‘भारत विस्तार’ योजना

संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री ने जयपुर (राजस्थान) में भारत विस्तार योजना के प्रथम चरण का शुभारंभ किया। यह योजना कृषि क्षेत्र में एआई-संचालित रूपांतरण हेतु किए गए भारत के प्रयासों का हिस्सा है।

भारत विस्तार के बारे में:

  • भारत विस्तार/VISTAAR (वर्चुअली इंटीग्रेटेड सिस्टम टू एक्सेस एग्रीकल्चरल रिसोर्सेज): यह एक एआई-संचालित डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा (DPI) है, जिसे किसानों के लिए ‘एकल डिजिटल गेटवे’ के रूप में डिजाइन किया गया है।
  • यह एकीकृत कृषि सेवाएँ प्रदान करने के लिए एग्रीस्टैक, आईसीएआर (ICAR) परामर्श, आईएमडी (IMD) मौसम डेटा, मंडी कीमतों (Agmarknet) और विभिन्न सरकारी योजनाओं के डेटा को एकीकृत करता है।
  • उद्देश्य:
    • इस योजना का उद्देश्य प्रौद्योगिकी के माध्यम से किसानों को रियल टाइम में कृषि संबंधी जानकारी और परामर्श सेवाएँ प्रदान करना है।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • वॉयस-फर्स्ट एआई प्लेटफॉर्म: किसान 155261 डायल करके प्रश्न पूछ सकते हैं, तत्काल परामर्श प्राप्त कर सकते हैं और मंडी की कीमतें देख सकते हैं; यह सुविधा ‘फीचर फोन’ पर भी उपलब्ध है।
  • बहुभाषी पहुँच: प्रारंभ में यह हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है, जिसे आगे चलकर 11 भाषाओं में अनुदित करने की योजना है।
  • किसान पहचान पत्र: एक डिजिटल किसान आईडी में किसान का प्रोफाइल, योजना की पात्रता और लाभों का विवरण दर्ज होगा। शुरुआत में इसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी योजनाओं से जोड़ा गया है।
  • एकीकृत सेवाएँ: मौसम का पूर्वानुमान, कीटों की चेतावनी, फसल परामर्श, मिट्टी और उर्वरक मार्गदर्शन, योजना विवरण और शिकायत ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करता है।
  • एकाधिक पहुँच माध्यम: हेल्पलाइन, चैटबॉट, वेब इंटरफेस और आगामी मोबाइल ऐप के माध्यम से उपलब्ध।

प्रोजेक्ट वॉल्ट

संदर्भ: संयुक्त राज्य अमेरिका ने ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ शुरू किया है, जो महत्वपूर्ण खनिजों का एक घरेलू भंडार बनाने की एक रणनीतिक पहल है। इसका उद्देश्य भू-राजनीतिक आपूर्ति व्यवधानों और आर्थिक दबाव से उद्योगों की रक्षा करना है।

प्रोजेक्ट वॉल्ट के बारे में:

  • यह एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) है, जिसे पूरी तरह से सरकार-नियंत्रित भंडार के बजाय एक स्वतंत्र रूप से शासित और संचालित इकाई के रूप में डिजाइन किया गया है।
  • इसे संयुक्त राज्य अमेरिका के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक (EXIM) से $10 बिलियन तक के वित्तपोषण और अतिरिक्त निजी निवेश (~$2 बिलियन) का समर्थन प्राप्त है।
  • इस परियोजना का लक्ष्य यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) 2025 की महत्वपूर्ण खनिज सूची में चिन्हित 60 महत्वपूर्ण खनिजों का भंडारण करना है।
  • EXIM घरेलू स्तर पर खनिजों की खरीद और भंडारण के लिए दीर्घकालिक ऋण प्रदान करेगा।
  • खनिजों की खरीद और भंडारण ‘अग्रिम प्रतिबद्धताओं’ के आधार पर प्रतिभागी कंपनियों की ओर से किया जाएगा।
  • खनिजों की निकासी और पुनर्भरण बाजार व्यवधान की पूर्व-निर्धारित स्थितियों के तहत होगा, जिसके लिए प्रतिभागी भंडारण प्रीमियम का भुगतान करेंगे।
  • यह मॉडल आपूर्ति झटकों के खिलाफ एक बफर के रूप में सामरिक पेट्रोलियम रिजर्व (1975) से प्रेरित है।
  • यह कदम आपूर्ति श्रृंखला की संवेदनशीलता, विशेष रूप से खनन, प्रसंस्करण और रेयर अर्थ मैग्नेट निर्यात में चीन के प्रभुत्व को लेकर बढ़ती चिंताओं के बाद उठाया गया है।

प्रोजेक्ट वॉल्ट का महत्व:

  • यह पहल महत्वपूर्ण खनिजों को राष्ट्रीय शक्ति और आर्थिक सुरक्षा के केंद्र में स्थित रणनीतिक संपत्ति मानती है।
  • यह परियोजना उन विदेशी-नियंत्रित आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता कम करती है जो दबाव और व्यवधान के प्रति संवेदनशील हैं।
  • यह भंडार घरेलू निर्माताओं के लिए अस्थिर ‘स्पॉट मार्केट’ कीमतों के विरुद्ध एक बीमा तंत्र  प्रदान करता है।
  • यह अमेरिकी औद्योगिक इकोसिस्टम के लचीलेपन को सुदृढ़ करता है और घरेलू खनन एवं प्रसंस्करण पहलों का पूरक है।
  • यह प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं से परे एक पूर्वानुमानित मांग उत्पन्न करके वैकल्पिक वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का समर्थन कर सकता है।

राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे ‘मधुमक्खी कॉरिडोर’

संदर्भ: हाल ही में, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने टिकाऊ बुनियादी ढांचा विकास के हिस्से के रूप में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे अपनी तरह की पहली ‘पॉलिनेटर या मधुमक्खी कॉरिडोर’ विकसित करने की पहल की घोषणा की।

मुख्य उद्देश्य:

  • परागकणों के लिए वर्ष भर नेक्टर और पराग की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • मधुमक्खियों और जंगली परागकणों पर बढ़ते पारिस्थितिक तनाव को कम करना।
  • कृषि, बागवानी और पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित करने वाली घटती ‘परागकण सेवाओं’ की समस्या का समाधान करना।
  • सड़कों के किनारे सजावटी वृक्ष लगाने के बजाय जैव-विविधता से समृद्ध ‘पारिस्थितिक वृक्षारोपण’ करना।

पारिस्थितिक डिजाइन:

  • कॉरिडोर में वृक्ष, झाड़ियाँ, जड़ी-बूटियाँ और घास लगाए जाएंगे।
  • जंगली तत्वों जैसे कि फूल वाले खरपतवार, मृत लकड़ी और खोखले तनों को संरक्षित रखा जाएगा।
  • पौधों की ऐसी प्रजातियाँ चुनी जाएँगी जो अलग-अलग मौसमों में खिलें, ताकि फूलों का चक्र निरंतर बना रहे।
  • इस पहल में स्वदेशी और नेक्टर-समृद्ध पौधों की प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई है।

प्रमुख पादप प्रजातियाँ:

  • राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और सिरिस जैसी स्वदेशी और नेक्टर-समृद्ध प्रजातियाँ लगाई जाएँगी।

कार्यान्वयन रणनीति:

  • कॉरिडोर का विकास कृषि-जलवायु उपयुक्तता के आधार पर राष्ट्रीय राजमार्ग के खंडों और NHAI के खाली भूखंडों पर किया जाएगा।
  • प्रत्येक 500 मीटर से 1 किमी के अंतराल पर वृक्षारोपण क्लस्टर बनाए जाएंगे।
  • यह अंतराल मधुमक्खियों और जंगली मक्खियों की औसत भोजन खोज सीमा के अनुरूप है।
  • NHAI के क्षेत्रीय कार्यालय देश भर में उपयुक्त स्थानों की पहचान करेंगे।

लक्ष्य:

  • वर्ष 2026-27 के दौरान कम से कम तीन पॉलिनेटर कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
  • राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे लगभग 40 लाख पेड़ लगाए जाएंगे।
  • कुल वृक्षारोपण का लगभग 60% हिस्सा ‘मधुमक्खी कॉरिडोर’ पहल के अंतर्गत कवर होगा।
  • इस पहल से आवास कनेक्टिविटी बढ़ने, परागण दक्षता में सुधार होने और दीर्घकालिक पारिस्थितिक स्थिरता में योगदान मिलने की अपेक्षा है।

अभ्यास मिलन 2026

संदर्भ: भारतीय नौसेना, भारत-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग को बढ़ाने और मित्र नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता बढ़ाने के लिए विशाखापट्टनम (बंगाल की खाड़ी) में पूर्वी नौसेना कमान के तत्वावधान में ‘मिलन’ का 13वां संस्करण आयोजित कर रही है।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • मिलन 2026 भारत-प्रशांत क्षेत्र के सबसे बड़े बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों में से एक है, जो दुनिया भर की नौसेनाओं को एक साथ लाता है।
  • 135 से अधिक देशों को निमंत्रण भेजा गया है, जिनमें से लगभग 70 देशों ने भागीदारी की पुष्टि की है।
  • इस अभ्यास में बंदरगाह और समुद्री दोनों चरण शामिल होंगे, जिसके अंतर्गत निम्नलिखित क्षेत्र कवर किए जाएंगे:
    • पनडुब्बी रोधी युद्ध
    • वायु रक्षा अभियान
    • समुद्री क्षेत्र जागरूकता
    • खोज और बचाव मिशन
    • सहकारी सुरक्षा और HADR (मानवीय सहायता और आपदा राहत) अभियान
  • मिलन 2026 का विषय ‘सौहार्द, सहयोग, सहभागिता’ है।
  • यह अभ्यास समुद्री सुरक्षा, नियम-आधारित समुद्र, क्षेत्रीय स्थिरता और भारत-प्रशांत में सहकारी जुड़ाव के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • यह अभ्यास विशाखापट्टनम में दो अन्य प्रमुख आयोजनों के साथ आयोजित किया जा रहा है:
    • अंतर्राष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू (IFR) 2026
    • IONS (हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी) प्रमुखों का सम्मेलन
  • मिलन 2026 प्रधानमंत्री के ‘महासागर’ (MAHASAGAR – क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) विजन के अनुरूप है, जो निम्नलिखित के रूप में भारत की भूमिका को पुष्ट करता है:
    • पसंदीदा सुरक्षा भागीदार
    • ग्लोबल साउथ और प्रमुख शक्तियों के बीच सेतु
    • वैश्विक समुद्री साझा क्षेत्रों  में हितधारक।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

  • ‘मिलन’ अभ्यास की शुरुआत 1995 में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में हुई थी, जिसमें इंडोनेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका और थाईलैंड ने भाग लिया था।
  • यह भारतीय नौसेना का एक द्विवार्षिक बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है।
  • इसके प्रतिभागी देशों की संख्या निरंतर बढ़ी है:
    • 2014: 17 देश
    • 2022: 42 देश
    • 2026: ~70 पुष्टि किए गए प्रतिभागी (अब तक का सबसे बड़ा संस्करण)।

भारत की पहली निजी क्षेत्र हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन (FAL)

संदर्भ: हाल ही में, भारत के प्रधानमंत्री और फ्रांस के राष्ट्रपति ने ‘एयरबस H125’ हेलीकॉप्टर के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स फाइनल असेंबली लाइन का वर्चुअली उद्घाटन किया।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • यह सुविधा कर्नाटक के कोलार जिले के वेमगल में स्थित है और यह भारत के निजी क्षेत्र की पहली हेलीकॉप्टर ‘फाइनल असेंबली लाइन’ (FAL) है।
  • एयरोस्पेस विनिर्माण में, फाइनल असेंबली लाइन (FAL) वह अंतिम चरण होता है जहाँ विमान के सभी प्रमुख पूर्व-निर्मित हिस्सों को एक पूर्णतः कार्यात्मक इकाई में एकीकृत किया जाता है।
  • इस सुविधा की स्थापना टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) द्वारा एयरबस के साथ साझेदारी में की गई है।
  • यह भारत-फ्रांस रक्षा-औद्योगिक सहयोग में एक बड़ा कदम है और एयरोस्पेस क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण का समर्थन करता है।

विकास के मुख्य बिंदु:

  • यह सुविधा प्रारंभ में भारत में एयरबस H125 हेलीकॉप्टर के नागरिक संस्करण का निर्माण करेगी।
  • भविष्य में उच्च स्तर के स्थानीयकरण के साथ इसके सैन्य संस्करण H125M का उत्पादन भी किया जा सकता है।
  • प्रथम ‘मेड इन इंडिया’ H125 हेलीकॉप्टर की आपूर्ति 2027 की शुरुआत में होने की उम्मीद है।
  • यहाँ उत्पादित हेलीकॉप्टर घरेलू मांग और दक्षिण एशिया के निर्यात बाजारों की आवश्यकताओं को पूरा करेंगे।
  • यह परियोजना पहली बार है जब भारतीय निजी क्षेत्र एक परिष्कृत रोटरी विंग प्लेटफॉर्म (हेलीकॉप्टर) के विनिर्माण, एकीकरण, परीक्षण और रखरखाव का कार्य करेगा।
  • कर्नाटक सरकार ने इस परियोजना के लिए लगभग 17 एकड़ भूमि आवंटित की है।
  • अगले बीस वर्षों में लगभग 500 हेलीकॉप्टर उत्पादित किए जा सकते हैं।
  • इस कार्यक्रम से महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार उत्पन्न होने और भारत के एयरोस्पेस इकोसिस्टम का सुदृढ़ीकरण होने की अपेक्षा है।
  • C295 परिवहन विमान असेंबली लाइन के बाद, यह टाटा-एयरबस का दूसरा बड़ा सहयोग है।
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