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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास और अनुप्रयोग, रोजमर्रा के जीवन पर उनके प्रभाव।
संदर्भ: चीनी नाभिकीय भौतिकविदों ने चीन के एक प्रायोगिक संलयन रिएक्टर में दीर्घकालिक सैद्धांतिक घनत्व सीमा को पार कर लिया है, जो यह संकेत देता है कि भविष्य के ऊर्जा संयंत्र पहले की तुलना में अब अधिक ऊर्जा उत्पादन कर सकते हैं।
अन्य संबंधित जानकारी:
- EAST टीम में जिसमें हुआझोंग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज और फ्रांस की ऐक्स-मार्सिले यूनिवर्सिटी के 18 से अधिक शोधकर्ता शामिल थे। उन्होंने “प्लाज्मा-वॉल सेल्फ-आर्गेनाइजेशन” (plasma-wall self organisation) प्राप्त करने के लिए ‘इलेक्ट्रॉन साइक्लोट्रॉन रेजोनेंस हीटिंग’ और ‘ओह्मिक स्टार्टअप’ का उपयोग किया। इससे वे प्लाज्मा अस्थिरता उत्पन्न किए बिना ही “घनत्व-मुक्त अवस्था” तक पहुँचे।
- EAST प्रयोग फ्रांस के भौतिकविदों द्वारा 2017 के एक सैद्धांतिक अध्ययन की पुष्टि करता है। 2017 के अध्ययन ने पहली बार ग्रीनवाल्ड सीमा को चुनौती दी थी।
प्रयोग की मुख्य विशेषताएँ:
- एक महत्वपूर्ण बाधा को पार किया: चीन के एक नाभिकीय संलयन रिएक्टर में वैज्ञानिकों ने प्लाज्मा घनत्व को एक विशेष सीमा से 65% आगे धकेल दिया, और ऐसी स्थिर अवस्था में प्रवेश किया जिसने ‘बर्निंग प्लाज्मा’ प्राप्त करने की दीर्घकालिक बाधा को पार किया। स्थिर अवस्था एक ऐसी अवस्था है जहाँ संलयन अभिक्रिया स्वतः संधारणीय हो जाती है।
- ग्रीनवाल्ड घनत्व सीमा को पार किया: EAST टीम ने सीमा के 1.3 गुना से 1.65 गुना घनत्व पर स्थिर प्लाज्मा प्राप्त किया। टीम ने दो तकनीकों के संयोजन से इसे प्राप्त किया:
- पहला, उन्होंने स्टार्टअप के दौरान इलेक्ट्रॉन साइक्लोट्रॉन रेजोनेंस हीटिंग (ECRH) का उपयोग किया। ECRH में, प्लाज्मा में माइक्रोवेव पुंज छोड़े गए जिन्होंने इलेक्ट्रॉनों को कई लाख डिग्री तक गर्म किया। यह प्लाज्मा धारा को बढ़ाने से पहले होता है,जो इसे गर्म करने और मैग्नेटिक केज (magnetic cage) बनाने में मदद करती है। प्लाज्मा धारा, प्लाज्मा के माध्यम से प्रवाहित होने वाली बड़ी विद्युत धारा है।
- दूसरा, टीम ने कक्ष में अधिक ड्यूटेरियम गैस के साथ शुरुआत की, फिर प्लाज्मा गर्म होने पर हाइड्रोजन ईंधन की आपूर्ति की।
- ग्रीनवाल्ड घनत्व सीमा, अधिकतम प्लाज्मा घनत्व की एक अनुभवजन्य ऊपरी सीमा है जिसे टोकामक फ्यूजन रिएक्टर में अस्थिर और बाधित होने से पहले स्थिरतापूर्वक परिरुद्ध (stably confined) किया जा सकता है।
- दूसरा, टीम ने कक्ष में अधिक ड्यूटेरियम गैस के साथ शुरुआत की, फिर प्लाज्मा गर्म होने पर हाइड्रोजन ईंधन की आपूर्ति की।
- लिथियम कोटिंग: प्रयोगों के लिए, EAST की टंगस्टन सतहों को अनुकूलित करने और अशुद्धियों को कम करने के लिए उनमें लिथियम की एक पतली परत का लेप लगाया गया था।
प्रयोग का महत्व
- टोकामक व्यवहार्यता का रोडमैप: निष्कर्ष टोकामक और अगली पीढ़ी के बर्निंग प्लाज्मा संलयन उपकरणों में घनत्व सीमा के विस्तार के लिए एक व्यावहारिक और विस्तारित मार्ग अपनाने का सुझाव देते हैं।
- मानक धारणाओं को चुनौती: नए प्रयोग इस धारणा को चुनौती देते हैं कि घनत्व, ग्रीनवाल्ड सीमा से बाधित होता है, और संलयन शोधकर्ताओं को अब तापमान और परिरोध समय पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
- ITER के लिए प्रासंगिकता: प्रयोग दर्शाता है कि यदि एक रिएक्टर को दोगुने ईंधन घनत्व पर चलाया जा सकता है, तो यह कम तापमान या कम परिरोध समय के साथ प्रज्वलन की स्थिति प्राप्त कर सकता है। यह प्रगति ITER के वैश्विक प्रयासों की पूरक है जिसमें भारत ने भी निवेश किया है।
- ITER (इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर) विश्व की सबसे बड़ी अंतर्राष्ट्रीय नाभिकीय संलयन अनुसंधान परियोजना है, जिसका उद्देश्य यह प्रदर्शित करना है कि संलयन ऊर्जा का उत्पादन सुरक्षित, संधारणीय तरीके से और बड़े पैमाने पर किया जा सकता है।
विश्व के अन्य प्रमुख नाभिकीय संलयन टोकामक:
- जापान का JT-60SA: यह विश्व का सबसे बड़ा संचालित ‘सुपरकंडक्टिंग टोकामक’ है
- अमेरिका की DIII-D नेशनल फ्यूजन फैसिलिटी: जनरल एटॉमिक्स द्वारा अमेरिकी ऊर्जा विभाग के लिए संचालित, जो उच्च-प्रदर्शन टोकामैक डिस्चार्ज और मौलिक संलयन विज्ञान का अन्वेषण करती है।
- दक्षिण कोरिया का KSTAR (कोरिया सुपरकंडक्टिंग टोकामक एडवांस्ड रिसर्च): इसने 10 करोड़ डिग्री सेल्सियस से अधिक प्लाज्मा स्थिरता प्राप्त की है, हालांकि अल्प समय के लिए।
- भारत का ADITYA टोकामक: प्लाज्मा अनुसंधान संस्थान (IPR), गांधीनगर में स्थित है। इसने SST-1 सुपरकंडक्टिंग टोकामक की आधारशिला रखी।
- SST-1 (स्टेडी स्टेट सुपरकंडक्टिंग टोकामक-1): यह भारत का सबसे बड़ा स्वदेशी रूप से विकसित सुपरकंडक्टिंग टोकामक है, जिसे लंबी अवधि (स्थिर अवस्था) के प्लाज्मा संचालन के अध्ययन के लिए डिजाइन किया गया है।
