व्हीकलटूव्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन

संदर्भ: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने रियल-टाइम में टक्कर की चेतावनी जारी करने और उन्नत सड़क सुरक्षा तकनीकों के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए वाहनों में व्हीकल-टू-व्हीकल कम्युनिकेशन को अनिवार्य रूप से लगाने की योजना की घोषणा की है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • इस निर्णय पर नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित परिवहन विकास परिषद की बैठक के दौरान चर्चा की गई।
  • वाहनों को एक ऑन-बोर्ड यूनिट से लैस किया जाएगा जो आस-पास के वाहनों के साथ प्रत्यक्ष संचार को सक्षम बनाएगा।
  • जब यह सिस्टम आगे अचानक लगने वाले ब्रेक या खड़े वाहन का पता लगाएगा, तो यह रियल-टाइम में टक्कर की चेतावनी भेजेगा।
  • इस तकनीक से कम दृश्यता होने, कोहरे या सड़क किनारे खड़े वाहनों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में भारी कमी आने की उम्मीद है।
  • इस उपकरण की अनुमानित लागत प्रति वाहन ₹5,000 से ₹7,000 तक होगी।
  • शुरुआत में यह अधिदेश नए वाहनों पर लागू होगा, जिसमें बाद में पुराने वाहनों में इन उपकरणों को लगाने (रिट्रोफिटिंग) का प्रावधान होगा।
  • ये उपाय सड़क सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र के कार्रवाई के दशक (2021-2030) और 2030 तक सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों को 50% तक कम करने की राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के अनुरूप है।

व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी

  • व्हीकल-टू-व्हीकल कम्युनिकेशन के जरिये वाहनों की गति, स्थान, त्वरण और ब्रेकिंग स्थिति की जानकारी साझा की जा सकती है।
  • यह वायरलेस ऑन-बोर्ड यूनिट के माध्यम से संचालित होता है जो 360-डिग्री स्थितिजन्य जागरूकता प्रदान करता है।
  • यह प्रणाली ड्राइवरों को उन संभावित खतरों के प्रति भी सचेत करती है जो सीधे नहीं दिखाई देते।
  • यह कम दृश्यता की स्थितियों जैसे कि कोहरा, भारी बारिश या रात में ड्राइविंग के दौरान सुरक्षा बढ़ाता है।
  • V2V टेक्नोलॉजी सहकारी ड्राइविंग को बढ़ावा देती है और भविष्य इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम का समर्थन करती है।
  • यह विश्व भर में परस्पर जुड़े हुए (कनेक्टेड) और स्वायत्त वाहन इकोसिस्टम का एक प्रमुख घटक है।

वित्त वर्ष 2025–26 में भारत की वृद्धि दर 7.2% रहने का अनुमान

संदर्भ: संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (UNDESA) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह अनुमान UNDESA द्वारा प्रकाशित विश्व आर्थिक स्थिति और संभावनाएं रिपोर्ट, 2026 का भाग है।
  • यह अनुमान भारत सरकार द्वारा 2025-26 के लिए लगाए गए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के इसके पहले अग्रिम अनुमानों में अनुमानित 7.4 प्रतिशत की वृद्धि से थोड़ा कम है।
  • राजकोषीय वर्ष के आधार पर, विकास दर 2026-27 में 6.6 प्रतिशत और 2027-28 में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
  • अन्य प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की विकास दर लचीली बने रहने की उम्मीद है।

अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के प्रभाव

  • यदि उच्च अमेरिकी टैरिफ 2026 के बाद भी ऐसी ही बने रहते हैं, तो वे भारत के निर्यात प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।
  • भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत है।
  • टैरिफ बाधाओं के कारण कुछ निर्यात श्रेणियों को दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन जैसे प्रमुख निर्यात उत्पादों को अमेरिकी टैरिफ से छूट मिलने की संभावना है।
  • यूरोप और मध्य-पूर्व की उच्च मांग के कारण टैरिफ से होने वाले नुकसान की आंशिक क्षतिपूर्ति होने का अनुमान है।

भारत के लिए महत्त्व

  • यह रिपोर्ट वैश्विक विकास के इंजन के रूप में भारत की स्थिति को और सुदृढ़ करती है।
  • यह बाहरी झटकों के प्रभाव को कम करने में घरेलू मांग आधारित विकास के महत्व पर प्रकाश डालती है।
  • यह मध्यम अवधि के आर्थिक विस्तार को बनाए रखने में सार्वजनिक निवेश की भूमिका को रेखांकित करती है।

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (UNDESA)  के बारे में

  • UNDESA की स्थापना 1948 में हुई थी और यह संयुक्त राष्ट्र सचिवालय के भीतर विकास पर केंद्रित प्राथमिक निकाय है, जो संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक, सामाजिक और सतत विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
  • इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में है।
  • यह 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के लिए सचिवालय के रूप में कार्य करता है और वैश्विक नीतिगत ढांचे तथा राष्ट्रीय स्तर के कार्यान्वयन के बीच एक प्रमुख सेतु के रूप में कार्य करता है।

प्रवासी भारतीय दिवस 2026

संदर्भ: प्रधानमंत्री ने 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस के अवसर पर वैश्विक भारतीय समुदाय को शुभकामनाएं दीं।

अन्य संबंधित जानकारी

  • प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रवासी भारतीय समुदाय भारत और शेष विश्व के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में कार्य करता है।
  • उन्होंने उल्लेख किया कि प्रवासी भारतीयों ने अपनी भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जुड़े रहकर उन समाजों को समृद्ध किया है जहाँ वे रहते हैं।
  • उन्होंने प्रवासी समुदाय का राष्ट्रदूत के रूप में उल्लेख किया, जिन्होंने विश्व स्तर पर भारतीय संस्कृति को पहुँचाया और लोकप्रिय बनाया है।
  • उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत सरकार ने प्रवासी समुदाय को देश के और करीब लाने के लिए प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार जैसी कई पहलें शुरु की हैं।

प्रवासी भारतीय दिवस

  • यह 1915 में 9जनवरी अर्थात उस दिन का स्मरण कराता है जब राष्ट्रपिता और सबसे महान ‘प्रवासी’, महात्मा गांधी जी, देश के स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व करने के लिए दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे।
  • इसकी स्थापना पहली बार 2003 में विदेशी भारतीय समुदाय को मान्यता देने और उनके साथ जुड़ने के लिए की गई थी।
  • 2003 से, इसे विदेश मंत्रालय के एक प्रमुख (flagship) कार्यक्रम के रूप में प्रत्येक दो वर्ष में एक बार मनाया जाता है।
  • प्रवासी भारतीय दिवस (PBD) के प्राथमिक लक्ष्य निम्नलिखित हैं:
  • भारत के विकास में भारतीय प्रवासी समुदाय के योगदान को याद करना।
  • भारत के हितों का समर्थन करना और विश्व भर में स्थानीय भारतीय समुदायों के कल्याण के लिए कार्य करना।
  • प्रवासी भारतीयों को सरकार और अपनी पैतृक भूमि के लोगों के साथ जुड़ने के लिए एक मंच प्रदान करना।

सरकार ने उर्वरक सुरक्षा में वृद्धि की

संदर्भ: हाल ही में, भारत सरकार ने देश की कुल उर्वरक आवश्यकता का लगभग 73 प्रतिशत घरेलू उत्पादन के माध्यम से पूरा करने की घोषणा की।

अन्य संबंधित जानकारी

  • सरकार ने कहा कि उच्च घरेलू उत्पादन के कारण उर्वरक आयात पर निर्भरता में काफी कमी आई है।
  • इस बात पर प्रकाश डाला गया कि उर्वरक सुरक्षा और किसानों के लिए समय पर उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करना एक प्रमुख नीतिगत प्राथमिकता बनी हुई है।
  • सरकार ने वैश्विक आपूर्ति जोखिमों को कम करने के लिए कच्चा माल प्राप्त करने हेतु दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों का प्रयोग करने पर जोर दिया।
  • सरकार ने उल्लेख किया कि स्रोतों के रणनीतिक विविधीकरण  ने अंतरराष्ट्रीय बाजार के व्यवधानों से सुरक्षा प्रदान करने में मदद की है।

घरेलू उर्वरक उत्पादन में रुझान

  • पिछले पांच वर्षों में कुल उर्वरक उत्पादन में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है।
  • सरकार ने बताया कि उत्पादन 2021 के 433.29 लाख टन से बढ़कर 2022 में 467.87 लाख टन हो गया है।
  • इसने 2023 में 507.93 लाख टन की तीव्र वृद्धि पर प्रकाश डाला, जो देश की सशक्त विनिर्माण क्षमता को दर्शाता है।
  • यह दर्ज किया गया कि 2024 में उत्पादन 509.57 लाख टन हो गया और 2025 में 524.62 लाख टन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।
  • सरकार ने स्पष्ट किया कि ये आँकड़े यूरिया, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP), एनपीके नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम (NPKs) और सिंगल सुपर फॉस्फेट से संबंधित हैं।

कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए महत्त्व

  • सरकार ने कहा कि उच्च घरेलू उत्पादन से किसानों का आत्मविश्वास और आगतों की उपलब्धता बढ़ती है।
  • यह रेखांकित किया कि उर्वरक आत्मनिर्भरता स्थिर कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा में सहायक है।
  • सरकार ने किफायती उर्वरकों और सतत कृषि विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
  • यह निष्कर्ष निकाला गया कि उर्वरक सुरक्षा आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण और ग्रामीण आर्थिक स्थिरता का एक प्रमुख स्तंभ है।

प्रधानमंत्री द्वारा वाराणसी ‘टेंट सिटी’ का उद्घाटन, मानकों का उल्लंघन :राष्ट्रीय हरित अधिकरण

संदर्भ: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने कहा है कि 2023 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा के नदी तल पर बसाई गई ‘टेंट सिटी’ की स्थापना और संचालन पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन” करके किया गया था।

 अन्य संबंधित जानकारी

  • टेंट सिटी को वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) द्वारा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मोड में इस क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं का लाभ उठाने की दृष्टि से विकसित किया गया था और इसका उद्घाटन 13 जनवरी, 2023 को प्रधानमंत्री द्वारा किया गया था।
  • “शानदार आवास” (luxurious accommodation) सुविधाओं वाली इस परियोजना को वाराणसी में पर्यटकों की बढ़ती आमद, विशेष रूप से काशी विश्वनाथ धाम के उद्घाटन के बाद आने वाले पर्यटकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए विकसित किया गया था।
  • पर्यटक आसपास के विभिन्न घाटों से नावों के माध्यम से टेंट सिटी तक पहुँच सकते थे। इसे प्रतिवर्ष अक्टूबर से जून तक संचालित किया जाना था और मानसून के दौरान गंगा में जलस्तर बढ़ने पर तीन महीने के लिए हटा दिया जाना था।
  • एनजीटी (NGT) की प्रधान पीठ एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि टेंट सिटी कथित तौर पर नदी तल और नदी के जल को प्रदूषित कर रही थी और वनस्पतियों तथा जीवों को नुकसान पहुँचा रही थी।
  • आवेदक ने आरोप लगाया कि टेंट सिटी की स्थापना कछुआ वन्यजीव अभयारण्य” के स्थान पर की गई थी और इस अभयारण्य को 2020 में अवैध रूप से गैर-अधिसूचित कर दिया गया था, साथ ही टेंट सिटी का सीवेज सीधे नदी में छोड़ा गया था।
  • एनजीटी ने सरकारी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि भविष्य में, गंगा नदी (कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 के प्रावधानों और लागू पर्यावरणीय मानदंडों का उल्लंघन करते हुए, गंगा नदी या उसकी सहायक नदियों के तट पर ऐसी कोई टेंट सिटी स्थापित करने की अनुमति न दी जाए।

NGT के निर्णय के मुख्य बिंदु:

  • टेंट सिटी के उत्तरदाता संख्या 11 और 12 (दो निजी कंपनियां) की स्थापना और संचालन पर्यावरणीय मानदंडों और गंगा नदी (कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 के प्रावधानों का उल्लंघन करके किया गया था, जिसके लिए उन पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है, लेकिन अभी तक उसकी वसूली नहीं की गई है।
  • अक्टूबर 2023 में एनजीटी को सौंपी गई एक रिपोर्ट में, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के तहत यह पाया गया कि “टेंट सिटी परियोजना के विकास के लिए पूर्व-अनुमति का आवेदन परियोजना के 2022 में शुरू होने के बाद किया गया था।
  • एनजीटी के आदेश में यह भी कहा गया है कि चूंकि टेंट सिटी से संबंधित कछुआ अभयारण्य को गैर-अधिसूचित करने का मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, इसलिए हरित अदालत इस मुद्दे पर विचार करना “उचित नहीं समझती” है।
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