वोडाफोन आइडिया के लिए समायोजित सकल राजस्व (AGR) राहत पैकेज

संदर्भ: वोडाफोन आइडिया के वित्तीय संकट को देखते हुए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कंपनी के समायोजित सकल राजस्व बकाये के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य दूरसंचार क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना और सरकार की हिस्सेदारी को सुरक्षित रखना है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 31 दिसंबर, 2025 को वोडाफोन आइडिया के लिए एक राहत पैकेज को मंजूरी दी, जिसके तहत 31 दिसंबर तक कंपनी के समायोजित सकल राजस्व (AGR) बकाये को ₹87,695 करोड़ पर फ्रीज (स्थिर) कर दिया गया है।
  • इस फ्रीज किए गए बकाये का भुगतान वित्त वर्ष 2031-32 से वित्त वर्ष 2040-41 तक दस साल की अवधि में किया जाएगा।
  • अंतिम भुगतान में सटीकता सुनिश्चित करने के लिए, दूरसंचार विभाग (DoT) 2020 के कटौती सत्यापन दिशानिर्देशों और ऑडिट रिपोर्टों के आधार पर फ्रीज किए गए बकाये का पुनर्मूल्यांकन करेगा। सरकार द्वारा नियुक्त एक समिति इस प्रक्रिया की निगरानी करेगी, और इसके निष्कर्ष दोनों पक्षों के लिए बाध्यकारी होंगे।
  • इस फैसले के तहत लगभग ₹18,000 करोड़ के भुगतान पर पाँच साल की राहत दी गई है, जिसे पहले 31 मार्च, 2026 तक चुकाया जाना था।
  • संशोधित भुगतान योजना के अनुसार, वित्त वर्ष 2017-18 और वित्त वर्ष 2018-19 से संबंधित बकाये का भुगतान अब वित्त वर्ष 2025-26 से वित्त वर्ष 2030-31 के बीच छह साल की अवधि में किया जाएगा।
  • यह राहत अक्टूबर और नवंबर 2025 में उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों के बाद दी गई है, जिसमें सरकार को सार्वजनिक हित में AGR बकाये पर पुनर्विचार करने की निर्देश दी गई थी।
  • अदालत ने “व्यापक जनहित” पर प्रकाश डालते हुए उल्लेख किया कि इस दूरसंचार कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी 49% है और इसके 20 करोड़ मोबाइल उपभोक्ताओं का कल्याण भी इससे जुड़ा है।

समायोजित सकल राजस्व (AGR)

  • समायोजित सकल राजस्व वह राजस्व आधार है जिसका उपयोग भारतीय दूरसंचार विभाग, टेलीकॉम ऑपरेटरों द्वारा देय लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (SUC) की गणना करने के लिए करता है।
  • भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में समायोजित सकल राजस्व (AGR) मुख्य रूप से दूरसंचार विभाग द्वारा शासित होता है और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा इसकी निगरानी की जाती है।
  • 1999 से, भारत एक राजस्व-साझाकरण मॉडल का उपयोग कर रहा है जहाँ दूरसंचार कंपनियां अपने AGR का एक निश्चित प्रतिशत (आमतौर पर लाइसेंस शुल्क के लिए 8% और SUC के लिए 3-5%) सरकार को भुगतान करती हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ECMS)

संदर्भ: हाल ही में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (SPECS) के तीसरे चरण के तहत 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी।

अन्य संबंधित जानकारी

  • इन मंजूरियों में ₹41,863 करोड़ का अनुमानित निवेश और ₹2,58,152 करोड़ का अनुमानित उत्पादन मूल्य शामिल है।
  • अनुमोदित परियोजनाओं से देश भर में 33,791 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का सृजन होने की उम्मीद है।
  • यह मंज़ूरी पिछले चरण का विस्तार है, जिसके अंतर्गत पहले ही 24 आवेदनों के माध्यम से ₹12,704 करोड़ के निवेश को स्वीकृति दी जा चुकी थी।
  • इस दौर के साथ, ECMS के तहत अब तक कुल 46 आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं।
  • योजना के तहत अब संचयी अनुमोदित निवेश ₹54,567 करोड़ तक पहुँच गया है, जिससे लगभग 51,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
  • अनुमोदित विनिर्माण इकाइयाँ आठ राज्यों में फैली हुई हैं, जिनमें आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान शामिल हैं।
  • इन मंजूरियों में 11 लक्षित श्रेणी के उत्पादों का विनिर्माण शामिल है, जिनका मोबाइल विनिर्माण, दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और आईटी हार्डवेयर जैसे क्षेत्रों में क्रॉस-सेक्टर अनुप्रयोग है। ये 11 उत्पाद इस प्रकार हैं:
    • 5 मुख्य घटक जैसे PCB (प्रिंटेड सर्किट बोर्ड), कैपेसिटर, कनेक्टर्स, एनक्लोजर और लिथियम-आयन सेल।
    •  3 सब-असेंबली जैसे कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल और ऑप्टिकल ट्रांसीवर।
    • 3 आपूर्ति श्रृंखला मदें जैसे एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न, एनोड सामग्री और लैमिनेट (कॉपर क्लैड)।

इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ECMS)

  • यह भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसे उच्च-मूल्य वाले इलेक्ट्रॉनिक घटकों के लिए एक सुदृढ़ घरेलू इकोसिस्टम स्थापित करने के लिए 8 अप्रैल, 2025 को शुरू किया गया था।
  • इसका प्रबंधन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा किया जाता है, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (GVCs) में एकीकृत करना और आयात पर निर्भरता को कम करना है।

NFRA ने दूसरा ऑडिट प्रैक्टिस टूलकिट जारी किया

संदर्भ: नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) ने हाल ही में अपना दूसरा ऑडिट प्रैक्टिस टूलकिट जारी किया है, जिसका शीर्षक ‘राजस्व के लिए अभिकथन स्तर पर ROMM (भौतिक गलतबयानी का जोखिम) मूल्यांकन’ है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह टूलकिट ‘अभिकथन स्तर’ पर भौतिक गलतबयानी के जोखिम के मूल्यांकन पर केंद्रित है, जो ऑडिट प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है।
  • यह ऑडिटर्स को राजस्व रिपोर्टिंग से संबंधित जोखिमों की पहचान करने और उन पर प्रतिक्रिया देने में मदद करने के लिए एक व्यवस्थित नमूना दस्तावेज़ प्रदान करता है।
  • NFRA अध्यक्ष ने इस दस्तावेज़ की बहुमुखी उपयोगिता पर ज़ोर देते हुए कहा कि इसे किसी भी प्रकार के ऑडिट के लिए अनुकूलित किया जा सकता है।
  • इस टूलकिट का प्रयोग एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में किया जा सकता है, जिसे पेशेवर प्रत्येक ऑडिट के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर संशोधित कर सकते हैं।
  • NFRA के इस कदम का मुख्य लक्ष्य छोटी और मध्यम स्तर की फर्मों तक पहुँच बनाना है, ताकि देश में ऑडिटिंग की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली में सुधार लाया जा सके।
  • NFRA ने शेष वित्तीय वर्ष के दौरान अन्य महत्वपूर्ण ऑडिट क्षेत्रों में और अधिक ‘ऑडिट प्रैक्टिस टूलकिट’ जारी करने की योजना की घोषणा की है।

नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA)

  • NFRA का गठन 01 अक्टूबर, 2018 को भारत सरकार द्वारा कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 132 की उप-धारा (1) के तहत किया गया था।
  • इसके प्राथमिक कार्यों का उद्देश्य जनहित संस्थाओं के लिए वित्तीय रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता और पारदर्शिता में सुधार करना है।
  • यह कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के तहत कार्य करता है और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

9वाँ राष्ट्रीय सिद्ध दिवस

संदर्भ: भारत में प्रतिवर्ष 6 जनवरी को ऋषि अगस्त्य (अगथियार) की जयंती के उपलक्ष्य में सिद्ध दिवस मनाया जाता है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह दिवस राष्ट्रीय सिद्ध संस्थान (NIS) और सिद्ध अनुसंधान केंद्रीय परिषद (CCRS) के साथ-साथ भारतीय चिकित्सा और होम्योपैथी निदेशालय, तमिलनाडु सरकार के सहयोग से मनाया जाएगा।
    •  सिद्ध अनुसंधान केंद्रीय परिषद (CCRS) सिद्ध अनुसंधान के लिए शीर्ष निकाय है, जो आयुष मंत्रालय के तहत जुलाई 2010 में सोसायटी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत 8 परिधीय संस्थानों और 5 सह-स्थित इकाइयों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करता है।
  • इस वर्ष का विषय “वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सिद्ध” है।
  • इस दिवस का उद्देश्य निवारक स्वास्थ्य और वैश्विक कल्याण में सिद्ध चिकित्सा की भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह स्वास्थ्य और अनुसंधान के क्षेत्र में इस प्राचीन पद्धति को मजबूत करने के सरकारी प्रयासों की भी पुष्टि करता है।

सिद्ध के बारे में

  • माना जाता है कि सिद्ध चिकित्सा प्रणाली की उत्पत्ति ‘शिव पंथ’ और महान ऋषि अगस्त्य से हुई है, जिन्हें ‘सिद्ध चिकित्सा के जनक’ के रूप में भी जाना जाता है।
  • सिद्ध चिकित्सा प्रणाली, जिसकी उत्पत्ति ‘सिद्धि’ (पूर्णता) शब्द से हुई है, एक स्वदेशी भारतीय चिकित्सा परंपरा है जिसकी जड़ें द्रविड़ सभ्यता में हैं।
  • सिद्ध चिकित्सा ‘अण्ड पिण्ड तत्वम’ (ब्रह्मांड और मानव शरीर की एकता) और 96 तत्वों (थातु) के सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें पंचतत्व (पाँच तत्व), तीन प्राण तत्व और सात शारीरिक घटक शामिल हैं जो भौतिक शरीर (अन्नमय कोष) का निर्माण करते हैं।
  • शरीर के कार्यों को संचालित करने वाले तीन प्राण तत्व (या उइर थातु) इस प्रकार हैं:
    • वलि (वात- वायु या आकाश)
    • अज़ल (पित्त – अग्नि), और
    • अय्यम (कफ– जल और पृथ्वी)
  • सिद्ध चिकित्सा में उपचार को तीन विशिष्ट श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
    • देव मरुथुवम (दिव्य पद्धति)
    • मनिद मरुथुवम (तर्कसंगत पद्धति)
    • असुर मरुथुवम (शल्य पद्धति)
  • भोजन ही औषधि है; औषधि ही भोजन है” स्वस्थ जीवन के लिए सिद्ध ग्रंथों में वर्णित मूल सिद्धांतों में से एक है।

भारतीय फार्माकोपिया 2026 (IP 2026)

संदर्भ: हाल ही में, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में भारतीय फार्माकोपिया का 10वां संस्करण (IP 2026) जारी किया।

अन्य संबंधित जानकारी

  • भारतीय फार्माकोपिया देश में दवाओं के लिए मानकों की आधिकारिक पुस्तक के रूप में कार्य करती है और यह फार्मास्यूटिकल्स के लिए भारत के नियामक ढांचे का आधार स्तंभ है।
    • भारतीय फार्माकोपिया का प्रकाशन भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) द्वारा औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से किया जाता है। 
  • 10वां संस्करण वैज्ञानिक प्रगति, वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और फार्मास्यूटिकल विनिर्माण व विनियमन में भारत के बढ़ते नेतृत्व को दर्शाता है।
  • IP 2026 में 121 नए मोनोग्राफ शामिल किए गए हैं, जिससे अब मोनोग्राफ की कुल संख्या बढ़कर 3,340 हो गई है।
  • IP 2026 (भारतीय फार्माकोपिया) की एक महत्वपूर्ण विशेषता ‘औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियम 2020’ के तहत पहली बार ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन (रक्ताधान चिकित्सा) से जुड़े 20 रक्त घटक मोनोग्राफ को शामिल करना है।
  • इसने क्षय रोग रोधी, मधुमेह रोधी और कैंसर रोधी दवाओं के साथ-साथ आयरन सप्लीमेंट्स सहित प्रमुख चिकित्सीय श्रेणियों को सुदृढ़ किया है, जिससे विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत उपयोग की जाने वाली दवाओं का अधिक व्यापक मानकीकरण सुनिश्चित हुआ है।
  • WHO के वैश्विक फार्माकोविजिलेंस डेटाबेस में भारत की रैंकिंग में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। यह 2009-2014 के दौरान 123वें स्थान वर्ष 2025 में 8वें स्थान पर आ गया है।

भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) के बारे में   

  • IPC 1 जनवरी 2009 को एक स्वायत्त संस्थान के रूप में परिचालन में आया।
  • यह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत कार्य करता है।
    • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव IPC के अध्यक्ष होते हैं, और सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक इसके मुख्य वैज्ञानिक और कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्य करते हैं।
  • भारतीय फार्माकोपिया  भारत में निर्मित, आयातित, बेची जाने वाली या वितरित की जाने वाली दवाओं की पहचान, शुद्धता और शक्ति  के मानकों को परिभाषित करती है।
  • IPC के अधिदेश में भारतीय फार्माकोपिया (IP) और नेशनल फॉर्मुलरी ऑफ इंडिया (NFI) को संशोधित और प्रकाशित करना, IP संदर्भ पदार्थ प्रदान करना और फार्माकोपिया संबंधी मामलों पर प्रशिक्षण प्रदान करना शामिल है।

पेरू ने मधुमक्खियों को दिए कानूनी अधिकार

संदर्भ: हाल ही में, पेरू ने एक अध्यादेश पारित किया है, जिसने अमेज़न की बिना डंक वाली मधुमक्खियों को कानूनी अधिकार प्रदान किए हैं, जिससे मधुमक्खियाँ कानूनी अधिकार प्राप्त करने वाले विश्व के पहले कीट बन गए हैं।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह घोषणा स्थानीय नेताओं और समुदाय के सदस्यों के सहयोग से की गई थी, जिसमें यह स्वीकार किया गया है कि स्वदेशी अधिकार, संस्कृति और आध्यात्मिक विश्वास, बिना डंक वाली इन मधुमक्खियों के कल्याण के साथ गहराई से जुड़े हुए हैं।
  • अध्यादेश आधिकारिक तौर पर मधुमक्खियों के अस्तित्व के अंतर्निहित अधिकार, फलने-फूलने और निम्नलिखित रूप में संरक्षित होने के अधिकार को मान्यता देते हैं:
    • अस्तित्व और फलने-फूलने का अधिकार: यह पारिस्थितिकी तंत्र में जीवित रहने और अपनी उपस्थिति बनाए रखने के उनके अंतर्निहित अधिकार को मान्यता देता है।
    • स्वस्थ पर्यावास और पर्यावरण: प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहने का अधिकार, जिसमें कीटनाशकों और छत्तों को जलाने के खिलाफ विशिष्ट कानूनी सुरक्षा शामिल है।
    • प्राकृतिक चक्रों का पुनरुत्पादन: उनके जीवन चक्रों (जैसे घोंसला बनाना और भोजन की तलाश) के लिए सुरक्षा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे अपनी स्वस्थ आबादी बनाए रख सकें।
    • पारिस्थितिक स्थिरता: स्थिर जलवायु परिस्थितियों का अधिकार, जिसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न खतरों का समाधान करना है।
    • कानूनी प्रतिनिधित्व: यदि मधुमक्खियों के अधिकारों को नुकसान या आवास विनाश से खतरा होता है, तो अब अदालत में उनका कानूनी रूप से प्रतिनिधित्व किया जा सकता है।

बिना डंक वाली मक्खियों के बारे में

  • बिना डंक वाली मधुमक्खियाँ (Stingless bees) ऐसी मधुमक्खियाँ होती हैं जिनमें डंक नहीं होते या फिर उनके डंक हानिरहित होते हैं; ये मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाई जाती हैं।
    • इनकी ज्ञात 500 प्रजातियों में से लगभग आधी अमेज़न में रहती हैं, जिनमें से 170 से अधिक प्रजातियाँ पेरू में पाई जाती हैं।
  • इन्होंने लगभग 80 मिलियन वर्षों से उष्णकटिबंधीय वनों को बनाए रखा है और ये अमेज़न की 80% से अधिक वनस्पतियों को परागित करती हैं, जिनमें कोको (ककाओ), कॉफी और एवोकैडो जैसी फसलें शामिल हैं।
  • अशानिका (Asháninka) लोग बिना डंक वाली मधुमक्खी के शहद का उपयोग औषधि के रूप में भी करते हैं; अध्ययनों से पता चलता है कि इसमें सूजन-रोधी, जीवाणुरोधी और विषाणुरोधी गुण होते हैं और स्वाद व बनावट में यह व्यावसायिक शहद से बिल्कुल अलग होता है।

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