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सामान्य अध्ययन-3: महत्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ जैसे भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय गतिविधि, चक्रवात आदि, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान—महत्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं (जल-निकायों और हिम-छत्रकों सहित) तथा वनस्पति एवं प्राणि-जगत में परिवर्तन और ऐसे परिवर्तनों के प्रभाव।
संदर्भ: द यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट फॉर वाटर, एनवायरनमेंट एंड हेल्थ (UNU-INWEH) ने “ग्लोबल वॉटर बैंकरप्सी: लिविंग बियॉन्ड अवर हाइड्रोलॉजिकल मीन्स इन द पोस्ट-क्राइसिस एरा” शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है, जो दशकों से जल के अत्यधिक दोहन, प्रदूषण और कम होते ताजे जल स्रोतों के कारण अपरिवर्तनीय वॉटर बैंकरप्सी को उजागर करती है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

- इस रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि विश्व पहले ही वैश्विक वॉटर बैंकरप्सी के युग में प्रवेश कर चुका है। यह स्थिति कोई दूरगामी खतरा नहीं बल्कि आज की वास्तविकता है।
- विश्व की लगभग 75% जनसंख्या जल-असुरक्षा या गंभीर रूप से जल-असुरक्षा वाले देशों में निवास करती है।
- प्रतिवर्ष लगभग 4 बिलियन लोग कम से कम एक महीने के लिए गंभीर जल संकट का सामना करते हैं।
- वॉटर बैंकरप्सी ‘संकट के बाद की एक स्थायी’ अवस्था है जहाँ किसी क्षेत्र का दीर्घकालिक जल उपयोग उसकी नवीकरणीय आपूर्ति से अधिक हो जाता है, जिससे प्राकृतिक जल प्रणालियों को अपरिवर्तनीय क्षति पहुँचती है।
- दशकों से असतत जल निकासी ने जलभृतों, हिमनदों, आर्द्रभूमियों, मृदा और नदी प्रणालियों का क्षरण कर दिया है।
- जल प्रणालियों को “विफलता की संकट-पश्चात् अवस्था” के रूप में वर्णित किया गया है।
- 170 मिलियन हेक्टेयर से अधिक सिंचित कृषि भूमि उच्च से अत्यंत उच्च जल तनाव का सामना कर रही है।
- भूमि क्षरण, भूजल की कमी और जलवायु परिवर्तन के कारण वार्षिक तौर पर 300 बिलियन डॉलर से अधिक का वैश्विक आर्थिक नुकसान हुआ है।
- तीन बिलियन लोग और वैश्विक खाद्य उत्पादन का आधे से अधिक हिस्सा उन क्षेत्रों में स्थित है जहाँ जल भंडारण में गिरावट आ रही है।
- लवणीकरण ने 100 मिलियन हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को नुकसान पहुँचाया है।
- शोधकर्ताओं ने पुराने मानदंडों को बहाल करने के बजाय क्षति को न्यूनतम करने पर केंद्रित एक नए वैश्विक जल एजेंडे का आह्वान किया है।
वॉटर बैंकरप्सी के प्रमुख हॉटस्पॉट:
- मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीकी क्षेत्र: ये क्षेत्र जटिल राजनीतिक अर्थव्यवस्थाओं के भीतर निम्न कृषि उत्पादकता, ऊर्जा-गहन अलवणीकरण, और रेत व धूल भरी आँधियों के संयुक्त प्रभाव का सामना कर रहे हैं।
- दक्षिण एशिया: भूजल पर निर्भर कृषि और शहरीकरण से जल स्तर में निरंतर गिरावट आई है और स्थानीय भूमि का अवतलन हो रहा है।
- अमेरिकी दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र: ये अत्यधिक आवंटितजल संसाधनों के प्रतीक बन गए हैं, जहाँ जल की वास्तविक उपलब्धता की तुलना में उसकी मांग और आपूर्ति कहीं अधिक हैं।
वॉटर बैंकरप्सी के मुख्य कारण

- असतत जल निकासी: प्राकृतिक पुनर्भरण दरों से अधिक सतही जल और भूजल की अत्यधिक निकासी, जिससे नदियों, जलभृतों, आर्द्रभूमियों और दीर्घकालिक जल भंडार की कमी हो जाती है।
- जल पर कृषि की अत्यधिक निर्भरता: वैश्विक ताजे जल की निकासी का लगभग 70% सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है, जो अक्सर अपर्याप्त होता है, और बढ़ती खाद्य मांग के मद्देनजर जल प्रणालियों पर गंभीर दबाव पड़ता है।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभाव: पिघलते हिमनद, वर्षा के बदलते पैटर्न और चरम मौसमी घटनाएँ सूखे और बाढ़ की घटनाओं में तीव्रता लाती हैं, जिससे प्राकृतिक जल भंडारण और उपलब्धता प्रभावित होती है।
- जनसंख्या वृद्धि और शहरीकरण: तीव्र असमान जनसंख्या वृद्धि, शहरों के विस्तार और आर्थिक विकास से घरेलू, औद्योगिक और ऊर्जा उपयोग के लिए जल की मांग बढ़ जाती है।
- जल प्रदूषण और क्षरण: औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि अपवाह और लवणीकरण से होने वाले संदूषण से उपयोगी ताजे जल में कमी आती है, जिससे उपलब्ध आपूर्ति प्रभावी रूप से घट जाती है।
- अप्रभावी प्रशासन और कुप्रबंधन: खंडित नीतियां, अप्रभावी विनियमन और अल्पकालिक संकट प्रबंधन दीर्घकालिक जल स्थिरता और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण को संबोधित करने में विफल रहे हैं।
रिपोर्ट का महत्व
- जल विमर्श में वैचारिक परिवर्तन: यह औपचारिक रूप से “ग्लोबल वाटर बैंकरप्सी ” की अवधारणा प्रस्तुत करता है, जो जल तनाव या संकट की परिवर्तनीय धारणाओं से आगे बढ़कर प्राकृतिक जल पूंजी की अपरिवर्तनीय क्षति को उजागर करता है।
- नीति और शासन का पुनर्गठन: यह वैश्विक जल एजेंडे के मौलिक पुनर्गठन का आह्वान करता है, जो अल्पकालिक संकट प्रबंधन के स्थान पर विज्ञान-आधारित अनुकूलन, दीर्घकालिक स्थिरता और क्षति न्यूनीकरण को प्राथमिकता देता है।
- वैश्विक जोखिम और अंतर्संबंध: यह जल की कमी को एक प्रणालीगत वैश्विक जोखिम के रूप में रेखांकित करता है, जो व्यापार, प्रवासन, जलवायु फीडबैक, खाद्य सुरक्षा और भू-राजनीति के माध्यम से जुड़ा हुआ है तथा केवल हॉटस्पॉट को ही नहीं बल्कि सभी क्षेत्रों को प्रभावित करता है।
- वैश्विक सहयोग के लिए उत्प्रेरक: यह जल को एक एकीकृत रणनीतिक मुद्दे के रूप में देखती है जो 2026 के संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन से पहले जलवायु कार्रवाई, जैव विविधता संरक्षण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बेहतर करने में सक्षम है।
