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सामान्य अध्ययन 2: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, एजेंसियाँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

सामान्य अध्ययन 2: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/ सेवाओं के विकास और प्रबंधन से  संबंधित विषय।

संदर्भ: शर्करा युक्त पेय पदार्थों के कराधान पर WHO की ‘ग्लोबल रिपोर्ट 2025’ में पाया गया है कि यद्यपि आधे से अधिक देश शर्करा युक्त पेय पदार्थों (SSBs) पर कर लगाते हैं, लेकिन उनके द्वारा लगाया गया औसत कर खुदरा मूल्य का मात्र 6.8% ही होता है।

अन्य संबंधित जानकारी:

• उल्लेखनीय है कि WHO ने देशों से शर्करा युक्त पेय का उपभोग कम करने और स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने हेतु अपनी नई ‘3 by 35’ पहल के हिस्से के रूप में करों को बढ़ाने और पुनः डिज़ाइन करने का आह्वान किया है।

• WHO की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि कम से कम 167 देश शराब युक्त पेय पर कर लगाते हैं और 12 देशों ने शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया हैं, फिर भी शराब अधिक वहनीय हो गई है।

• यह आकलन 2023 में पहली बार रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद से WHO द्वारा दूसरी बार संकलित डेटा पर आधारित है।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

• शर्करा के प्रमुख स्रोत: शर्करा युक्त पेय जैसे- सोडा, रेडी टू ड्रिंक चाय/कॉफी, मीठा दूध, एनर्जी ड्रिंक और फलों के जूस इत्यादि।

• करs का कवरेज अंतराल: रिपोर्ट दर्शाती है कि कम से कम 116 देश शर्करा युक्त पेय पदार्थों पर कर लगाते हैं, जिनमें से अधिकांश सोडा हैं।

  • लेकिन कई अन्य शर्करा की उच्च मात्रा वाले उत्पाद, जैसे कि 100% फलों का जूस, मीठे दूध के पेय, और रेडी टू ड्रिंक कॉफी और चाय पर कर नहीं लगाया जाता है।

• एनर्जी ड्रिंक पर लगे करों में स्थिरता: हालांकि 97% देश एनर्जी ड्रिंक पर कर लगाते हैं, लेकिन यह अनुपात 2023 की वैश्विक रिपोर्ट के बाद से स्थिर बना हुआ है।

• शराब युक्त पेय पर कम कराधान: शराब युक्त पेय पर कम कर लगाया जाता है, जिसमें बीयर के लिए वैश्विक उत्पाद शुल्क का 14% और स्पिरिट के लिए 22.5% कर लगाया जाता है, जिससे पता चलता है शराब की खपत पर राजकोषीय दबाव सीमित बना हुआ है।

  • स्पष्ट गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों के बावजूद, कम से कम 25 देशों (जिनमें से अधिकांश यूरोप में हैं) में वाइन (Wine) पर अभी भी कर नहीं लगाया जाता है।

• क्षेत्रीय असमानताएँ: गैर-लाभकारी संस्था ‘सेंटर फॉर साइंस’ के अध्ययन के अनुसार, संपन्न देशों में घटती बिक्री के चलते शर्करा युक्त पेय के बहुराष्ट्रीय और स्थानीय उत्पादक निम्न और मध्यम आय वाले देशों में भारी निवेश कर रहे हैं।

• कर राजस्व का अपर्याप्त स्वास्थ्य आवंटन: शराब रहित पेय पर उत्पाद शुल्क लगाने वाले 116 देशों में से केवल 10 देशों ने ही राजस्व का आवंटन विशेष रूप से स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए किया है।

• क्षेत्रीय उपभोग पैटर्न: उच्च खपत दर  कोलंबिया में दर्ज की गई है, इसके विपरीत, भारत, चीन और बांग्लादेश जैसे देशों में सबसे कम खपत दर्ज की गई है।

  • यह आंकड़ा द लैंसेट के 2019 के निष्कर्षों से भिन्न है, जिसमें पाया गया था कि शर्करा युक्त पेय विनिर्माताओं के लिए भारत शीर्ष पांच वैश्विक बाजारों में दूसरे स्थान पर है।

शर्करा युक्त पेय और शराब का स्वास्थ्य पर प्रभाव

• निम्न पोषण मूल्य: शर्करा युक्त पेय जल्दी पच जाते हैं, जिससे रक्त शर्करा (blood sugar) में अचानक वृद्धि होती है और वे बहुत कम या शून्य पोषण मूल्य प्रदान करते हैं।

• गैर-संक्रामक रोगों (NCDs) में वृद्धि: शर्करा युक्त पेय का अत्यधिक सेवन, जो प्रायः उच्च लवण (नमक) और संतृप्त वसा युक्त खाद्य पदार्थों के साथ सम्मिलित होता है, मोटापे तथा आहार संबंधी गैर-संक्रामक रोगों का एक मुख्य कारक है। यह विशेष रूप से टाइप-2 मधुमेह और हृदय रोगों की उत्पत्ति में प्रमुख चालक की भूमिका निभाता है।

  • केवल वर्ष 2020 में, शर्करा युक्त पेय पदार्थों के कारण टाइप 2 मधुमेह के 22 लाख नए मामले और हृदय रोगों के 12 लाख नए मामले दर्ज किए गए।

• बच्चों और किशोरों पर प्रभाव:  शर्करा युक्त पेय पदार्थों के प्रचार के कारण भारतीय बच्चों में मोटापे के बढ़ते मामले दर्ज किए गए हैं। इनसे कम उम्र में मधुमेह और चयापचय संबंधी विकारों का खतरा भी उत्पन्न हो रहा है।

• कैंसर का बढ़ता खतरा: शराब के सेवन की पहचान मुख, ग्रासनली, यकृत, कोलोरेक्टल और स्तन कैंसर सहित कई कैंसर के लिए एक जोखिम कारक के रूप में की गई है।

रिपोर्ट की सिफारिशें

• स्वास्थ्य करों को बढ़ाना और पुनर्गठित करना: WHO के महानिदेशक ने उल्लेख किया कि तंबाकू, शर्करा युक्त पेय पदार्थों और शराब जैसे उत्पादों पर कर बढ़ाने से सरकारों को उनके उपभोग को कम करने और महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए धन जुटाने में मदद मिल सकती है।

  • शर्करा पर उच्च और उपयुक्त कर लगाने वाले देशों में शर्करा की खपत में कमी आई है और वहाँ सकारात्मक सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणाम दर्ज किए गए हैं। उदाहरण के लिए: ब्रिटेन (UK) का ‘शुगर लेवी’।

• स्वस्थ विकल्पों को बढ़ावा देना: पानी जैसे स्वस्थ विकल्पों के सेवन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए और उन पर कर नहीं लगाया जाना चाहिए।

• मुद्रास्फीति समायोजित कराधान प्रणाली: मुद्रास्फीति को प्रतिबिंबित करने के लिए शर्करा युक्त पेय पदार्थों पर लगाए गए करों को नियमित रूप से अपडेट किया जाना चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि उनकी कीमतें समय के साथ इनके उपभोग में कमी लाने के लिए पर्याप्त रूप से उच्च बनी रहें।

शर्करा युक्त पेय पदार्थों के लिए भारत की कराधान व्यवस्था

• जीएसटी “सिन टैक्स” फ्रेमवर्क: सितंबर 2025 में आयोजित GST परिषद की 56वीं बैठक में, कोल्ड ड्रिंक्स, फ्लेवर्ड सोडा, आइस्ड टी और एनर्जी ड्रिंक्स को आधिकारिक तौर पर तंबाकू और शराब के साथ “सिन” (Sin) वस्तुओं के रूप में वर्गीकृत किया गया, जिन पर 40% GST लगता है।

• ईट राइट इंडिया (Eat Right India – ERI) पहल: यह पहल आहार संबंधी आदतों में सुधार करने, नुकसानदेह खाद्य उत्पादों (जैसे अत्यधिक मात्रा में शर्करा) के सेवन को कम करने और सुरक्षित, स्वस्थ और टिकाऊ खाद्य विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा शुरू की गई है।

  • ‘आज से थोड़ा कम’ (शर्करा, नमक, तेल का कम सेवन) जैसे अभियान आहार संबंधी आदतों में सुधार (ERI) का हिस्सा हैं।

• राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (2017): यह नीति मीठे पेय पदार्थों, शराब और तंबाकू पर उच्च कर लगाने के लिए नीतिगत समर्थन की सिफारिश करने के साथ ही कर लगाने के औचित्य का भी उल्लेख करती है।

• FSSAI लेबलिंग विनियम: उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए अनिवार्य पोषण लेबल (शर्करा की मात्रा का प्रकटीकरण) और चेतावनी लेबल।

Source :
Down To Earth
Down To Earth
WHO
The Indian Express

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