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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा नियोजन, संसाधनों के संग्रहण, संवृद्धि, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।
संदर्भ: यूएनसीटीएडी ने हाल ही में व्यापार एवं विकास रिपोर्ट 2026: विकास का भू-अर्थशास्त्र प्रकाशित की।
व्यापार एवं विकास रिपोर्ट के बारे में
- प्रकाशित करने वाली संस्था: व्यापार एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCTAD)।
- यह रिपोर्ट पहली बार 1981 में प्रकाशित हुई थी। इसमें वैश्विक आर्थिक रुझानों तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विकास नीतियों का विश्लेषण किया जाता है।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
- वैश्विक आर्थिक परिदृश्य
- विकास दर में मंदी: वर्ष 2026 में वैश्विक विकास दर 2.6% और 2027 में 2.7% रहने का अनुमान है, जबकि वर्ष 2025 में यह 2.9% थी। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर 2025 के 4.7% से घटकर 2026 में 4% रहने की उम्मीद है।
- व्यापार में लचीलापन: वर्ष 2025 में वैश्विक व्यापार में वास्तविक रूप से 4.4% की वृद्धि हुई और 2026 में इसके लगभग 4% बढ़ने की उम्मीद है। हालाँकि, ऊँची कीमतों के कारण व्यापार का मूल्य आंशिक रूप से बढ़ा हुआ दिखाई देता है।
- असमान आर्थिक सुधार: वर्ष 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि में एशिया का योगदान 59% रहने का अनुमान है, जबकि कई विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को ऊर्जा संबंधी झटकों, उधार लेने की ऊँची लागत और सीमित राजकोषीय गुंजाइश जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
- वैश्विक व्यापार का चयनात्मक विखंडन
- भू-आर्थिक प्रतिस्पर्धा: देश रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए टैरिफ, सब्सिडी, निर्यात नियंत्रण, निवेश की जाँच और प्रौद्योगिकी संबंधी प्रतिबंधों का तेजी से उपयोग कर रहे हैं। वैश्वीकरण जारी है, लेकिन व्यापार और उत्पादन के नेटवर्क भू-राजनीतिक आधार पर पुनर्गठित हो रहे हैं।
- बदलते व्यापार प्रतिरूप: चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच व्यापार में 2024 से 2025 के बीच 20% से अधिक की गिरावट आई, जो वैश्विक आर्थिक संबंधों के पुनर्गठन को दर्शाती है।
- रणनीतिक निवेश और विकास वित्तपोषण
- निवेश का संकेंद्रण: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अवसंरचना, अर्धचालक और ऊर्जा संक्रमण प्रौद्योगिकियों सहित रणनीतिक क्षेत्रों का वर्ष 2025 में वैश्विक ग्रीनफील्ड निवेश में 44% हिस्सा था, जो वर्ष 2020 में 16% था। महत्त्वपूर्ण खनिजों को छोड़कर, इन क्षेत्रों में लगभग 70% निवेश विकसित अर्थव्यवस्थाओं को प्राप्त होता है।
- विकास सहायता में गिरावट: आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) की विकास सहायता समिति के सदस्यों से मिलने वाली आधिकारिक विकास सहायता (ODA) में वर्ष 2026 में 6.9% की गिरावट आने और इसके 152 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। यह लगातार तीसरा वर्ष होगा, जब इसमें गिरावट दर्ज की जाएगी।
भारत –विशिष्ट निष्कर्ष
- विकास का परिदृश्य: मजबूत घरेलू माँग, विनिर्माण क्षमता के विस्तार और सार्वजनिक अवसंरचना कार्यक्रमों के समर्थन से भारत की विकास दर वर्ष 2026 में 7.3% और वर्ष 2027 में 6.8% रहने का अनुमान है। तेल आयात पर अत्यधिक निर्भरता अब भी एक कमज़ोर पक्ष बनी हुई है।
- रणनीतिक निवेश गंतव्य: वर्ष 2020–2025 के दौरान वैश्विक रणनीतिक ग्रीनफील्ड निवेश में भारत की हिस्सेदारी 5.7% रही, जिससे वह ऐसे निवेश के लिए एशिया के प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्थाओं वाले गंतव्यों में शामिल हो गया।
- औद्योगिक नीति: भारत ने वर्ष 2022–2025 के दौरान 707 औद्योगिक नीति उपाय लागू किए। रिपोर्ट की तुलना में भारत विश्व स्तर पर पाँचवें स्थान पर रहा। उससे आगे संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया और ब्राज़ील थे।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना: रिपोर्ट में भारत द्वारा 23 देशों के साथ अपनी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना साझा करने के समझौते का उल्लेख किया गया है, जो दक्षिण-दक्षिण सहयोग में भारत की भूमिका को दर्शाता है।
प्रमुख नीतिगत सिफारिशें
- औद्योगिक क्षमताओं को मजबूत करना: ऐसी दीर्घकालिक औद्योगिक नीतियाँ अपनाना, जो प्रौद्योगिकी के उन्नयन, विविधीकरण और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के उच्च मूल्य-वर्धित क्षेत्रों में प्रवेश को बढ़ावा दें।
- वित्त को विकास के अनुरूप बनाना: किफायती घरेलू और बहुपक्षीय वित्त जुटाना, अस्थिर पूँजी प्रवाह का प्रबंधन करना तथा ऐसे विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करना, जो स्थानीय संबंधों को मजबूत करे और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा दे।
- नियम-आधारित व्यापार को बनाए रखना: पारदर्शिता, पूर्वानुमेयता और गैर-भेदभाव सुनिश्चित करने में विश्व व्यापार संगठन (WTO) की भूमिका को मजबूत करना। साथ ही, विकासशील देशों की सार्थक भागीदारी तथा उनके लिए उचित विशेष और विभेदक व्यवहार की व्यवस्था को सुरक्षित रखना।
- क्षेत्रीय सहयोग को गहरा करना: दक्षिण-दक्षिण व्यापार, प्रौद्योगिकी साझाकरण, भुगतान प्रणालियों और व्यापार सुविधा का विस्तार करना। ऊर्जा सुरक्षा में सुधार तथा बाहरी झटकों के प्रभाव को कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश करना।
