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सामान्य अध्ययन-2: केंद्र एवं राज्यों के कार्य और उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित मुद्दे एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर तक शक्तियों एवं वित्त का हस्तांतरण तथा इससे संबंधित चुनौतियाँ।
संदर्भ: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सीमांत नागालैंड प्रादेशिक प्राधिकरण (FNTA) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है, जिससे नागालैंड के छह पूर्वी जिलों में विकेंद्रीकृत स्वशासी प्राधिकरण के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
अन्य संबंधित जानकारी

- नागालैंड विधानसभा ने मार्च में प्रस्तुत किए गए विधेयक के पहले संस्करण को वापस लिए जाने के बाद, 3 सितंबर 2026 को सर्वसम्मति से इस विधेयक को पारित किया।
- यह अधिनियम 5 फरवरी 2026 को भारत सरकार, नागालैंड सरकार और पूर्वी नागालैंड पीपुल्ससंगठन (ENPO) के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoA) के बाद लाया गया है।
- यह राज्य सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित तिथि से लागू होगा।
अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ
- क्षेत्रीय कवरेज: FNTA के अंतर्गत छह जिले आते हैं—तुएनसांग, मोन, लोंगलेंग, किफिरे, नोकलाक और शामाटोर।
- संरचना: इस प्राधिकरण में 62 सदस्य होंगे:
- 40 प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित सदस्य, जिनमें एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
- क्षेत्र के 20 विधायक पदेन सदस्य होंगे, लेकिन उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा।
- राज्यपाल द्वारा मान्यता प्राप्त ऐसे जनजातीय समुदायों से दो सदस्य नामित किए जाएँगे, जिनका प्रतिनिधित्व नहीं है या पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। इन सदस्यों को मतदान का अधिकार होगा।

- कार्यकाल और चुनाव: निर्वाचित एवं नामित सदस्यों का सामान्यतः पाँच वर्ष का कार्यकाल होगा, जबकि चुनावों की निगरानी राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा की जाएगी।
- कार्यकारी परिषद: अधिकतम नौ सदस्यों वाली कार्यकारी परिषद कार्यकारी शक्तियों का प्रयोग करेगी, जिसका नेतृत्व मुख्य कार्यकारी सदस्य (CEM) करेगा।
- शक्तियाँ एवं कार्य: FNTA को हस्तांतरित 46 विषयों पर विधायी, कार्यकारी, प्रशासनिक एवं वित्तीय शक्तियाँ प्राप्त होंगी। इनमें कृषि, स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा, ग्रामीण विकास, पर्यटन, सामाजिक कल्याण, ग्राम परिषदें, शहरी स्थानीय निकाय और निर्दिष्ट लोक निर्माण कार्य शामिल हैं।
- विधायी शक्तियाँ: प्राधिकरण को हस्तांतरित विषयों पर कानून बनाने की पहल करने का अधिकार होगा।
- ऐसे कानूनों के लिए मतदान का अधिकार रखने वाले सदस्यों के बहुमत की मंजूरी आवश्यक होगी। इसके बाद राज्यपाल की स्वीकृति और राजपत्र में प्रकाशन अनिवार्य होगा।
- अंतरिम परिषद: चुनाव होने तक, राज्य सरकार जनजातीय परिषदों के परामर्श से ENPO द्वारा अनुशंसित अधिकतम 13 सदस्यों वाली अंतरिम परिषद का गठन कर सकती है।
- यह परिषद अधिकतम एक वर्ष तक या पहली निर्वाचित FNTA के गठन तक कार्य कर सकती है।
- वित्तीय प्रावधान: प्राधिकरण को राज्य के बजट में एक अलग प्रमुख उपशीर्षक के अंतर्गत वार्षिक आवंटन प्राप्त होगा। विकास निधियों का लेखा-परीक्षण भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा किया जाएगा।
- संवैधानिक सुरक्षा उपाय: इस व्यवस्था में अनुच्छेद 371A, बंगाल ईस्टर्न सीमांत रेगुलेशन, 1873 तथा पंचायती राज संबंधी प्रावधानों से मौजूदा छूट को बिना किसी संशोधन या परिवर्तन के यथावत बनाए रखा गया है।
- समीक्षा: FNTA व्यवस्था की 10 वर्ष बाद समीक्षा किए जाने की परिकल्पना की गई है।
आवश्यकता एवं महत्त्व
- क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करना: पूर्वी नागालैंड में बुनियादी ढाँचे, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और संपर्क सुविधाओं से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही कमियों को दूर करने के लिए लक्षित हस्तक्षेप को सक्षम बनाता है।
- विकेंद्रीकृत स्वशासन: 46 विषयों पर निर्णय लेने की शक्तियाँ स्थानीय समुदायों के अधिक निकट लाता है, जिससे नीतियाँ क्षेत्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाई जा सकेंगी।
- समावेशी संघवाद: अलग राज्य बनाए बिना नागालैंड के भीतर पर्याप्त क्षेत्रीय स्वायत्तता प्रदान करता है तथा संवैधानिक लचीलेपन को प्रदर्शित करता है।
- राजनीतिक प्रतिनिधित्व: प्रत्यक्ष चुनाव, महिलाओं के लिए आरक्षण और अपर्याप्त प्रतिनिधित्व वाली जनजातियों को प्रतिनिधित्व प्रदान करने से लोकतांत्रिक भागीदारी एवं समावेशन सुदृढ़ होंगे।
- शांति एवं स्थिरता: बातचीत और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से लंबे समय से चली आ रही क्षेत्रीय शिकायतों का समाधान करता है, साथ ही अनुच्छेद 371A और नागालैंड की क्षेत्रीय एकता को बनाए रखता है।
