क्वांटम टीचिंग लैब्स
संदर्भ: हाल ही में, सरकार ने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत क्वांटम शिक्षण सुविधाओं/प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए भारत भर के 23 शैक्षणिक संस्थानों को स्वीकृति प्रदान की है और क्वांटम प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान तथा प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए 100 अन्य संस्थानों पर विचार कर रही है।
अन्य संबंधित जानकारी

- प्रत्येक चयनित संस्थान को क्वांटम तकनीक में पाठ्यक्रम डिजाइन करने (जो बी.टेक स्तर पर पढ़ाया जा सके) और संकाय विकास आदि के लिए ₹1 करोड़ की धनराशि संवितरित की जाएगी।
- यह पहल विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के सहयोग से शुरू की गई है।
- यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि ये अनुसंधान प्रयोगशालाएँ नहीं होंगी, बल्कि शिक्षण प्रयोगशालाएँ (टीचिंग लैब्स) होंगी, जो विशेष रूप से स्नातक छात्रों के लिए होंगी।
क्वांटम टीचिंग लैब्स के बारे में

- ये शैक्षणिक संस्थानों में विशिष्ट सुविधाएं हैं जो छात्रों और शोधकर्ताओं को क्वांटम प्रौद्योगिकियों में प्रशिक्षित करने के लिए तैयार की गई हैं।
- उद्देश्य: बी.टेक (B.Tech) स्तर पर कम पाठ्यक्रम के साथ संकाय के कौशल में वृद्धि कर और व्यावहारिक प्रयोगों की सुविधा देकर एक “क्वांटम-तैयार” कार्यबल तैयार करना।
- ये प्रयोगशालाएँ क्वांटम कंप्यूटिंग उपकरणों, सिमुलेशन टूल और क्वांटम यांत्रिकी, क्वांटम संचार एवं क्वांटम सेंसिंग को कवर करने वाले पाठ्यक्रमों तक पहुँच प्रदान करती हैं।
हिंदूकुश हिमालयी क्षेत्र में हिमनदों की बदलती गतिशीलता
संदर्भ: हाल ही में, अंतर्राष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (ICIMOD) ने ‘1990 से 2020 तक हिंदू कुश हिमालयी क्षेत्र में हिमनदों की बदलती गतिशीलता’ (Changing Dynamics of Glaciers in the Hindu Kush Himalayan Region from 1990 to 2020) शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है, जो हिंदू कुश हिमालयी क्षेत्र में बदलते घटनाक्रमों पर प्रकाश डालती है।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

- विश्लेषण के अनुसार, हिंदू कुश हिमालय (HKH) ने 1990 से 2020 तक अपने कुल क्षेत्रफल का 12% और अपने कुल बर्फ भंडार (बर्फ की सघनता के संदर्भ में) का 9% खो दिया है।
- नुकसान की दर 2010 के बाद स्पष्ट रूप से तेज हुई है, विशेष रूप से पूर्वी और मध्य HKH में, जहाँ छोटे हिमनद सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
- गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी घाटियों में पिछले तीन दशकों में महत्वपूर्ण हिमनद क्षति देखी गई है—जो क्रमशः लगभग 21% और 16% है।
- HKH क्षेत्र के पूर्व की नदियों में स्थिति और भी गंभीर है, जहाँ इसी अवधि के दौरान ‘येलो’ नदी घाटी में लगभग 22%, ‘यांग्त्ज़ी’ में 23%, और ‘साल्वीन’ नदी घाटी में हिमनद क्षेत्र में लगभग 33% की गिरावट आई है।
- रिपोर्ट चेतावनी देती है कि:
- ये परिवर्तन प्रत्यक्ष रूप से जल की उपलब्धता में बढ़ती अनिश्चितता और ‘ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ (GLOFs), हिमस्खलन, भूस्खलन और मलबे के प्रवाह जैसे खतरों के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ाते हैं।
- ये निचले क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों और बुनियादी ढांचे के लिए भी बढ़ते जोखिम पैदा करते हैं, जो हिमनदों के स्वास्थ्य और इस क्षेत्र की खाद्य, जल, ऊर्जा और आजीविका सुरक्षा के बीच गहन संबंध को रेखांकित करते हैं।

डॉ.राम मनोहर लोहिया
संदर्भ: हाल ही में, प्रधानमंत्री ने 23 मार्च 2026 को प्रसिद्ध समाजवादी नेता और विचारक डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
डॉ. राम मनोहर लोहिया के बारे में
- उनका जन्म 23 मार्च, 1910 को अकबरपुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। वे एक भारतीय राजनीतिज्ञ और कार्यकर्ता थे, जो समाजवादी राजनीति और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख स्तंभ रहे।
- उन्होंने अपने करियर का अधिकांश समय समाजवाद के एक विशिष्ट भारतीय संस्करण को विकसित करके अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने में समर्पित किया।
- उनका निधन 12 अक्टूबर, 1967 को नई दिल्ली में हुआ।
जीवन यात्रा
- उनका जन्म एक मारवाड़ी बनिया (व्यापारी) परिवार में हुआ था। दो वर्ष की अल्पायु में ही उनकी माता का देहांत हो गया जिसके बाद उनका पालन-पोषण उनके पिता और दादा-दादी ने किया।
- बचपन में वे अपने पिता की भारतीय राष्ट्रवाद के प्रति प्रतिबद्धता से अत्यधिक प्रभावित हुए, जिसने उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
- उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से शिक्षा प्राप्त की और बाद में 1929 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
- उन्होंने 1932 में बर्लिन विश्वविद्यालय (जर्मनी) से डॉक्टरेट (Ph.D.) की डिग्री पूर्ण की, जहाँ उन्होंने अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान का अध्ययन किया।
- उच्च शिक्षा के दौरान, उन्होंने मार्क्स, एंगेल्स और यूरोपीय समाजवादी विचारकों का अध्ययन किया। उन्हें साम्राज्यवाद-विरोधी और समाजवादी आंदोलनों का अनुभव प्राप्त हुआ, जिसने उनके विश्वदृष्टिकोण को आकार दिया।
- उन्होंने ‘व्हील ऑफ हिस्ट्री’, ‘मार्क्स, गांधी एंड सोशलिज्म’, और ‘गिल्टी मेन ऑफ इंडियाज पार्टीशन’ जैसी महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं।
राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान
- 1934 में, लोहिया भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर एक वामपंथी समूह, कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी (CSP) में सक्रिय रूप से शामिल हो गए। उन्होंने CSP की कार्यकारिणी समिति में सेवा की और इसके साप्ताहिक जनरल का संपादन किया।
- उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में ग्रेट ब्रिटेन के साथ भारत की भागीदारी का कड़ा विरोध किया। इसके परिणामस्वरूप, 1939 में ब्रिटिश-विरोधी टिप्पणियों के लिए और फिर 1940 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया; दूसरी बार उन्हें 18 महीने के कारावास की सजा हुई।
- 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान, उन्होंने जयप्रकाश नारायण सहित अन्य CSP नेताओं के साथ मिलकर भूमिगत प्रतिरोध संगठित किया। इन गतिविधियों के कारण, उन्हें 1944 से 1946 तक पुनः कारावास में रखा गया।
स्वतंत्रता के बाद भूमिका
- 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के दौरान और उसके बाद भी, लोहिया ने भारतीय राजनीति में एक सक्रिय भूमिका निभाना जारी रखा।
- कई मुद्दों पर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ वैचारिक मतभेदों के कारण, उन्होंने CSP के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर 1948 में कांग्रेस छोड़ दी।
- वे 1952 में गठित प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य बने और अल्प अवधि के लिए इसके महासचिव के रूप में कार्य किया, लेकिन आंतरिक संघर्षों के कारण 1955 में उन्होंने त्यागपत्र दे दिया।
- दिसंबर 1955 में, लोहिया ने सोशलिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया की स्थापना की, जिसके वे अध्यक्ष चुने गए और इसकी पत्रिका “मैनकाइंड” के संपादक बने।
- एक मंत्रमुग्ध कर देने वाले वक्ता और प्रखर लेखक के रूप में, उन्होंने जाति प्रथा के उन्मूलन, हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में अपनाने, और नागरिक स्वतंत्रताओं के लिए सुदृढ़ सुरक्षा उपायों सहित विभिन्न सुधारों की वकालत की।
- लोहिया ने भारतीय समाज को समानता और स्वतंत्रता की ओर ले जाने और समग्र परिवर्तन प्राप्त करने के लिए आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और लैंगिक क्षेत्रों में “सप्त क्रांति” का विचार प्रस्तुत किया।
राष्ट्रीय जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) शिखर सम्मेलन 2026
संदर्भ: हाल ही में, स्कोप (SCOPE) कन्वेंशन सेंटर, नई दिल्ली में दो-दिवसीय राष्ट्रीय जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) शिखर सम्मेलन 2026 आयोजित किया गया।
अन्य संबंधित जानकारी

- शिखर सम्मेलन के इतर विभिन्न राज्यों की प्रभावशाली पहलों और सफलता की कहानियों को प्रदर्शित करने के लिए एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया।
- इसने खनन प्रभावित क्षेत्रों में जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला।
शिखर सम्मेलन के बारे में
- इसका आयोजन खान मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया गया था।
- इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य अंतर-सरकारी समन्वय को सुदृढ़ करना और खनन प्रभावित जिलों, विशेष रूप से आकांक्षी जिला कार्यक्रम (ADP) और आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम (ABP) क्षेत्रों में DMF निधियों के प्रभावी एवं परिणाम-उन्मुख उपयोग के लिए नीतिगत सुधारों की पहचान करना था।
- विषय: “आकांक्षी जिला कार्यक्रम (ADP) और आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम (ABP) क्षेत्रों के लिए जिला खनिज फाउंडेशन निधि का प्रभावी उपयोग”।
- विषयगत क्षेत्र (Thematic areas): शासन, पारदर्शिता, विकास योजनाओं के साथ अभिसरण, और DMF-वित्तपोषित परियोजनाओं का प्रभाव मूल्यांकन।

ऑरेंज इकॉनमी को बढ़ावा देने के लिए तीन नई पहलों की शुरुआत
संदर्भ: हाल ही में, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने भारत के मीडिया, प्रसारण और डिजिटल क्षेत्र को सशक्त बनाने तथा क्रिएटिव इकॉनमी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तीन प्रमुख पहलों की शुरुआत की।
अन्य संबंधित जानकारी:
- इन पहलों का उद्देश्य ‘ऑरेंज इकॉनमी’ को बढ़ावा देना, सार्वजनिक प्रसारण को सुदृढ़ करना और मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र में एक AI-कुशल कार्यबल तैयार करना है।
- इकोसिस्टम: इन पहलों का लक्ष्य क्रिएटर्स के लिए एक सुदृढ़ इकोसिस्टम का निर्माण करना है, साथ ही गुणवत्तापूर्ण प्रसारण तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करना है।
लॉन्च की गई पहल
राष्ट्रीय AI स्किलिंग पहल:
- यह पहल सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा गूगल और यूट्यूब के साथ साझेदारी में शुरू की गई है, जिसका लक्ष्य रचनात्मक और मीडिया क्षेत्रों के 15,000 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करना है।
- उद्देश्य: एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स (AVGC) और मीडिया तकनीक जैसे क्षेत्रों में AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) क्षमताओं को मजबूत करना।
- कार्यान्वयन एजेंसी: भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT)।
- इसे दो चरणों में संचालित किया जाएगा।
- प्रथम चरण (मार्च–जून 2026): इस चरण का मुख्य ध्यान ‘गूगल करियर सर्टिफिकेट्स’ और ‘गूगल क्लाउड जनरेटिव AI’ पथों के माध्यम से AI के आधारभूत अधिगम पर होगा। इसमें ‘AI एसेंशियल्स’, ‘प्रॉम्प्टिंग एसेंशियल्स’ और ‘जनरेटिव AI का परिचय’ जैसे पाठ्यक्रम शामिल होंगे।
- द्वितीय चरण (जुलाई–दिसंबर 2026): यह चरण रचनात्मक उद्योग के लिए उन्नत और परियोजना-आधारित विशेषज्ञता पर केंद्रित होगा। इसमें कहानी सुनाने, यूट्यूब की सर्वोत्तम प्रथाओं और जेमिनी 3 , नैनो बनाना, विओ तथा वर्टेक्स AI जैसे उन्नत AI उपकरणों का प्रशिक्षण शामिल होगा। यह प्रशिक्षण देश भर के प्रमुख शहरों में आयोजित किया जाएगा।
- यह पहल क्रिएटर्स, मीडिया पेशेवरों, छात्रों और डेवलपर्स को भविष्य के लिए तैयार कौशल विकसित करने में सहायता करेगी और डिजिटल सामग्री एवं नवाचार के क्षेत्र में भारत को एक वैश्विक केंद्र बनाने में योगदान देगी।
MyWaves प्लेटफॉर्म:
- यह WAVES OTT प्लेटफॉर्म के भीतर एक नई विशेषता है, जो नागरिकों को साकंटेंट बनाने, अपलोड करने और साझा करने में सक्षम बनाएगी।
- इसे उपयोगकर्ता-जनित सामग्री के लिए एक संरचित प्लेटफॉर्म के रूप में डिजाइन किया गया है, जो ‘क्रिएट इन इंडिया चैलेंज’ जैसी राष्ट्रीय पहलों में भागीदारी का भी समर्थन करेगा।
- यह प्लेटफॉर्म दर्शकों को केवल मूक दर्शक बने रहने के बजाय सक्रिय भागीदारी की ओर ले जाता है, जिससे उपभोग के साथ-साथ सामग्री के सृजन की अनुमति मिलती है।
- यह लघु, ऊर्ध्वाधर, और कड़ियों वाले (Episodic) कंटेंट जैसे प्रारूपों का समर्थन करता है और भारतीय भाषाओं में एक बहुभाषी इंटरफेस प्रदान करता है।
उन्नत इलेक्ट्रॉनिक कार्यक्रम मार्गदर्शिका (EPG) और टेलीविजन सेट पर इन-बिल्ट सेटेलाइट ट्यूनर:
- यह दर्शकों को अलग से सेट-टॉप बॉक्स की आवश्यकता के बिना सीधे अपने टेलीविजन सेट पर डीडी फ्री डिश चैनल देखने में सक्षम बनाएगा। इससे अतिरिक्त लागत, वायरिंग और कई रिमोट रखने की परेशानी कम होगी।
- उन्नत कार्यक्रम मार्गदर्शिका: यह एक सरल इंटरफेस के माध्यम से एक ही स्थान पर चैनलों और कार्यक्रमों की समय-सारणी को आसानी से
- खोजने में सक्षम बनाता है, जिससे देश भर के परिवारों के लिए टीवी देखने की सुविधा में सुधार होगा।
- निष्कर्ष: संक्षेप में, प्रसार भारती सार्वजनिक प्रसारण को बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाना जारी रखेगा, जबकि भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT) रचनात्मक क्षेत्र के लिए AI कौशल कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएगा, और WAVES OTT प्लेटफॉर्म नागरिकों की भागीदारी और कंटेंट क्रिएशन के लिए मंच प्रदान करेगा—जिसमें ‘क्रिएट इन इंडिया’ चैलेंज भी शामिल है।

