संबंधित पाठ्यक्रम: 

सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय। 

सामान्य अध्ययन-3: प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नवीन प्रौ‌द्योगिकी का विकास; संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण; पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

संदर्भ: भारत सरकार ने सब्सिडी वितरण को सुव्यवस्थित करने और आवंटित धन का कुशल उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ‘पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एनहांसमेंट’ (PM E-DRIVE) योजना के प्रावधानों में संशोधन किया है।

अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

• भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा अधिसूचित ये संशोधन, कुछ श्रेणियों में प्राप्त लक्ष्यों पर प्रतिक्रिया देते हैं और सीमित बजट वाले ढांचे में धन की कमी (fund overruns) को रोकते हैं।

• इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के बढ़ते प्रसार के साथ, सरकार ने दुरुपयोग रोकने और लाभों को प्रभावी रूप से लक्षित करने के लिए स्पष्ट समयसीमा, मूल्य सीमा (price caps) और इकाई सीमा (unit ceilings) निर्धारित की है।

• यह संशोधन इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में वृद्धि और मांग के साथ वित्तीय सहायता को संतुलित करने की आवश्यकता के बीच आया है।

प्रमुख परिवर्तन

• संशोधित समय-सीमा: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (e-2W) प्रोत्साहन के लिए तभी पात्र होंगे यदि वे 31 जुलाई, 2026 तक पंजीकृत हों।

  • इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (e-3W, जिसमें रिक्शा और कार्ट शामिल हैं) के लिए कट-ऑफ तिथि 31 मार्च, 2028 तक बढ़ा दी गई है।

• प्रोत्साहन के लिए मूल्य सीमा: किफायती मॉडलों पर सब्सिडी केंद्रित करने के लिए पूर्व-फैक्टरी मूल्य सीमा e-2W के लिए ₹1.5 लाख और e-3W के लिए ₹2.5 लाख निर्धारित की गई है।

• इकाई सीमा (Unit Limits): कुल सहायता को 24,79,120 e-2W और 39,034 e-3W (रिक्शा/कार्ट) तक सीमित किया गया है।

  • L5 e-3W उप-श्रेणी को लक्ष्य पूरा होने के बाद 26 दिसंबर, 2025 को समय से पूर्व बंद कर दिया गया। 

• धन समाप्ति प्रावधान (Fund Exhaustion Clause): यदि योजना का कुल परिव्यय (outlay), जो ₹10,900 करोड़ निर्धारित है, 31 मार्च, 2028 से पूर्व समाप्त हो जाता है, तो योजना या उसके घटक रुक जाएंगे; बंद होने के बाद कोई और दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।

• अंतिम तिथि की परिभाषा: “टर्मिनल तिथि” का अर्थ वाहन पंजीकरण के लिए अंतिम कट-ऑफ है ताकि प्रोत्साहन प्राप्त किया जा सके। इस समयसीमा के चूकने पर पात्रता समाप्त हो जाती है, चाहे योजना जारी रहे या नहीं।  

PM E-Drive योजना

• भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) द्वारा 2024 में शुरू की गई और अब 2028 तक विस्तारित, PM E-DRIVE पहल सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के समर्थन के माध्यम से सामूहिक गतिशीलता (mass mobility) को बढ़ावा देती है।

  • यह ‘इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन स्कीम’ (EMPS), 2024 जैसी पिछली संक्रमणकालीन योजनाओं को स्वयं में समाहित करती है।

• इसका मुख्य उद्देश्य EV खरीद के लिए अग्रिम प्रोत्साहन प्रदान करके और चार्जिंग बुनियादी ढांचे के विकास को प्रोत्साहित करके इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर संक्रमण को तेज करना है।

• प्रमुख घटक:

  • e-2W, e-3W, ई-एंबुलेंस, ई-ट्रक और अन्य उभरती EV श्रेणियों के लिए मांग प्रोत्साहन (Demand Incentives)।
  • ई-बसों और चार्जिंग स्टेशनों के नेटवर्क की स्थापना के लिए पूंजीगत अनुदान (Capital grants)।

• पात्र वाहन श्रेणियाँ:

  • इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (e-2Ws): वाणिज्यिक और निजी दोनों उपयोगों को कवर करते हुए 24.79 लाख उन्नत-बैटरी वाले e-2Ws के लिए प्रोत्साहन।
  • इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (e-3Ws): लगभग 39,000 उन्नत-बैटरी वाले e-3Ws (ई-रिक्शा और ई-कार्ट) के लिए प्रोत्साहन, जो केवल वाणिज्यिक उपयोग तक सीमित है।
  • ई-एंबुलेंस: ई-एंबुलेंस के लिए ₹500 करोड़ आवंटित, जिसके मानक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) और MoRTH आदि द्वारा संयुक्त रूप से निर्धारित किए जाएंगे।
  • ई-ट्रक: इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए ₹500 करोड़ आवंटित, जो केवल MoRTH-अनुमोदित स्क्रैपिंग प्रमाणपत्रों के साथ पात्र होंगे।
  • ई-बसें: नौ प्रमुख शहरों में सार्वजनिक परिवहन के लिए 14,028 ई-बसों की खरीद हेतु ₹4,391 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिसमें पुरानी बसों को स्क्रैप करने वालों को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: योजना का उद्देश्य उपयोगकर्ता के विश्वास को बढ़ाने के लिए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों का एक मजबूत नेटवर्क स्थापित करना है।

ई-वाहनों के प्रोत्साहन के लिए अन्य सरकारी पहल

• राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन योजना (NEMMP) 2020: 2013 में शुरू की गई, जिसका लक्ष्य मांग प्रोत्साहन और अनुसंधान एवं विकास (R&D) के माध्यम से 2020 तक सालाना 60-70 लाख हाइब्रिड/EV बिक्री करना था।

• फेम इंडिया (FAME India) योजना: हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों का तेजी से अपनाना और विनिर्माण (FAME), NEMMP के तहत भारत का प्रमुख EV कार्यक्रम रहा।

  • चरण I (2015-19, ₹895 करोड़): 2.8 लाख EVs और 520 चार्जिंग स्टेशनों का समर्थन किया।
  • चरण II (2019-24, ₹10,000 करोड़): e-2W/3W/4W और ई-बसों के लिए सब्सिडी का विस्तार किया।

• ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए PLI योजना (PLI-Auto): 2021 में शुरू की गई, यह योजना EVs सहित उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकियों के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करती है।

• इलेक्ट्रिक पैसेंजर कारों के विनिर्माण के प्रोत्साहन के लिए योजना (SPMEPCI) 2024: यह नीति स्वीकृत फर्मों को 15% कम सीमा शुल्क पर इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर आयात करने की अनुमति देकर वैश्विक वाहन निर्माताओं को आकर्षित करती है, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलता है।

• पीएम ई-बस सेवा – भुगतान सुरक्षा तंत्र (PSM) योजना: 2024 में अधिसूचित, यह सार्वजनिक परिवहन प्राधिकरणों द्वारा भुगतान में चूक (डिफ़ॉल्ट) के विरुद्ध ऑपरेटरों को भुगतान गारंटी प्रदान कर 38,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती का समर्थन करती है, जिससे देशभर में व्यापक ईवी गतिशीलता को बढ़ावा मिलता है। 

SOURCES
The Hindu
Times of India
Vikaspedia

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