भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR)
सन्दर्भ: केंद्रीय बजट 2026-27 में ‘भारत-VISTAAR’ (वर्चुअली इंटीग्रेटेड सिस्टम टू एक्सेस एग्रीकल्चरल रिसोर्सेज) लॉन्च करने का प्रस्ताव रखा गया है।
अन्य संबंधित जानकारी:
- यह एक बहुभाषी AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) उपकरण है, जो ‘एग्रीस्टैक’ पोर्टलों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के कृषि पद्धतियों से संबंधित पैकेज को AI प्रणालियों के साथ एकीकृत करेगा।
- यह अनुकूलित (कस्टमाइज़्ड) परामर्श सहायता प्रदान करके कृषि उत्पादकता को बढ़ाएगा, किसानों के लिए बेहतर निर्णय लेना संभव बनाएगा और जोखिमों को कम करेगा।
भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) के प्रमुख कार्य:
• यह डिजिटल समाधानों की व्यापकता (स्केलेबिलिटी), सुलभता और समावेशिता को बढ़ाएगा; किसान फीडबैक के लिए टू-वे कम्युनिकेशन सक्षम करेगा; और ICAR संस्थानों तथा राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के साथ हितधारक भागीदारी के माध्यम से केंद्र-राज्य अभिसरण को बढ़ावा देगा।
- ICAR कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संगठन है, जिसे 16 जुलाई 1929 को ‘इंपीरियल काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च’ के रूप में स्थापित किया गया था और यह सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत है।
• VISTAAR कृषि विस्तार के लिए सुदृढ़ डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के विकास में सहायता करता है।
• इसका लक्ष्य किसानों को कार्रवाई योग्य जानकारी के साथ सशक्त बनाना, सहयोग को सुव्यवस्थित करना और डिजिटल कृषि विस्तार पहलों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना है।
VISTAAR के बारे में:
• यह एक खुला, अंतर-संचालनीय और संघीय सार्वजनिक नेटवर्क है, जो कृषि को रूपांतरित करने के लिए तैयार है। इसका मिशन ज्ञान का लोकतंत्रीकरण और संदर्भानुकरण करना, किसानों की आवाज़ को सशक्त बनाना और ‘एक्स्पोनेंशियल AI’ के माध्यम से पारिस्थितिकी तंत्र के ज्ञान को बढ़ाना है।
• यह नेटवर्क सार्वजनिक और निजी प्लेटफार्मों पर सत्यापित कृषि सामग्री, सर्वोत्तम प्रथाओं और कृषि-कौशल की खोज तथा आपूर्ति की सुविधा प्रदान करता है, जिससे सहयोग के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा मिलता है।
• VISTAAR सेवाएँ:
- कंटेंट सेवाएँ
- डेटा सेवाएँ
- रजिस्ट्रियां
- अवलोकन सेवाएँ
खेलो इंडिया मिशन
संदर्भ: केंद्रीय बजट 2026-27 में, वित्त मंत्री ने भारत के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को रूपांतरित करने के लिए 10-वर्षीय रणनीतिक रोडमैप, ‘खेलो इंडिया मिशन’ शुरू करने की घोषणा की है।
खेलो इंडिया मिशन की मुख्य विशेषताएँ:

- इस मिशन का उद्देश्य संरचित एथलीट मार्ग तैयार करना, संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करना और सभी स्तरों पर प्रदर्शन के परिणामों में सुधार करना है।
- यह देश भर में खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाएगा।
- यह मिशन पूर्ववर्ती खेलो इंडिया कार्यक्रम पर आधारित है, जिसने खेल प्रतिभाओं के व्यवस्थित संवर्धन की प्रक्रिया को गति प्रदान की है।
- यह मिशन “विकसित भारत” के विजन के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य भारत को 2036 तक शीर्ष 10 और 2047 तक शीर्ष 5 खेल राष्ट्रों में स्थापित करना है।
खेलो इंडिया कार्यक्रम के बारे में:
- खेलो इंडिया कार्यक्रम 2016-17 में शुरू किया गया था और इसका उद्देश्य ‘राष्ट्रीय खेल विकास कार्यक्रम’ के तहत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में व्यापक भागीदारी और खेल उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है।
- यह कार्यक्रम स्तरीकृत प्रशिक्षण केंद्रों, प्रशिक्षकों के विकास, खेल विज्ञान के समावेशन, प्रतिस्पर्धी लीगों तथा आधुनिक खेल अवसंरचना के माध्यम से प्रतिभा विकास पर केंद्रित है।
- खेलो इंडिया आंदोलन के तहत प्रतिवर्ष राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, जिनमें यूथ गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, पैरा गेम्स और विंटर गेम्स शामिल हैं, जहाँ युवा एथलीट अपने राज्यों और विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधित्व करते हुए पदकों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
- इसकी शुरुआत 2018 में नई दिल्ली में आयोजित ‘खेलो इंडिया स्कूल गेम्स’ से हुई थी।
श्री गुरु रविदास की 649वीं जयंती
संदर्भ: हाल ही में, 1 फरवरी को भारत में महान रहस्यवादी कवि-संत श्री गुरु रविदास महाराज जी की जयंती मनाई गई।
श्री गुरु रविदास महाराज जी के बारे में:

- रविदास (14वीं शताब्दी, वाराणसी, उत्तर प्रदेश के निकट) एक रहस्यवादी, कवि और उत्तर भारतीय भक्ति आंदोलन के सबसे प्रतिष्ठित संतों में से एक थे।
- यह उत्सव प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा (माघ मास की पूर्णिमा के दिन) को मनाया जाता है।
- चमार समुदाय (जिसे पारंपरिक रूप से “अछूत” माना जाता था) में जन्मे गुरु रविदास ने मानवीय समानता और श्रम की गरिमा का समर्थन किया तथा जाति-आधारित भेदभाव का प्रखर विरोध किया।
- वे एक सामाजिक-धार्मिक सुधारक, आध्यात्मिक विचारक, कवि, मानवतावादी और शांतिवादी थे, और उनकी शिक्षाओं में भक्ति के साथ सामाजिक नैतिकता भी देखने को मिलता है।
प्रमुख योगदान:
- गुरु रविदास की कविताएँ और भजन, जिन्हें ‘बाणी’ (पवित्र कथन) कहा जाता है, उनके सामाजिक दृष्टिकोण और शिक्षाओं का मूल आधार हैं।
- उनकी लगभग 40 कविताएँ सिखों के पवित्र धर्मग्रंथ ‘आदि ग्रंथ’ (श्री गुरु ग्रंथ साहिब) में सम्मिलित हैं। ऐसा माना जाता है कि उनकी भेंट सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी से हुई थी।
- इसके अतिरिक्त, उनके नाम से जुड़ी लगभग 140 ‘अमृत बाणियाँ’ रविदासिया संप्रदाय की पवित्र पुस्तक ‘अमृत बाणी गुरु रविदास’ में संकलित हैं। यह संप्रदाय गुरु रविदास की वंदना करता है और इसका उदय सिख धर्म से हुआ है।
- रविदास की बाणियाँ निर्गुण भक्ति (निराकार ईश्वर की भक्ति) की पक्षधर हैं और कर्मकांडों तथा जातीय सोपानों को अस्वीकार करती हैं।
उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन:
• उदय और प्रसार: 13वीं से 17वीं शताब्दी तक उत्तर व पूर्वी भारत और महाराष्ट्र में अनेक सामाजिक-धार्मिक आंदोलन फले-फूले। इन्होंने भक्ति और धार्मिक समानता पर बल दिया, जो दक्षिण भारतीय भक्ति आंदोलनों की भी मुख्य विशेषता थी।
• दक्षिण भारतीय परंपरा से जुड़ाव: सल्तनत काल के लगभग सभी भक्ति आंदोलन दक्षिण भारतीय वैष्णव आचार्यों से जुड़े थे, जो पुरानी भक्ति परंपराओं की निरंतरता या उनके पुनरुत्थान का संकेत देते हैं।
• भक्ति आंदोलनों ने धार्मिक समानता और भक्ति पर जोर दिया, यद्यपि कुछ वैष्णव परंपराओं ने जाति व्यवस्था और ब्राह्मणवादी प्रभुत्व को बनाए रखा।
• भक्ति आंदोलन की आंतरिक विविधता:
- एकेश्वरवादी/निर्गुण संत जैसे कबीर और गुरु नानक ने सामाजिक सुधार और निराकार ईश्वर की भक्ति पर बल दिया।
- वैष्णव/सगुण संत जैसे मीराबाई, सूरदास, तुलसीदास और चैतन्य महाप्रभु जैसे संतों ने कृष्ण या राम की भक्ति पर ध्यान केंद्रित किया।
यंत्र इंडिया लिमिटेड को ‘मिनीरत्न’ का दर्जा
संदर्भ: हाल ही में, भारत के रक्षा मंत्री ने यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) को ‘मिनीरत्न श्रेणी-I’ का दर्जा प्रदान करने की स्वीकृति दी है।
अन्य संबंधित जानकारी:
- YIL के बोर्ड को अब बिना किसी पूर्व सरकारी अनुमोदन के नई परियोजनाओं, आधुनिकीकरण और उपकरणों की खरीद के लिए ₹500 करोड़ तक के पूंजीगत व्यय को मंजूरी देने का अधिकार मिल गया है।
- इस बढ़ी हुई वित्तीय स्वायत्तता से त्वरित निर्णय लेने में सहायता मिलने और रक्षा उत्पादन एवं निर्यात में कंपनी की वृद्धि में तेजी आने की संभावना है।
- यह निर्णय स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को सुदृढ़ करने, आयात कम करने, भारतीय उद्योगों को बढ़ावा देने और भारत को एक वैश्विक रक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करने के सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन को प्रतिबिम्बित करता है।
यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) के बारे में:
- इसकी स्थापना 1 अक्टूबर, 2021 को आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) के सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (DPSU) में निगमीकरण के माध्यम से की गई थी, ताकि रक्षा विनिर्माण में दक्षता, स्वायत्तता और नवाचार को बढ़ाया जा सके।
- यह रक्षा उत्पादन विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक ‘अनुसूची- A’ श्रेणी का रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (DPSU) है।
मिनीरत्न दर्जे के बारे में:
• ‘मिनीरत्न’ का दर्जा भारत में लाभकारी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSE) के लिए एक मान्यता है, जो उन्हें विकास में तेजी लाने हेतु बढ़ी हुई वित्तीय और परिचालन स्वायत्तता प्रदान करता है।
• पात्रता मानदंड:
- मिनीरत्न श्रेणी-I: वे CPSE जिन्होंने लगातार तीन वर्षों तक लाभ अर्जित किया है, इन तीन वर्षों में से कम से कम एक वर्ष में ₹30 करोड़ या उससे अधिक का कर-पूर्व लाभ प्राप्त किया है, और जिनका कुल मूल्य सकारात्मक है, वे ‘मिनीरत्न-I’ दर्जे के लिए पात्र हैं।
- मिनीरत्न श्रेणी-II: वे CPSE जिन्होंने पिछले लगातार तीन वर्षों से लाभ कमाया है और जिनका कुल मूल्य सकारात्मक है, वे ‘मिनीरत्न-II’ दर्जे के लिए पात्र हैं।
• वित्तीय स्वायत्तता:
- श्रेणी-I: ये उद्यम ₹500 करोड़ तक या अपने कुल मूल्य के बराबर राशि, जो भी कम हो, निवेश कर सकते हैं।
- श्रेणी-II: ये उद्यम ₹300 करोड़ तक या अपने कुल मूल्य का 50%, जो भी कम हो, निवेश कर सकते हैं।
थाईपूसम उत्सव
संदर्भ: हाल ही में तमिलनाडु में ‘थाईपूसम उत्सव 2026’ मनाया गया, जिसे भगवान मुरुगन के भक्तों द्वारा अत्यंत शुभ माना जाता है।
थाईपूसम उत्सव के बारे में

- इसे ‘थाई पूसम’, ‘थाईपुयम’ या ‘थाईप्पोयम’ के नाम से भी जाना जाता है। भारत और विदेशों में रहने वाले तमिल समुदाय के लिए इसका गहरा आध्यात्मिक महत्व है।
- शीत अयनांत और मकर संक्रांति के बाद आने वाली पहली पूर्णिमा को ‘थाईपूसम’ कहा जाता है।
- यह तमिल सौर मास ‘थाई’ (जनवरी-फरवरी) में मनाया जाता है, जो अन्य हिंदू कैलेंडरों के ‘मकर’ मास के अनुरूप है।
- यह उत्सव भगवान मुरुगन को समर्पित है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय और अज्ञानता एवं अहंकार के विनाश का प्रतीक है।
- यह दिन उस शक्तिशाली क्षण का प्रतीक है जब देवी पार्वती ने भगवान मुरुगन को दिव्य ‘वेल‘ (भाला) प्रदान किया था, जिससे वे असुर ‘सूरपद्म’ का वध करने और ब्रह्मांडीय संतुलन बहाल करने में सक्षम हुए थे।
- ‘वेल’ (भाला) आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है और आत्मज्ञान का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से शक्ति, स्पष्टता, सुरक्षा और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
- यह तमिलनाडु में व्यापक रूप से मनाया जाता है, साथ ही मलेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका और मॉरीशस जैसे विशाल तमिल आबादी वाले देशों में भी इसे भव्यता के साथ मनाया जाता है।
मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI)
संदर्भ: HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI सूचकांक ने जनवरी 2026 में 55.4 तक पहुँचकर सुधार के संकेत दिए हैं।
अन्य संबंधित जानकारी
- HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI ने नए ऑर्डर, उत्पादन, रोजगार और क्रय गतिविधि में तीव्र वृद्धि का संकेत दिया है, जो बेहतर व्यावसायिक स्थितियों को दर्शाता है।
- सर्वेक्षण में शामिल उत्तरदाताओं ने उत्पादन में इस वृद्धि का श्रेय सुदृढ़ माँग, नए व्यापार प्रवाह में वृद्धि और प्रौद्योगिकी में निरंतर निवेश को दिया है। इसके साथ ही, दिसंबर के स्तर की तुलना में उत्पादन वृद्धि की गति तेज हुई है।
- PMI के आँकड़ों से स्पष्ट होता है कि घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों ग्राहकों की बिक्री में सुधार हुआ है, जिसका मुख्य कारण माँग में लचीलापन और विनिर्माताओं द्वारा किए गए विपणन प्रयास हैं।
- इनपुट लागत पिछले चार महीनों में सबसे तेज़ गति से बढ़ी है, जबकि ‘फैक्ट्री-गेट’ कीमतों की वृद्धि दर मध्यम रही है, जिससे लाभ मार्जिन पर कुछ दबाव पड़ा है।
परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के बारे में:
• HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI का संकलन प्रतिमाह ‘S&P ग्लोबल’ द्वारा आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधकों के सर्वेक्षणों के आधार पर किया जाता है।
- PMI विभिन्न उद्योगों के आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधकों के मासिक सर्वेक्षण से प्राप्त किया जाता है, जिसमें अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम दोनों गतिविधियाँ शामिल होती हैं।
• यह 0 से 100 के पैमाने पर होता है, जहाँ 50 से ऊपर का अंक विस्तार को दर्शाता है और 50 से नीचे का अंक संकुचन संकेत देता है।
• यह सूचकांक व्यावसायिक नेतृत्वकर्ताओं, बाजार विश्लेषकों और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
