तिरुवल्लुवर दिवस

संदर्भ: तिरुवल्लुवर दिवस पर प्रधानमंत्री ने संत तिरुवल्लुवर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी साहित्यिक कृतियों और नैतिक शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर चर्चा की जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी सामाज का मार्गदर्शन कर रही हैं।

तिरुवल्लुवर दिवस के बारे में:

  • यह सामान्यतः तमिल माह ‘थाई’ (Thai) के दूसरे दिन मनाया जाता है और इसका आयोजन पोंगल के फसल कटाई उत्सव के साथ होता है।
  • वर्ष 2026 में, तिरुवल्लुवर दिवस 16 जनवरी को मनाया गया।
  • तिरुवल्लुवर दिवस भारतीय राज्य तमिलनाडु में महान तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर को समर्पित एक वार्षिक उत्सव है।
  • यह दिन साहित्य और नैतिकता में तिरुवल्लुवर के योगदान के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। उनकी कृति, ‘तिरुक्कुरल’ में 1,330 दोहे (कुरल) हैं, जो तीन खंडों में विभाजित हैं: धर्म (अरम), अर्थ (पोरुल) और काम (इन्बम)।
  • पहली बार यह दिवस मई 1935 में मनाया गया था और 1960 के दशक में तमिलनाडु सरकार ने इसे पोंगल उत्सव के साथ संरेखित करने के लिए ‘थाई’ महीने के दूसरे दिन (जनवरी) मनाने की घोषणा की।

संत तिरुवल्लुवर के बारे में:

  • तिरुवल्लुवर का जन्म पांड्यों की राजधानी मदुरै में हुआ था।
  • उन्हें ब्रह्मा का अवतार माना जाता है।
  • विश्व की अनेक भाषाओं में अनूदित होने वाले वे प्रमुख तमिल कवि हैं; उनकी रचनाओं की व्यापकता को देखते हुए जी.यू. पोप ने उन्हें ‘वैश्विक मानवता के चारण’ के रूप में संबोधित किया है।
  • उनका कालखंड तमिल शास्त्रीय संस्कृति के संगम युग के दौरान था।
  • द्रविड़ समूह भी उन्हें एक संत मानते हैं, क्योंकि उन्होंने जाति व्यवस्था को नकार दिया था।

अरावली परिदृश्य के पारिस्थितिकी-पुनर्स्थापन” पर राष्ट्रीय सम्मेलन

संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री ने नई दिल्ली में “अरावली परिदृश्य का पारिस्थितिकी-पुनर्स्थापन: अरावली ग्रीन वॉल को मजबूत बनाना” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • इस राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन सांकला फाउंडेशन द्वारा राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन नीति को जमीनी पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन से जोड़ने और अरावली श्रेणी के बढ़ते क्षरण को संबोधित करने के लिए किया गया था।
  • केन्द्रीय मंत्री ने सांकला फाउंडेशन की रिपोर्ट जारी की जिसका शीर्षक “अरावली परिदृश्य का पारिस्थितिकी-पुनर्स्थापन”  है।
  • यह सम्मेलन ‘ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट’ के तहत राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रगति, वैज्ञानिक और नीतिगत ढांचे को समुदाय के नेतृत्व वाले पुनर्स्थापन अभ्यासों के साथ एकीकृत करने और प्राथमिकता वाले कार्यों पर आम सहमति बनाने पर केंद्रित है।
  • ग्रीन वॉल पहल के तहत, 6.45 मिलियन हेक्टेयर क्षरित अरावली भूमि की पहचान की गई है, जिसमें गुजरात, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में 2.7 मिलियन हेक्टेयर पर हरित क्षेत्र विकसित करना शुरू कर दिया गया है।
  • 29 अरावली जिलों के प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) शुष्क और अर्ध-शुष्क परिस्थितियों के अनुकूल स्थानीय प्रजातियों का उपयोग करके परियोजना को लागू कर रहे हैं।

अरावली पर्वतमाला के बारे में:

  • अरावली पर्वतमाला विश्व की सबसे पुरानी भूगर्भीय संरचनाओं में से एक है, जिसका निर्माण 2.5 बिलियन वर्ष से भी पहले प्रोटेरोज़ोइक युग के दौरान हुआ था और यह पृथ्वी पर सबसे पुरानी वलित पर्वत प्रणालियों में से एक है।
  • यह दिल्ली से हरियाणा और राजस्थान होते हुए गुजरात तक लगभग 670–800 किमी. में फैली हुई है जिस कारण यह भारत की सबसे लंबी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है।
  • यह श्रेणी एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक अवरोध के रूप में कार्य करती है, जो थार मरुस्थल के पूर्व की ओर उपजाऊ सिंधु-गंगा के मैदानों में विस्तार को रोकती है।

6वीं आसियान-भारत डिजिटल मंत्रियों की बैठक

संदर्भ: हाल ही में, छठी आसियान-भारत डिजिटल मंत्रियों (ADGMIN) की बैठक का वर्चुअल आयोजन किया गया, जिसमें डिजिटल सहयोग को बढ़ाने के लिए आसियान और भारत ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • बैठक में डिजिटल परिवर्तन को आगे बढ़ाने पर ‘आसियान-भारत संयुक्त वक्तव्य’ को अपनाया गया।
  • बैठक में एक विशेष ‘डिजिटल भविष्य के लिए आसियान-भारत कोष’ के संचालन का भी स्वागत किया गया।
  • बैठक में आसियान-भारत 2025 डिजिटल कार्य योजना के तहत प्रगति की समीक्षा की गई और निम्नलिखित पर केंद्रित 2026 कार्य योजना को अपनाया गया:
    • आईसीटी (ICT) प्रशिक्षण/क्षमता निर्माण कार्यक्रम
    • भारत-आसियान नियामक सम्मेलन
    • टेलीकॉम आईसीटी समाधानों की तैनाती।

ADGMIN के बारे में:

  • ADGMIN 11 आसियान सदस्य देशों के दूरसंचार और डिजिटल मंत्रियों का एक वार्षिक मंच है।
  • सदस्य देश ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, तिमोर लेस्ते और वियतनाम हैं, साथ ही आसियान के संवाद भागीदार भी शामिल हैं, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चीन, यूरोपीय संघ, भारत, जापान, कोरिया गणराज्य, न्यूजीलैंड, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं।
  • बैठक में क्षेत्रीय डिजिटल सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया, जिसमें डिजिटल समावेशन और एकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया।

सांख्यिकी में सुखात्मे राष्ट्रीय पुरस्कार – 2026

संदर्भ: हाल ही में, राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल के माध्यम से सांख्यिकी में सुखात्मे राष्ट्रीय पुरस्कार – 2026 के लिए ऑनलाइन नामांकन आमंत्रित किए गए हैं।

सांख्यिकी में सुखात्मे राष्ट्रीय पुरस्कार के बारे में:

  • इसकी शुरुआत सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा आधिकारिक सांख्यिकी की प्रणाली में सुधार के लिए व्यक्तियों द्वारा किए गए असाधारण/उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देने के लिए की गई है।
  • यह पुरस्कार 29 जून 2026 को सांख्यिकी दिवस समारोह के दौरान प्रदान किया जाएगा।
  • यह प्रसिद्ध सांख्यिकीविद् प्रो. पी.वी. सुखात्मे की स्मृति में सांख्यिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान और विशिष्ट सेवा तथा कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में इसके अनुप्रयोग के लिए प्रदान किया जाता है।
  • यह पुरस्कार वैकल्पिक वर्षों में वरिष्ठ भारतीय सांख्यिकीविदों को सांख्यिकी के क्षेत्र में उनके जीवनकाल में दिए गए योगदान और उपलब्धियों के लिए दिया जाता है।
  • यह प्रतिष्ठित पुरस्कार वर्ष 2000 से वैकल्पिक वर्षों में 45 वर्ष और उससे अधिक आयु के प्रतिष्ठित भारतीय सांख्यिकीविदों को प्रदान किया जाता है।

पांडुरंग वासुदेव सुखात्मे (1911–1997):

  • वे एक प्रतिष्ठित भारतीय सांख्यिकीविद् थे जो कृषि सांख्यिकी और मानव पोषण में अपने अग्रणी योगदान के लिए जाने जाते थे।
  • उन्होंने सुखात्मे-मार्जेन परिकल्पना विकसित की, जिसमें प्रस्तावित किया गया था कि मानव शरीर में ऊर्जा दक्षता अंतर्ग्रहण स्तरों के आधार पर भिन्न होती है और कैलोरी की आवश्यकताएं निश्चित नहीं होती हैं बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए भिन्न-भिन्न होती हैं।

जल्लीकट्टू उत्सव

संदर्भ: हाल ही में, तमिलनाडु सरकार ने पारंपरिक पोंगल उत्सव के अवसर पर जल्लीकट्टू की मेजबानी की।

जल्लीकट्टू उत्सव के बारे में:

  • जल्लीकट्टू (जिसे सल्लिकट्टू के नाम से भी जाना जाता है) पोंगल के दौरान आयोजित किया जाने वाला एक पारंपरिक तमिल बैल-वश (bull-taming) खेल है, जो तमिल संस्कृति, वीरता और मानव-पशु बंधन का प्रतीक है।
  • “जल्लीकट्टू” शब्द तमिल शब्दों “सल्ली” (सिक्के) और “कट्टू” (बंधा हुआ) से मिलकर बना है, जो बैल के सींगों से बंधी पुरस्कार राशि को संदर्भित करता है, जिसे प्रतिभागी प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
  • इसमें दौड़ते हुए बैल के कूबड़  को पकड़ना और उसे नुकसान पहुँचाए बिना उसे थामे रखना होता है।
  • इसकी विभिन्न शैलियाँ हैं, जैसे वाडी मंजुविराट्टु (बाड़े से मुक्त किया गया बैल), वेलिवेट्टाई (खुले मैदान में मुक्त किया गया बैल), और वट्टम मंजुविराट्टु (रस्सी से बंधा हुआ बैल)।
  • इस खेल के लिए पुलिकुलम या कंगयम नस्ल के बैलों का उपयोग किया जाता है।
  • जल्लीकट्टू प्रीमियर लीग का गठन 2018 में तमिलनाडु जल्लीकट्टू पेरवई और चेन्नई जल्लीकट्टू अमाइप्पु द्वारा किया गया था।
  • 2014 में, सर्वोच्च न्यायालय ने पेटा (PETA) जैसे समूहों द्वारा उठाए गए पशु क्रूरता संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन 2016 में पशु और प्रतिभागी की सुरक्षा के उपायों के साथ प्रतिबंध हटा लिया गया था।
  • व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद, तमिलनाडु ने जल्लीकट्टू को एक सांस्कृतिक अभ्यास के रूप में मान्यता देने और क्रूरता को कम करने के लिए इसे विनियमित करने हेतु ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960’ में संशोधन किया।
  • 2023 में, सर्वोच्च न्यायालय की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने तमिलनाडु के संशोधन और महाराष्ट्र तथा कर्नाटक के इसी तरह के कानूनों को बरकरार रखा, यह देखते हुए कि नियमों ने जानवरों के प्रति पीड़ा और क्रूरता को काफी हद तक कम कर दिया है, जिससे खेल को जारी रखने की अनुमति मिली।
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