अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के साथ भारत की पूर्ण सदस्यता हेतु वार्ता
संदर्भ: अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने पुष्टि की है कि वर्तमान में भारत के साथ पूर्ण सदस्यता के संबंध में विचार-विमर्श चल रहा है।
अन्य संबंधित जानकारी
- भारत ने अक्टूबर 2023 में पूर्ण सदस्यता के लिए औपचारिक अनुरोध किया था, और फरवरी 2024 में IEA सदस्य देशों के मंत्रियों ने भारत के अनुरोध पर चर्चा शुरू करने पर सहमति व्यक्त की।
- इससे पहले भारत 2017 में एक सहयोगी देश के रूप में IEA में शामिल हुआ था।
- IEA ने यह भी घोषणा की कि कोलंबिया आधिकारिक तौर पर 33वें पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल हो गया है, जबकि वियतनाम एक सहयोगी देश के रूप में शामिल हुआ है।
भारत को पूर्ण सदस्यता मिलने का महत्व
- भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है और सबसे तेजी से उभरती प्रमुख ऊर्जा उपभोक्ता अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जिस कारण यह भविष्य की वैश्विक ऊर्जा मांग की गतिशीलता का केंद्रबिंदु बना हुआ है।
- पूर्ण सदस्यता से भारत को IEA के शासन ढांचे के भीतर मतदान करने का अधिकार मिलेगा और वह निर्णय लेने में सक्षम होगा, जिससे वैश्विक ऊर्जा नीति को आकार देने में इसकी भूमिका होगी।
- सदस्यता से सामूहिक ऊर्जा सुरक्षा तंत्र में भारत की भागीदारी बढ़ेगी, जिसमें कम से कम 90 दिनों के शुद्ध आयात के बराबर आपातकालीन तेल भंडार बनाए रखना और समन्वित आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र में भाग लेना शामिल है।
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के बारे में
- IEA की स्थापना 1974 में, 1973-1974 के तेल संकट के मद्देनजर की गई थी, ताकि इसके सदस्यों को तेल आपूर्ति में बड़े व्यवधानों का से निपटने में मदद मिल सके।
- IEA के अधिदेश में वैश्विक प्रमुख ऊर्जा प्रवृत्तियों की निगरानी और विश्लेषण करना, सुदृढ़ ऊर्जा नीति को बढ़ावा देना और बहुराष्ट्रीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी सहयोग को प्रोत्साहित करना शामिल है।
- IEA की पूर्ण सदस्यता के लिए किसी देश का आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) का सदस्य होना आवश्यक है। भारत वर्तमान में OECD का सदस्य नहीं है, जो एक प्रमुख संस्थागत बाधा है।
नॉर्डिक राष्ट्रों द्वारा हेलसिंकी संधि के तहत ग्रीनलैंड के दर्जे को उन्नत करने की पहल
संदर्भ: नॉर्डिक देश स्वायत्त क्षेत्रों को समान दर्जा देने के लिए हेलसिंकी संधि में संशोधन कर रहे हैं, जिससे आर्कटिक सहयोग और ग्रीनलैंड में रणनीतिक हितों को बल मिलेगा।
अन्य संबंधित जानकारी

- ऐतिहासिक संशोधन: नॉर्डिक सरकारों के मंत्रियों ने हेलसिंकी संधि के ऐतिहासिक पुनर्गठन पर चर्चा करने के लिए 18 फरवरी 2026 को डेनमार्क में बैठक की।
- नॉर्डिक देश उत्तरी यूरोप और आर्कटिक का एक क्षेत्र, जिसमें डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन के साथ-साथ ग्रीनलैंड, फरो द्वीप समूह और ओलैंड (Åland) के स्वायत्त क्षेत्र शामिल हैं।
- इस प्रस्ताव का उद्देश्य नॉर्डिक सहयोग संरचनाओं के भीतर ग्रीनलैंड, फरो द्वीप समूह और ओलैंड को समान और पूर्ण भागीदारी का अधिकार प्रदान करना है।
- ये क्षेत्र लंबे समय से समान दर्जे की मांग कर रहे थे, लेकिन पहले उन्हें सुरक्षा और यूक्रेन युद्ध जैसे उच्च-स्तरीय मुद्दों पर होने वाली चर्चाओं से बाहर रखा जाता था।
- ग्रीनलैंड ने सुरक्षा वार्ताओं से बाहर रखे जाने के कारण 2024 में नॉर्डिक सहयोग प्रारूप का बहिष्कार किया था।
हेलसिंकी संधि की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- 1962 में, फिनलैंड, स्वीडन, डेनमार्क, आइसलैंड और नॉर्वे ने नॉर्डिक क्षेत्रीय सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए हेलसिंकी संधि को अपनाया था।
- संधि ने नॉर्डिक राज्यों के बीच आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और कानूनी मामलों में सहयोग के लिए फ्रेमवर्क स्थापित किया।
- समय के साथ, ग्रीनलैंड और फरो द्वीप समूह जैसे स्वायत्त क्षेत्रों को सीमित भागीदारी तो मिली, लेकिन उन्हें विशेष रूप से सुरक्षा मामलों में समान निर्णय लेने का दर्जा नहीं दिया गया था।
ग्रीनलैंड का महत्व
- आर्कटिक शिपिंग मार्गों, दुर्लभ मृदा खनिज भंडारों और अमेरिका से बढ़ते रणनीतिक भू-राजनीतिक दबाव के कारण ग्रीनलैंड का महत्व काफी बढ़ गया है।
- ग्रीनलैंड में अमेरिका का पिटुफ़िक स्पेस बेस (पूर्व में थुले एयर बेस) स्थित है, जो इसके भू-राजनीतिक महत्व को रेखांकित करता है।
भारत ने ‘हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी‘ (IONS) की अध्यक्षता ग्रहण की
संदर्भ: हाल ही में, विशाखापत्तनम में आयोजित ‘हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी’ (IONS) के प्रमुखों के 9वें सम्मेलन में भारत ने 2026-2028 के कार्यकाल के लिए इसकी अध्यक्षता ग्रहण की है।
अन्य संबंधित जानकारी
- इस सम्मेलन में 33 देशों की नौसेनाओं के प्रमुखों और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों ने भाग लिया।
- भारतीय नौसेना ने ‘रॉयल थाई नेवी’ (थाईलैंड) से IONS की अध्यक्षता ग्रहण की।
- भारत 16 वर्षों के बाद पुनः नेतृत्व की भूमिका में लौटा है; इससे पहले भारत ने 2008 से 2010 तक इसके उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की थी।
- फिलिपींस को औपचारिक रूप से IONS में एक ‘पर्यवेक्षक राष्ट्र’ के रूप में शामिल किया गया, जिससे इस मंच की पहुँच और जुड़ाव का विस्तार हुआ है।
- ओमान ‘मानवीय सहायता और आपदा राहत’ (HADR) पर IONS कार्य समूह में शामिल हुआ।
- भारत ने ‘IONS समुद्री अभ्यास’ आयोजित करने और सदस्य देशों में ‘SAGAR’ पहल के तहत तैनाती जारी रखने की योजना की घोषणा की।
- भारत ने अंतर-संचालनीयता और पेशेवर विनिमय को बढ़ाने के लिए संरचित ‘समुद्री सूचना साझाकरण कार्यशालाओं’ का भी प्रस्ताव दिया।
हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (IONS) के बारे में
- यह एक स्वैच्छिक पहल है जो हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के तटवर्ती देशों की नौसेनाओं को एक साथ लाती है।
- तटवर्ती राज्यों के बीच समुद्री सहयोग बढ़ाने के लिए इस मंच की परिकल्पना 2008 में भारतीय नौसेना द्वारा की गई थी।
- क्षेत्रीय नौसेनाओं के बीच आपसी समझ और विश्वास को बढ़ावा देना।
- यह समुद्री सुरक्षा चुनौतियों, जैसे समुद्री डकैती, आतंकवाद, तस्करी और आपदा प्रतिक्रिया पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
- IONS कोई सैन्य गठबंधन नहीं है बल्कि एक परामर्शदात्री मंच है। इसके निर्णय सर्वसम्मति पर आधारित और गैर-बाध्यकारी होते हैं।
एजुकेटर्स के लिए माइक्रोसॉफ्ट एलीवेट
संदर्भ: माइक्रोसॉफ्ट ने “एजुकेटर्स के लिए माइक्रोसॉफ्ट एलीवेट” लॉन्च किया है, जो 2030 तक भारत के 2 लाख शिक्षण संस्थानों में 20 लाख (2 मिलियन) शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की एक प्रमुख पहल है।
अन्य संबंधित जानकारी
- इस कार्यक्रम की शुरुआत दिल्ली के 75 ‘सीएम श्री’ (CM SHRI) स्कूलों को शामिल करने के साथ हुई और इसे शुरू में दिल्ली के 10 स्कूलों में लागू किया गया।
- शिक्षकों ने पाठ योजना, कक्षा वितरण और छात्र जुड़ाव में सुधार के लिए माइक्रोसॉफ्ट के एआई-संचालित सहायक ‘माइक्रोसॉफ्ट कोपायलट’ के उपयोग में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
- इस उपकरण ने पोस्टर, इन्फोग्राफिक्स और प्रेजेंटेशन डिजाइन करने में मदद की, जिससे कक्षा का ध्यान रटने हटकर तार्किक चिंतन और विश्लेषण पर केंद्रित हुआ।
- एआई टूल शिक्षकों को अधिगम अंतराल की पहचान करने के लिए छात्र प्रदर्शन डेटा का विश्लेषण करने और अनुकूलित मूल्यांकन एवं फीडबैक तंत्र प्रदान करने में सहायता करता है।
- यह कार्यक्रम केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE), राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (NCVET), प्रशिक्षण महानिदेशालय और विभिन्न राज्य शिक्षा एवं कौशल विभागों के सहयोग से कार्यान्वित किया जा रहा है।
- यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है, जो 2026-27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 3 से ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ और ‘कंप्यूटेशनल थिंकिंग’ शुरू करने का आदेश देती है।
पहल की मुख्य विशेषताएं
- यह कार्यक्रम एशिया में ‘एजुकेटर्स के लिए माइक्रोसॉफ्ट एलीवेट’ के पहले रोलआउट का प्रतिनिधित्व करता है।
- यह पहल नीति को कक्षा अभ्यास में बदलने के लिए केंद्रीय और राज्य शिक्षण संस्थानों के साथ साझेदारी करके एक प्रणाली-स्तरीय दृष्टिकोण अपनाती है।
- यह पहल कक्षाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग पर जोर देती है।
- यह कार्यक्रम शिक्षकों को एआई अपनाने के केंद्र के रूप में रखता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि शिक्षा में मानवीय निर्णय सर्वोपरि बना रहे।
विश्व सामाजिक न्याय दिवस
संदर्भ: सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग (DoSJE) ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली में ‘विश्व सामाजिक न्याय दिवस’ मनाया।
अन्य संबंधित जानकारी
- वर्ष 2026 में, विश्व सामाजिक न्याय दिवस “सामाजिक विकास और सामाजिक न्याय के प्रति नवीनीकृत प्रतिबद्धता” विषय के तहत मनाया जा रहा है।
- 2026 का यह आयोजन ‘सामाजिक विकास के लिए दूसरे विश्व शिखर सम्मेलन’ और दोहा राजनीतिक घोषणा को अपनाने के बाद आयोजित किया जा रहा है।
- दोहा राजनीतिक घोषणा सामाजिक विकास पर 1995 की कोपेनहेगन घोषणा की प्रतिबद्धताओं की पुष्टि करती है।
विश्व सामाजिक न्याय दिवस के बारे में
- विश्व सामाजिक न्याय दिवस प्रतिवर्ष 20 फरवरी को मनाया जाता है।
- इस दिवस की घोषणा 2007 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई थी, और इसे पहली बार 2009 में मनाया गया था।
- यह आयोजन गरीबी, बेरोजगारी, सामाजिक बहिष्कार और असमानता से निपटने के प्रयासों को बढ़ावा देता है।
- सामाजिक विकास पर 1995 की कोपेनहेगन घोषणा ने गरीबी उन्मूलन, पूर्ण और उत्पादक रोजगार, तथा सामाजिक एकीकरण को सामाजिक विकास के तीन प्रमुख स्तंभों के रूप में चिन्हित किया था।
- यह दिवस ऐसे व्यापक आर्थिक ढांचे की आवश्यकता पर बल देता है जो शिष्ट कार्य, जीवन निर्वाह मजदूरी और सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करे।
भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र में मत्स्य पकड़ने हेतु ‘एक्सेस पास‘
संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री ने गुजरात के वेरावल में देश के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में मछली पालन हेतु ‘एक्सेस पास’ (Access Pass) लॉन्च किया।
अन्य संबंधित जानकारी

- भारत सरकार ने देश के अनन्य आर्थिक क्षेत्र में मछली पकड़ने के लिए सभी 13 तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘एक्सेस पास’ लॉन्च किया।
- यह पास ‘प्रादेशिक जल, महाद्वीपीय मग्नतट, अनन्य आर्थिक क्षेत्र और अन्य समुद्री क्षेत्र अधिनियम, 1976’ के तहत ‘अनन्य आर्थिक क्षेत्र में मत्स्य पालन का सतत दोहन नियम, 2025’ की अधिसूचना के बाद लॉन्च किया गया है।
- EEZ में सतत मत्स्य पकड़ने के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचा प्रदान करने हेतु इन नियमों को 4 नवंबर 2025 को अधिसूचित किया गया था।
- यह पहल केंद्रीय बजट 2025-26 की उस घोषणा को मूर्त रूप प्रदान करती है जिसका उद्देश्य EEZ और उच्च समुद्र में मत्स्य संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देना था।
- मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्रीय बजट 2026-27 की घोषणा के अनुरूप EEZ और उच्च समुद्र में भारतीय जहाजों द्वारा पकड़ी गई मछलियों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
EEZ नियमों के तहत एक्सेस पास
‘एक्सेस पास’ EEZ नियमों के तहत भारतीय मछुआरों को उच्च मूल्य वाले समुद्री संसाधनों के सतत दोहन के लिए सशक्त बनाने हेतु एक प्रमुख उपाय है। इसका उद्देश्य है:
- तट के निकट (Near-shore) से गहरे समुद्र (Deep-sea) में मछली पकड़ने की ओर संक्रमण।
- मछुआरा संगठनों को सहकारी समितियों और मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (FFPOs) के रूप में बढ़ावा देना।
- अधिक मछली पकड़ने, बेहतर कीमतों और ‘ट्रेसिबिलिटी’ एवं प्रमाणन जैसी निर्यात-अनुकूल पद्धतियों के माध्यम से मछुआरों की आय में वृद्धि करना।
एक्सेस पास की मुख्य विशेषताएं
- लघु और पारंपरिक मछुआरों का संरक्षण: पारंपरिक गैर-मोटर चालित मछली पकड़ने वाली नौकाओं को एक्सेस पास की आवश्यकता से छूट दी गई है। केवल मशीनीकृत मछली पकड़ने वाले जहाजों (लगभग 64,000) और 24 मीटर से ऊपर के बड़े मोटर चालित जहाजों के लिए पास प्राप्त करना अनिवार्य है। यह सुनिश्चित करता है कि छोटे और पारंपरिक मछुआरों की आजीविका सुरक्षित रहे।
- अपग्रेड किया गया ReALCRaft डिजिटल प्लेटफॉर्म: ‘एक्सेस पास’ प्रक्रिया को निर्बाध और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाने के लिए ReALCRaft प्लेटफॉर्म को अपग्रेड किया गया है। ReALCRaft का उपयोग पहले से ही राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और मछुआरों द्वारा जहाज पंजीकरण और लाइसेंसिंग के लिए व्यापक रूप से किया जा रहा है।
- शून्य शुल्क, पूर्णतः ऑनलाइन एक्सेस पास: एक्सेस पास पूरी तरह से ReALCRaft पोर्टल के माध्यम से समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से निःशुल्क जारी किया जाता है। एक बार स्वीकृत होने के बाद, पास डिजिटल रूप से मछुआरे के पंजीकृत मोबाइल नंबर या ईमेल पर भेज दिया जाता है।
- वैश्विक निर्यात के लिए एकल-खिड़की प्रणाली: ReALCRaft पोर्टल को ‘कैच सर्टिफिकेट’ के लिए MPEDA पोर्टल के साथ और ‘स्वास्थ्य प्रमाणपत्र’ के लिए EIC के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे एक एकीकृत एकल-खिड़की डिजिटल इकोसिस्टम तैयार हुआ है। यह एकीकरण ट्रेसिबिलिटी को बढ़ाता है, प्रक्रियात्मक देरी को कम करता है और प्रीमियम अंतर्राष्ट्रीय समुद्री खाद्य बाजारों तक पहुंच को सुगम बनाता है।
