लंबी दूरी की पोत-रोधी हाइपरसोनिक मिसाइल

संदर्भ: भारत ने नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान अपनी सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के रूप में पहली लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सार्वजनिक रूप से अनावरण किया।

अन्य संबंधित जानकारी

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की झांकी में ‘लंबी दूरी की पोत-रोधी हाइपरसोनिक मिसाइल’ (LR-AShM) और लड़ाकू पनडुब्बियों हेतु नौसैनिक प्रौद्योगिकियों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया।
  • यह प्रदर्शन स्वदेशी मिसाइल विकास और जलमग्न युद्ध प्रणालियों के क्षेत्र में भारत की प्रगति को रेखांकित करता है।
  • यह हाइपरसोनिक हथियार-सक्षम राष्ट्रों के विशिष्ट समूह में भारत के प्रवेश का प्रतिनिधित्व करता है, विशेष रूप से पोत-रोधी प्रणालियों के संदर्भ में।

LR-AShM (लंबी दूरी की पोत-रोधी हाइपरसोनिक मिसाइल) की मुख्य विशेषताएं

  • LR-AShM भारत की पहली सार्वजनिक रूप से अनावरण की गई लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल है, जिसे DRDO द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
  • इसे मुख्य रूप से भारतीय नौसेना की तटीय बैटरी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • गति: यह एक अर्ध-बैलिस्टिक प्रक्षेपवक्र का अनुसरण करती है और 10 मैक तक की अधिकतम गति प्राप्त करती है, जबकि इसकी औसत गति लगभग 5 मैक रहती है।
  • लॉन्चर:  मिसाइल को 12×12 उच्च-गतिशीलता वाले वाहन पर आधारित एक गतिशील ‘ट्रांसपोर्टर-इरेक्टर-लॉन्चर’ पर स्थापित किया गया है।
  • मारक क्षमता: यह विभिन्न प्रकार के पेलोड ले जाने में सक्षम है और इसकी मारक क्षमता 1,500 किलोमीटर से अधिक है।
  • सटीक निशाना: यह मिसाइल स्थिर और गतिशील दोनों प्रकार के समुद्री लक्ष्यों को उच्च सटीकता के साथ भेदने में सक्षम है।
  • प्रक्षेपवक्र: उड़ान के दौरान मिसाइल कई स्किप-ग्लाइडयुद्धाभ्यास करती है, जिससे इसका पता लगाना और इसे बीच में रोकना अत्यंत कठिन हो जाता है।
  • सेंसर: इसमें ‘टर्मिनल गाइडेंस’ के लिए पूर्णतः स्वदेशी एवियोनिक्स और उच्च-सटीक सेंसर पैकेज का उपयोग किया गया है।
  • प्रणोदन: यह प्रणाली द्वि-चरणीय ठोस प्रणोदन रॉकेट मोटर और उसके पश्चात एक बिना इंजन वाले हाइपरसोनिक ग्लाइड चरण द्वारा संचालित होती है।
  • ट्रैक करने में कठिनाई: कम ऊंचाई पर उड़ान और उच्च पैंतरेबाजी के कारण शत्रु की रडार प्रणालियों के लिए इस मिसाइल को ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण होता है।

पिक्सेल के नेतृत्व वाले समूह को मिला भारत का पहला निजी राष्ट्रीय EO सेटेलाइट प्रोजेक्ट

संदर्भ: हाल ही में, बेंगलुरु स्थित स्पेस-टेक कंपनी पिक्सेल (Pixxel) ने भारत के ₹1,200 करोड़ के राष्ट्रीय पृथ्वी अवलोकन (EO) तारामंडल के निर्माण हेतु भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के साथ औपचारिक समझौता किया है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) ढांचे के अंतर्गत निष्पादित की जाएगी।
  • ऐसा पहली बार होगा जब कोई निजी कंसोर्टियम (संघ) भारत के लिए राष्ट्रीय पृथ्वी अवलोकन उपग्रह प्रणाली का स्वामित्व और संचालन करेगा।
    • पृथ्वी अवलोकन (EO) तारामंडल विशिष्ट कक्षाओं में स्थापित उपग्रहों का एक समन्वित समूह है, जो पृथ्वी की सतह, महासागरों और वायुमंडल की निरंतर निगरानी करता है तथा वैज्ञानिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और सुरक्षा उद्देश्यों के लिए डेटा एकत्र करता है।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं

  • पिक्सेल चार भारतीय अंतरिक्ष कंपनियों के एक संघ का नेतृत्व करेगा।
    • इस संघ में ध्रुव स्पेस, पियरसाइट (PierSight) और सैट्योर (Satsure) शामिल हैं।
  • यह संघ उपग्रह तारामंडल का डिजाइन, निर्माण, स्वामित्व और संचालन करेगा।
  • इस तारामंडल को पांच वर्ष की अवधि में तैनात किया जाएगा।
  • इस कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 12 उपग्रह प्रक्षेपित किए जाएंगे।

उपग्रह की क्षमताएं

  • तारामंडल में बहुत उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले ऑप्टिकल इमेजिंग उपग्रह शामिल होंगे।
  • भूमि और वनस्पतियों के विश्लेषण के लिए मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग की सुविधा होगी।
  • सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) उपग्रह सभी प्रकार के मौसम और रात के समय अवलोकन करने में सक्षम होंगे।
  • ये उपग्रह सतह और वायुमंडलीय विशेषताओं का विस्तृत पता लगाने में सहायक होंगे।

कंसोर्टियम की संरचना

  • पिक्सेल उन्नत इमेजिंग उपग्रह प्रौद्योगिकी और समग्र कार्यक्रम नेतृत्व प्रदान करेगा।
  • ध्रुव स्पेस उपग्रह हार्डवेयर और मिशन सहायता क्षमताओं का योगदान देगा।
  • पियरसाइट समुद्री-केंद्रित अवलोकन और संचालन में सहायता करेगा।
  • सैट्योर डेटा विश्लेषण और मूल्य-वर्धित खुफिया सेवाएं प्रदान करेगा।

NPS निवेश ढांचे के आधुनिकीकरण हेतु SAARG समिति

संदर्भ: हाल ही में, पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के अंतर्गत निवेश ढांचे की समीक्षा, अनुशंसा और आधुनिकीकरण के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति, ‘स्ट्रैटेजिक एसेट एलोकेशन एंड रिस्क गवर्नेंस’ (SAARG) का गठन किया।

अन्य संबंधित जानकारी

  • SAARG समिति में नौ सदस्य शामिल हैं, जिनमें पूंजी बाजार, परिसंपत्ति प्रबंधन  और प्रतिभूति कानून के विशेषज्ञ शामिल हैं।
  • इस समिति की अध्यक्षता मॉर्गन स्टेनली इंडिया के पूर्व राष्ट्राध्यक्ष और सीईओ, नारायण रामचंद्रन कर रहे हैं।
  • समय सीमा: समिति को अपने गठन की तिथि से नौ महीने के भीतर PFRDA को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करनी होंगी।

SAARG का अधिदेश और कार्यक्षेत्र

  • समिति सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्रों में मौजूदा NPS निवेश दिशानिर्देशों की समीक्षा करेगी।
  • यह भारत के पेंशन निवेश ढांचे की तुलना विश्व के अग्रणी वैश्विक पेंशन प्रणालियों के साथ करेगी।
  • दीर्घकालिक सेवानिवृत्ति उद्देश्यों के लिए रणनीतिक परिसंपत्ति आवंटन ढांचे का परीक्षण किया जाएगा।
  • निवेश में विविधीकरण लाने के लिए नई परिसंपत्ति श्रेणियों को शामिल करने की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा।
  • यह पेंशन निधियों के लिए प्रदर्शन मापन और जवाबदेही तंत्र की समीक्षा करेगी।
  • समिति सुदृढ़ जोखिम प्रबंधन और परिसंपत्ति देयता प्रबंधन पद्धतियों की अनुशंसा करेगी।

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS)

  • NPS भारत में सरकार समर्थित, बाजार से जुड़ी एक सेवानिवृत्ति बचत योजना है, जिसे व्यक्तियों को उनके सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन हेतु एक कोष (Corpus) बनाने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • यह PFRDA द्वारा विनियमित है। यह 18 से 70 वर्ष की आयु के भारतीय नागरिकों के लिए उपलब्ध एक कम-लागत की पोर्टेबल और पारदर्शी प्रणाली है।

16वाँ राष्ट्रीय मतदाता दिवस

संदर्भ: भारत ने 25 जनवरी 2026 को 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया।

राष्ट्रीय मतदाता दिवस के बारे में

  • 2026 का विषय: “मेरा भारत, मेरा वोट”, जिसका ध्‍येय वाक्य है—”भारतीय लोकतंत्र के केंद्र में नागरिक”।
  • यह दिवस लोकतंत्र का उत्सव मनाता है और प्रत्येक नागरिक को चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए सशक्त बनाता है।
  • यह दिन भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के स्थापना दिवस का प्रतीक है, जिसकी स्थापना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत 25 जनवरी 1950 को की गई थी।
  • 61वें संविधान संशोधन (1989) के माध्यम से मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई थी।
  • ‘मतदान का अधिकार’ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 62 द्वारा प्रदान किया गया एक सांविधिक अधिकार है, किंतु मतदान की स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के अंतर्गत ‘अभिव्यक्ति के अधिकार’ का ही एक रूप है।

भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) के बारे में

  • भारत का निर्वाचन आयोग विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनावों के नियंत्रण, निर्देशन और संचालन के लिए उत्तरदायी एक प्रमुख संवैधानिक निकाय है।
  • 1950 में स्थापित यह आयोग भारत में लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के लिए चुनाव आयोजित करता है।
  • स्वतंत्र भारत में प्रथम आम चुनाव वर्ष 1951-1952 में आयोजित किए गए थे।

द्वितीय वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन

संदर्भ: अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC) ने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से नई दिल्ली के भारत मंडपम में द्वितीय वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन का आयोजन किया।

अन्य संबंधित जानकारी

  • इस शिखर सम्मेलन का विषय “सामूहिक प्रज्ञा, एकजुट स्वर और पारस्परिक सह-अस्तित्व” था।
  • इस विषय का उद्देश्य सामाजिक समरसता को पोषित करने और रचनात्मक अंतर्राष्ट्रीय जुड़ाव को बढ़ावा देने में बौद्ध दर्शन की प्रासंगिकता को सुदृढ़ करना है।
  • वियतनाम, म्यांमार, कंबोडिया, थाईलैंड, भूटान, जापान, नेपाल और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने चर्चाओं में भाग लिया।
  • सम्मेलन में इस बात का परीक्षण किया गया कि किस प्रकार बुद्ध धम्म के मूल मूल्य तीव्र तकनीकी परिवर्तन, उपभोक्तावाद और पर्यावरणीय क्षरण के बीच नैतिक नेतृत्व, सामाजिक सद्भाव और सतत जीवन का मार्गदर्शन कर सकते हैं।
  • चर्चाओं के अतिरिक्त, शिखर सम्मेलन में ‘पवित्र अवशेष’, ‘समकालीन भारत में सांस्कृतिक जुड़ाव’ और ‘विरासत से विश्व: भारत का बुद्ध धम्म आउटरीच’ पर प्रदर्शनियाँ भी आयोजित की गईं।
  • शिखर सम्मेलन का एक मुख्य आकर्षण NORBU (न्यूरल ऑपरेटर फॉर रिस्पोंसिबल सिबल बुद्धिस्ट अंडरस्टेंडिंग) का सजीव प्रदर्शन था। यह चैटजीपीटी (ChatGPT) एल्गोरिदम पर आधारित एक ‘लैंग्वेज लर्निंग मॉडल’ है, जिसे बौद्ध ग्रंथों पर प्रशिक्षित किया गया है।
    • IBC द्वारा इसे वैश्विक संरक्षक के रूप में अपनाया गया है और इसे “आध्यात्मिक मित्र” नाम दिया गया है। इसका उद्देश्य तकनीक-प्रेमी युवाओं को कई भाषाओं में बौद्ध शिक्षाओं से जोड़ना है।
  • प्रथम शिखर सम्मेलन 20-21 अप्रैल 2023 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ था। इसमें 31 देशों के 170 से अधिक प्रतिनिधियों ने “समकालीन चुनौतियों के प्रति प्रतिक्रिया: दर्शन से व्यवहार तक” विषय के तहत भाग लिया था।

अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC) के बारे में

  • अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC) एक वैश्विक बौद्ध छत्र संगठन है, जिसका मुख्यालय भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में नई दिल्ली में स्थित है।
  • वर्ष 2011 में सर्वोच्च बौद्ध धार्मिक पदानुक्रम के संरक्षण में स्थापित इस संगठन की वैश्विक सदस्यता में 300 से अधिक मठवासी और नागरिक संगठन शामिल हैं।

माताबारी पर्यटन सर्किट

संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास और संचार मंत्री ने त्रिपुरा के डम्बूर झील स्थित नारकेल कुंज में ₹450 करोड़ की लागत के साथ ‘माताबारी पर्यटन सर्किट’ की आधारशिला रखी।

अन्य संबंधित जानकारी

  • इस परियोजना में फ्लोटिंग जेटी (तैरते हुए घाट), इको फ्रेंडली रिसॉर्ट्स, आधुनिक पर्यटक सुविधाएं और स्थानीय संस्कृति से जुड़ी गहन अनुभूतियां शामिल होंगी, जो डम्बूर क्षेत्र को एक विशिष्ट अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन पहचान प्रदान करेंगी।
  • नए पर्यटन सर्किट से पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने, बेहतर सुविधाओं और उन्नत कनेक्टिविटी की अपेक्षा है, जिसका लाभ तीर्थयात्रियों और प्रकृति प्रेमियों दोनों को होगा।

माताबारी मंदिर के बारे में

  • देवी त्रिपुरा सुंदरी को समर्पित माताबारी मंदिर, भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है और प्रतिवर्ष यहाँ हजारों भक्तगण आते हैं।
  • देवी त्रिपुरा सुंदरी, भगवान शिव की अर्धांगिनी देवी पार्वती का ही अवतार हैं।
  • इस मंदिर का निर्माण महाराजा धन्य माणिक्य द्वारा 1501 ईस्वी में करवाया गया था।
  • मंदिर में एक वर्गाकार गर्भगृह है, जिसे बंगाल की विशिष्ट ग्रामीण झोपड़ी के मॉडल पर तैयार किया गया है।
  • इस मंदिर को ‘कूर्म पीठ’ के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसका आधार एक कछुए (कूर्म) के कूबड़ के समान है, जो स्थिरता और धैर्य का प्रतीक है।
  • गर्भगृह के भीतर दो मूर्तियाँ हैं:
    • देवी त्रिपुरा सुंदरी की पांच फीट ऊँची प्रतिमा, जिनकी पूजा अधिष्ठात्री माता के रूप में की जाती है।
    • एक छोटी मूर्ति, जिन्हें ‘छोटी माँ’ (देवी चंडी) कहा जाता है। त्रिपुरा के राजा शिकार अभियानों और युद्ध के मैदानों में इन्हें अपने साथ ले जाते थे।
  • यह मंदिर ‘माताबारी पेड़ा’ (प्रसाद के रूप में दी जाने वाली मिठाई) से जुड़ा है, जिसे हाल ही में भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्राप्त हुआ है।

बैक्ट्रियन ऊँट

संदर्भ: लद्दाख के शीत मरुस्थल के दो बैक्ट्रियन ऊँटों ने गणतंत्र दिवस परेड में ‘पशु सैन्य दस्ते’ के हिस्से के रूप में अपनी ऐतिहासिक उपस्थिति दर्ज की।

अन्य संबंधित जानकारी

  • उन्होंने जांस्कर पोनी और सेना के कुत्तों के साथ पशु सैन्य दस्ते के रूप में मार्च किया।
  • इस दल में दो बैक्ट्रियन ऊँट और चार जांस्कर पोनी शामिल थे, जो भारतीय सेना के परिचालन इकोसिस्टम की परंपरा, लचीलेपन और आत्मनिर्भरता के मिश्रित रूप का प्रतीक हैं।
  • बैक्ट्रियन ऊँटों को स्थानीय रूप से मुंदरी ऊँट भी कहा जाता है, जो लद्दाख के उच्च तुंगता वाले शीत मरुस्थलों का मूल निवासी है।
  • भारत में इन दुर्लभ ऊँटों की आबादी लगभग 365 है, जो मुख्य रूप से नुब्रा घाटी में पाए जाते हैं।
  • ये ऊँट शून्य से -30°C तक के अत्यधिक कम तापमान, विरल हवा, तीव्र पराबैंगनी (UV) विकिरण और विरल वनस्पतियों वाली परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए विशिष्ट रूप से अनुकूलित हैं। ये ऐसी स्थितियाँ हैं जहाँ अधिकांश मशीनें खराब हो जाती हैं।

बैक्ट्रियन ऊँट (कैमेलस बैक्ट्रियनस )

  • कैमेलस बैक्ट्रियनस  दो कूबड़ वाली ऊँट प्रजाति है जो शीत शुष्क और उच्च तुंगता वाले वातावरण के अनुकूल है।
  • इस प्रजाति का नाम मध्य एशिया में हिंदूकुश पर्वत के निकट स्थित एक प्राचीन क्षेत्र बैक्ट्रिया से लिया गया है।
  • बैक्ट्रियन ऊँट मुख्य रूप से मंगोलिया, चीन, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान जैसे मध्य एशियाई देशों में पाए जाते हैं।
  • इनकी छोटी आबादी अफगानिस्तान, ईरान, तुर्की, पाकिस्तान और भारत में भी पायी जाती है।
  • भारत में यह प्रजाति केवल लद्दाख के शीत मरुस्थलीय क्षेत्र में पाई जाती है।
  • IUCN ने 1998 से जंगली बैक्ट्रियन ऊँटों को गंभीर रूप से संकटग्रस्तश्रेणी के रूप में वर्गीकृत किया है।

आवास और अनुकूलन

  • यह प्रजाति पथरीले पहाड़ों, शीत मरुस्थलों, रेत के टीलों और कंकड़युक्त मैदानों में निवास करती है।
  • यह सर्दियों में -40°C से लेकर गर्मियों में 40°C तक के चरम तापमान के लिए अनुकूलित है।
  • बैक्ट्रियन ऊँट बहुत सीमित जल और विरल वनस्पतियों के साथ जीवित रह सकते हैं।
  • सर्दियों के दौरान ये बर्फ खाकर अपनी जल संबंधी आवश्यकता के एक हिस्से को पूरा कर सकते हैं।
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