बढ़ोतरी हुई है। राज्यों के बीच इसका सबसे व्यापक अंतर भी देखा गया अर्थात चंडीगढ़ में 0.982 से लेकर मेघालय में 0.159 तक।
• बाद की स्कूली अवस्थाएँ: माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तरों पर राज्यों के बीच पर्याप्त असमानताएँ दिखाई देती हैं। कई राज्यों में इन स्तरों के स्कोर प्राथमिक स्तरों की तुलना में काफी कम हैं।
• प्रमुख सुधारकर्ता: मिजोरम ने SEDI में सर्वाधिक सुधार दर्ज किया (+0.052; रैंक 28→22), इसके बाद पश्चिम बंगाल (+0.032; 21→17), मेघालय (+0.039) और तेलंगाना (+0.026; 17→14) रहे।
• सबसे बड़ी गिरावट: उत्तराखंड की रैंक 15वें से घटकर 19वें हो गई है और SEDI में 0.019 की गिरावट दर्ज हुई।
स्कूल शिक्षा विकास सूचकांक (SEDI) को समझना
• विकासकर्ता और पृष्ठभूमि: SEDI 2025-26 को प्रो. अरुण सी. मेहता, NIEPA के पूर्व EMIS विभागाध्यक्ष द्वारा तैयार किया गया है। यह 2005-06 से 2014-15 के दौरान NUEPA/NIEPA में विकसित शैक्षिक विकास सूचकांक (EDI) पर आधारित है।
• उद्देश्य: SEDI नामांकन के आँकड़ों से आगे बढ़कर यह आकलन करता है कि विद्यालय सुलभ और कार्यशील हैं या नहीं, बच्चे शिक्षा में भाग लेते हैं और बने रहते हैं या नहीं तथा वे प्रभावी रूप से सीखते हैं या नहीं।
• मूल्यांकन ढाँचा: सूचकांक में 36 राज्य/केंद्रशासित प्रदेश, स्कूली शिक्षा के चार स्तर—प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक—तथा पाँच क्षेत्रों में 73 संकेतक शामिल हैं: पहुँच, भागीदारी, प्रतिधारण, गुणवत्ता और बुनियादी ढाँचा।

• समग्र स्कोर: चारों स्कूली स्तरों को क्रमशः 30%, 25%, 25% और 20% भार दिया गया है—प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक। वहीं, क्षेत्र-स्तरीय सूचकांकों को निर्धारित भार के आधार पर संयोजित किया जाता है।
• डेटा स्रोत: मुख्य आँकड़े UDISE+ 2025-26 से लिए गए हैं, जबकि गुणवत्ता क्षेत्र के अंतर्गत अधिगम परिणामों से संबंधित संकेतकों के लिए NAS 2021 (NCERT) का उपयोग किया गया है।
• NEP 2020 के अनुरूप: संशोधित ढाँचा NEP 2020 की पाठ्यचर्या-स्तरीय संरचना के अनुरूप है। इसमें पूर्व EDI ढाँचे के दो स्तरों को बढ़ाकर चार स्कूली स्तर किया गया है तथा प्रतिधारण को एक समर्पित क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया है।
SEDI भारत की स्कूली शिक्षा की चुनौती के बारे में क्या उजागर करता है?
• पहुँच से भागीदारी की ओर: अपेक्षाकृत कम भागीदारी स्कोर दर्शाता है कि केवल विद्यालयों की उपलब्धता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है; नामांकन, समानता और कक्षा-स्तरीय संक्रमण अभी भी महत्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं।
• बुनियादी ढाँचे और परिणामों के बीच अंतर: बुनियादी ढाँचे का राष्ट्रीय स्कोर सबसे अधिक है, लेकिन भागीदारी और गुणवत्ता के अपेक्षाकृत कमजोर स्कोर बताते हैं कि बेहतर भौतिक एवं ICT बुनियादी ढाँचे के साथ-साथ बेहतर भागीदारी और अधिगम परिणामों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
• माध्यमिक शिक्षा एक बाधा: माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तरों पर अपेक्षाकृत कमजोर और असमान प्रदर्शन यह दर्शाता है कि स्कूली शिक्षा के बाद के चरणों में विद्यार्थियों को बनाए रखने और उनकी प्रगति सुनिश्चित करने में कठिनाइयाँ हैं।
• लगातार क्षेत्रीय असमानताएँ: राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के बीच, विशेषकर बुनियादी ढाँचे और भागीदारी में व्यापक अंतर, शैक्षिक पहुँच, समानता, प्रतिधारण और गुणवत्ता में महत्वपूर्ण असमानताओं को उजागर करता है।
आगे की राह
• भागीदारी और प्रतिधारण को मजबूत करना: विशेष रूप से माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तरों पर नामांकन, कक्षा-स्तरीय संक्रमण और ड्रॉपआउट की रोकथाम पर ध्यान केंद्रित करना।
• इनपुट से परिणामों की ओर बदलाव: बुनियादी ढाँचे के विस्तार के साथ अधिगम परिणामों, कक्षा-कक्ष प्रक्रियाओं और उपलब्ध सुविधाओं के प्रभावी उपयोग पर अधिक जोर देना।
• राज्य-विशिष्ट रणनीतियाँ अपनाना: SEDI के क्षेत्र-वार और स्तर-वार परिणामों का उपयोग राज्य/केंद्रशासित प्रदेश-विशिष्ट बाधाओं की पहचान करने और एकसमान समाधानों के बजाय लक्षित हस्तक्षेप तैयार करने के लिए करना।
• अभिसरण सुनिश्चित करना: समग्र शिक्षा और अन्य स्कूली शिक्षा पहलों के अंतर्गत हस्तक्षेपों में समन्वय स्थापित करना, ताकि पहुँच, भागीदारी, प्रतिधारण, गुणवत्ता और बुनियादी ढाँचे से जुड़ी परस्पर संबंधित चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
