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सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करार; महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान,एजेंसियाँ और मंच-उनकी संरचना, अधिदेश।
संदर्भ: हाल ही में, उच्च (खुले) सागरों में जैव विविधता की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता संधि (High Seas Treaty) प्रभावी हुई।
अन्य संबंधित जानकारी
• संयुक्त राष्ट्र की इस संधि को ‘राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे जैव विविधता’ (BBNJ) के रूप में भी जाना जाता है। इसे 15 वर्षों की चर्चा के बाद मार्च 2023 में अंतिम रूप दिया गया था। इसमें अंतर्राष्ट्रीय जल क्षेत्र में समुद्री संरक्षित क्षेत्रों के सृजन का प्रावधान है।
• उच्च सागर संधि 17 जनवरी 2026 को लागू हुई। यह अनुच्छेद 68(1) के अनुसार प्रभावी हुई, जो इस प्रकार है: “यह समझौता अनुसमर्थन, अनुमोदन, स्वीकृति या विलय के 60वें दस्तावेज़ को जमा करने की तिथि के 120 दिन बाद लागू होगा।”
• कानूनी रूप से बाध्यकारी यूएन संधि उन महासागरीय क्षेत्रों को कवर करती है जो राष्ट्रीय जल सीमा (अर्थात “उच्च सागर”) और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री नितल क्षेत्र से परे स्थित हैं।
• ये क्षेत्र महासागर की सतह के दो-तिहाई से अधिक हिस्से को कवर करते हैं, जो आयतन के अनुसार पृथ्वी के पर्यावास के 90 प्रतिशत से अधिक का प्रतिनिधित्व करते हैं।
• संधि का लक्ष्य पहले से असुरक्षित और अनियमित महासागरीय क्षेत्रों में जैव विविधता का संरक्षण और विनियमन करना है।
• यह समझौता निम्नलिखित को संभव बनाएगा:
- उच्च सागरों में समुद्री संरक्षित क्षेत्रों (MPAs) की स्थापना करना।
- समुद्री आनुवंशिक संसाधनों के दोहन को विनियमित करना।
- वर्तमान और भविष्य की मानवीय गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करना।
- क्षमता निर्माण और समुद्री प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रमों के माध्यम से विकासशील देशों का समर्थन करना।
• संधि के अनुसार:
- देशों के लिए महासागरीय पारिस्थितिकी को प्रभावित करने वाली गतिविधियों का पर्यावरणीय मूल्यांकन करना अनिवार्य है।
- इस संधि के तहत ‘ब्लू इकोनॉमी’ से होने वाले लाभों को साझा करने के लिए तंत्र की स्थापना करनी होगी, जिसमें जैव प्रौद्योगिकी जैसे उद्योगों में उपयोग किए जाने वाले समुद्री आनुवंशिक संसाधन शामिल हैं।

• इस समझौते को अब तक यूरोपीय संघ (EU) और उसके 16 सदस्य देशों सहित 83 पक्षकारों का अनुसमर्थन मिल चुका है, और 145 देशों ने इस पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
• राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे क्षेत्रों में समुद्री संसाधन और जैव विविधता मौजूद है, जो मानव को अमूल्य पारिस्थितिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और खाद्य सुरक्षा लाभ प्रदान करते हैं।
• नई संधि विशेष रूप से समुद्री संसाधनों (जैसे: भोजन, दवा, ऊर्जा) की भविष्य में बढ़ती मांग को देखते हुए इन चुनौतियों का समाधान करती है।
उच्च सागर संधि के बारे में
• उच्च सागर संधि (High Seas Treaty) या राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे जैव विविधता (BBNJ) समझौता, समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS) के अंतर्गत तीसरा कार्यान्वयन समझौता है।
• इसे जून 2023 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाया गया था और सितंबर 2023 में हस्ताक्षर के लिए खोला गया था।
• उद्देश्य:
- समुद्री संरक्षित क्षेत्रों (MPAs) का सीमांकन करके उच्च सागरों में समुद्री जैव विविधता की रक्षा करना।
- समुद्री आनुवंशिक संसाधनों (MGRs) का सतत उपयोग और उनसे होने वाले लाभों का न्यायसंगत बँटवारा।
- उच्च सागरों में प्रमुख गतिविधियों के लिए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) को अनिवार्य बनाना।
• यह संधि केवल उन महासागरों से संबंधित है जो किसी भी देश के राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से बाहर हैं, अर्थात अनन्य आर्थिक क्षेत्रों (EEZs) से परे।
• भारत ने सितंबर 2024 में संधि पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन अभी तक इसका अनुसमर्थन (पुष्टि) नहीं किया है।
