उत्तर कोरिया का हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण
संदर्भ: उत्तर कोरिया ने अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करने के संकल्प के साथ वर्ष 2026 का पहला बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण का सफल संचालन किया। यह परीक्षण एक हाइपरसोनिक मिसाइल का था।
अन्य संबंधित जानकारी
- इन मिसाइलों का प्रक्षेपण प्योंगयांग के र्योकपो जिले से किया गया। प्रक्षेपास्त्रों ने अपनी सटीक मारक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए देश के पूर्वी तट से दूर समुद्र में स्थित 1,000 किलोमीटर (621 मील) की दूरी पर स्थित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेदा।
- यह एक रॉकेट-चालित हथियार प्रणाली है जो एक निर्धारित धनुषाकार मार्ग (बैलिस्टिक प्रक्षेपवक्र) का अनुसरण करती है। इसका उपयोग एक या अधिक मारक हथियारों (वारहेड्स) को किसी निश्चित लक्ष्य तक सटीकता से पहुँचाने के लिए किया जाता है।
- उत्तर कोरिया ने इस मिसाइल परीक्षण का आधार ‘मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता और जटिल अंतरराष्ट्रीय परिवेश’ को बताया है।
- विश्लेषकों के अनुसार परीक्षण की गई मिसाइलें ह्वासोंग-11 (Hwasong-11) श्रृंखला की हैं। इन KN-23/24 वेरिएंट्स को हाल ही में अक्टूबर 2025 की परेड के दौरान उत्तर कोरिया की रणनीतिक ताकत के रूप में दिखाया गया था।
- हाइपरसोनिक हथियारों के सफल एकीकरण से उत्तर कोरिया अब किसी भी आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को नाकाम कर उसे भेदने में सक्षम हो जाएगा।
हाइपरसोनिक मिसाइल के बारे में
- हाइपरसोनिक गति: यह ध्वनि की गति से कम से कम पाँच गुना अधिक गति (जिसे मैक-5 कहा जाता है) को संदर्भित करती है, जो लगभग एक मील प्रति सेकंड होती है।
- गतिशीलता (Manoeuvrability): बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत, हाइपरसोनिक मिसाइलें उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती हैं।
- पेलोड: ये मिसाइलें पारंपरिक और परमाणु दोनों तरह के वारहेड ले जा सकती हैं।
- हाइपरसोनिक हथियारों के प्रकार:
- हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV): इन्हें एक शक्तिशाली रॉकेट द्वारा वायुमंडल की ऊपरी परतों तक प्रक्षेपित किया जाता है। वहाँ से अलग होने के बाद, ये इंजन के बिना ही अत्यधिक उच्च वेग के साथ ‘ग्लाइड’ करते हुए (तैरते हुए) अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं।
- हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल (HCM): ये मिसाइलें अपनी पूरी उड़ान के दौरान ‘एयर-ब्रीदिंग‘ इंजन (स्क्रैमजेट) का उपयोग करती हैं, जो लॉन्च के बाद लक्ष्य तक पहुँचने के लिए निरंतर ऊर्जा और गति प्रदान करते हैं।
विश्व ब्रेल दिवस
संदर्भ: लुई ब्रेल की जयंती के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष 4 जनवरी को विश्व ब्रेल दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य सुलभ संचार के माध्यम से दृष्टिबाधित और आंशिक रूप से दृष्टिहीन व्यक्तियों के सशक्तिकरण में ब्रेल के महत्व को रेखांकित करना है।
अन्य संबंधित जानकारी
- 2019 से विश्व स्तर पर मनाया जा रहा यह दिन शिक्षा और सूचना तक पहुँच सुनिश्चित करने में ब्रेल की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देता है, जिससे दृष्टिबाधित व्यक्तियों को समाज में पूर्ण भागीदारी के लिए सशक्त बनाया जा सके।
- यह दिवस सुलभ संचार को एक मौलिक मानवाधिकार के रूप में मान्यता प्रदान करता है, जो मानवीय गरिमा, स्वायत्तता और समानता सुनिश्चित करने के लिए अपरिहार्य है।
ब्रेल लिपि के बारे में

- ब्रेल एक स्पर्शनीय (tactile) लेखन पद्धति है, जिसमें छह बिंदुओं (six dots) के विशिष्ट विन्यास का उपयोग किया जाता है। यह प्रणाली न केवल अक्षरों और संख्याओं, बल्कि जटिल संगीत स्वरलिपियों, गणितीय सूत्रों और वैज्ञानिक प्रतीकों को भी पूर्ण सटीकता के साथ व्यक्त करने में सक्षम है।
- इस लिपि का नामकरण इसके महान आविष्कारक लुई ब्रेल के सम्मान में किया गया है, जिन्होंने 19वीं शताब्दी के फ्रांस में इस क्रांतिकारी पद्धति का सूत्रपात किया था।
- दृष्टिबाधित और अल्प-दृष्टि वाले व्यक्ति इस लिपि के माध्यम से उन सभी पुस्तकों और पत्रिकाओं का अध्ययन कर सकते हैं, जो सामान्यतः मुद्रित फोंट में उपलब्ध होती हैं। यह उन्हें सूचना के समान स्रोतों तक पहुँच प्रदान करता है।
- शिक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक समावेश सुनिश्चित करने के लिए ब्रेल एक अपरिहार्य माध्यम है। यह महत्व ‘दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन’ (UNCRPD) के अनुच्छेद 2 में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।
भारत में ब्रेल (Braille in India)
- भारत में ब्रेल लिपि की शुरुआत 1887 में हुई थी।
- वर्ष 1951 में ब्रेल को राष्ट्रीय स्तर पर ‘भारती ब्रेल‘ के रूप में मानकीकृत किया गया, जिसमें भारतीय भाषाओं के लिए समान कोड निर्धारित किए गए।
- भारत में ब्रेल को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD Act), 2016 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के माध्यम से एक सशक्त ‘अधिकार-आधारित ढांचे’ में एकीकृत किया गया है। अब इसे न केवल साक्षरता के एक अनिवार्य साधन के रूप में, बल्कि सार्वजनिक सुलभता के एक मानक मानदंड के रूप में भी स्थापित किया गया है।
- भारत सरकार ने दृष्टिबाधित व्यक्तियों के सशक्तिकरण के लिए एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया है। यह ढांचा समानता, गरिमा और सामाजिक न्याय के संवैधानिक मूल्यों पर आधारित है:
- कानूनी आधार: दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act)।
- शिक्षा और कौशल: इसमें शिक्षा, कल्याण, कौशल विकास और डिजिटल सुलभता को शामिल किया गया है।
आयुष निर्यात संवर्धन परिषद
संदर्भ: नई दिल्ली में 4 जनवरी 2026 को आयुष निर्यात संवर्धन परिषद (AYUSHEXCIL) का चतुर्थ स्थापना दिवस आयोजित किया गया। यह आयोजन वैश्विक बाजार में पारंपरिक चिकित्सा और ‘वेलनेस’ उत्पादों के निर्यात को गति देने की भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
अन्य संबंधित जानकारी
- परिषद ने क्षमता निर्माण, नियामक सुगमीकरण और वैश्विक स्तर पर B2B बैठकों, प्रदर्शनियों एवं संगोष्ठियों के माध्यम से आयुष उत्पादों के निर्यात विकास को नई गति प्रदान की है।
- भारत के आयुष निर्यात में 6.11% की सराहनीय वृद्धि देखी गई है, जो वित्त वर्ष 2023-24 के 649.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 688.89 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है। आयुष निर्यात संवर्धन परिषद की स्थापना के उपरांत निर्यात में आई यह क्रमिक वृद्धि, भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति वैश्विक विश्वास और बढ़ती माँग की पुष्टि करती है।
- अपने संचालन के पांचवें वर्ष में कदम रखते हुए, परिषद ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने और मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) की संभावनाओं का दोहन करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही, परिषद उत्पादों के गुणवत्ता प्रमाणीकरण और भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की वैश्विक विश्वसनीयता बढ़ाने के प्रति समर्पित है।
- यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत‘ और ‘मेक इन इंडिया‘ के विजन के साथ तालमेल बिठाते हुए वैश्विक आयुष एवं वेलनेस अर्थव्यवस्था में भारत की उभरती नेतृत्वकारी भूमिका को सशक्त रूप से प्रमाणित करती है।
आयुष निर्यात संवर्धन परिषद (AYUSHEXCIL) के बारे में
- यह भारत का वह शीर्ष नोडल निकाय है, जिसे विशेष रूप से पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के निर्यात संवर्धन और वैश्विक विस्तार के लिए समर्पित किया गया है।
- इसे 4 जनवरी 2022 को ‘धारा 8′ के तहत (गैर-लाभकारी) कंपनी के रूप में पंजीकृत किया गया था। तत्पश्चात, अप्रैल 2022 में गांधीनगर में आयोजित ‘ग्लोबल आयुष इन्वेस्टमेंट एंड इनोवेशन समिट‘ के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा इसका औपचारिक शुभारंभ किया गया।
- विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 31 जुलाई 2023 को एक अधिसूचना जारी कर इसे आयुष क्षेत्र के लिए नोडल निर्यात संवर्धन परिषद के रूप में आधिकारिक मान्यता प्रदान की।
- यह परिषद आयुष मंत्रालय के साथ गहन परामर्श और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सक्रिय सहयोग से अपनी गतिविधियों का संचालन करती है।
- यह परिषद आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी सहित समस्त भारतीय पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों से जुड़े उत्पादों और सेवाओं के निर्यात की निगरानी व नियमन करती है।
समुद्र प्रताप
संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय रक्षा मंत्री ने गोवा में गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) द्वारा निर्मित दो प्रदूषण नियंत्रण पोतों (PCV) की श्रृंखला के प्रथम पोत, भारतीय तटरक्षक जहाज (ICGS) ‘समुद्र प्रताप’ को राष्ट्र की सेवा में समर्पित (कमीशन) किया।
अन्य संबंधित जानकारी

- समुद्री प्रदूषण से निपटने की राष्ट्रीय क्षमताओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से, इस पोत का स्वदेशी डिजाइन और निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न किया गया है।
- यह पोत भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में तेल रिसाव, रासायनिक रिसाव और अन्य पर्यावरणीय आपात स्थितियों के विरुद्ध हमारी तैयारी और जवाबी कार्रवाई की क्षमता को प्रभावी ढंग से सुदृढ़ करता है।
- इस पोत का 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटक रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और ‘मेक इन इंडिया‘ संकल्प की सफलता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
- यह वर्तमान में भारतीय तटरक्षक बेड़े का सबसे बड़ा पोत है।
- इसे कोच्चि में तैनात किया जाएगा और यह कमांडर, तटरक्षक क्षेत्र (पश्चिम) के परिचालन नियंत्रण में रहेगा।
समुद्र प्रताप की प्रमुख विशेषताएँ
1. डिजाइन और आयाम:
- लंबाई और चौड़ाई: इसकी लंबाई 114.5 मीटर और चौड़ाई 16.5 मीटर है।
- विस्थापन (Displacement): यह 4,170 टन का भारी पोत है।
2. आयुध और सुरक्षा प्रणालियाँ:
- मुख्य हथियार: यह 30 मिमी CRN-91 गन से लैस है।
- सुरक्षा: इसमें दो 12.7 मिमी की स्टेबलाइज्ड रिमोट-कंट्रोल गन लगी हैं, जो उन्नत फायर कंट्रोल सिस्टम से जुड़ी हैं।
3. नेविगेशन और नियंत्रण:
- स्मार्ट प्रणालियाँ: इसमें स्वदेशी रूप से विकसित ‘इंटीग्रेटेड ब्रिज मैनेजमेंट सिस्टम’ और ‘इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम’ है।
- अग्रणी तकनीक: यह डायनेमिक पोजिशनिंग (DP-1) क्षमता से लैस भारतीय तटरक्षक बल का पहला पोत है।
4. अग्नि सुरक्षा क्षमताएँ:
- इसमें ‘ऑटोमेटेड पावर मैनेजमेंट सिस्टम’ और उच्च क्षमता वाला बाहरी अग्निशमन तंत्र है।
- इसे उन्नत अग्निशमन कार्यों के लिए FiFi-2 और FFV-2 प्रमाणन प्राप्त है।
5. प्रदूषण प्रतिक्रिया और पर्यावरण संरक्षण:
- निगरानी: तेल रिसाव का पता लगाने और उससे निपटने के लिए इसमें ‘ऑयल फिंगरप्रिंटिंग मशीन’ लगी है।
- रासायनिक सुरक्षा: यह ‘जाइरो-स्टेबलाइज्ड स्टैंडऑफ एक्टिव केमिकल डिटेक्टर’ से लैस है।
- प्रयोगशाला: इसमें जहाज पर ही प्रदूषण नियंत्रण प्रयोगशाला उपकरण मौजूद हैं।
चीनी नागरिकों के लिए नया ई-बिजनेस वीज़ा
संदर्भ: हाल ही में, भारत सरकार ने विशेष रूप से चीनी नागरिकों के लिए एक नई इलेक्ट्रॉनिक “प्रोडक्शन इन्वेस्टमेंट बिजनेस वीज़ा” श्रेणी e-B-4 वीज़ा लॉन्च की है।
अन्य संबंधित जानकारी
- इस कदम का उद्देश्य भारत के विनिर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों का समर्थन करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों और व्यावसायिक पेशेवरों के लिए यात्रा को सुगम बनाना है।
- बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने 1 जनवरी 2026 को e-B-4 वीज़ा नामक एक नई ई-बिजनेस वीज़ा उप-श्रेणी की शुरुआत की।
- इसकी पुष्टि दूतावास की वेबसाइट पर 5 जनवरी 2026 को प्रकाशित एक आधिकारिक एडवाइजरी के माध्यम से की गई।
- वीज़ा चीनी इंजीनियरों, व्यापार अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों को विशिष्ट उत्पादन-लिंक्ड गतिविधियों के लिए भारत की यात्रा करने की अनुमति देता है।
- e-B-4 वीज़ा के लिए आवेदन दूतावास में जाए बिना या वीज़ा एजेंटों को नियुक्त किए बिना पूरी तरह से ऑनलाइन जमा किए जा सकते हैं।
- वीज़ा के लिए अपेक्षित प्रोसेसिंग समय लगभग 45 से 50 दिन है।
- वीज़ा भारत में छह महीने तक रहने की अनुमति देता है।
- भारतीय मेजबान कंपनियों को उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली पर पंजीकरण करना आवश्यक है और निमंत्रण पत्र अपलोड करना आवश्यक है।
- इस पहल का उद्देश्य भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्रों में शामिल चीनी आपूर्तिकर्ताओं द्वारा सामना की जाने वाली देरी को दूर करना है।
e-B-4 वीज़ा
- यह एक विशेष ई-बिजनेस वीज़ा है जिसे उत्पादन और निवेश से जुड़ी गतिविधियों के लिए शुरू किया गया है।
- यह सामान्य वाणिज्यिक व्यस्तताओं के बजाय अल्पकालिक और उद्देश्य-विशिष्ट व्यावसायिक यात्रा के लिए है।
- वीज़ा का उपयोग उपकरणों की स्थापना और कमीशनिंग के लिए किया जा सकता है।
- इसमें गुणवत्ता जांच, आवश्यक रखरखाव और संयंत्र डिजाइन गतिविधियों को शामिल किया गया है।
- यह उत्पादन सेटअप, IT और ERP रैंप-अप तथा प्रशिक्षण उद्देश्यों के लिए यात्रा की अनुमति देता है।
- वीज़ा आपूर्ति श्रृंखला विकास, विक्रेता पैनल और संयंत्र लाने का भी समर्थन करता है।
- इसमें इन गतिविधियों से संबंधित वरिष्ठ प्रबंधन और कार्यकारी दौरे शामिल हैं।
- e-B-4 वीज़ा नियमित एक साल के ई-बिजनेस वीज़ा से अलग है और अनुपालन संबंधी समस्याओं से बचने के लिए अधिसूचित उद्देश्यों हेतु ही इसका उपयोग किया जाना चाहिए।
