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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।

संदर्भ: कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरमेंट जर्नल में प्रकाशित एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार, प्राकृतिक आवासों को कृषि भूमि में बदलने से प्रजातियों की प्रचुरता (Species Richness) में 26 प्रतिशत की गिरावट आई है। उल्लेखनीय है कि इस विनाशकारी प्रभाव से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में भारत का पश्चिमी घाट भी शामिल है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह अध्ययन चाइनीज़ एकेडमी ऑफ साइंसेज और चाइना एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किया गया था और इसका उद्देश्य विश्व भर के जैव विविधता हॉटस्पॉट के भीतर कृषि विस्तार के प्रभाव की जांच करना था।
  • इस अध्ययन में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी, मैरीलैंड यूनिवर्सिटी और ओक्लाहोमा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने भी सहयोग किया।

अध्ययन के मुख्य बिंदु

  • यह अध्ययन सीमित भौगोलिक वितरण वाले कशेरुकियों जैसे-स्तनधारियों, पक्षियों और उभयचरों पर केंद्रित था।
  • जिन जैव विविधता हॉटस्पॉट क्षेत्रों को कृषि क्षेत्र में बदला गया था वहाँ जंतुओं और पादपों की कुल प्रचुरता में लगभग 12 % की कमी आई है।
  • आबादी  के अनुपात में सामुदायिक विविधता में लगभग 9 प्रतिशत की कमी आई है।
  • सामुदायिक विविधता से तात्पर्य किसी विशिष्ट क्षेत्र में रहने वाली और अंतःक्रिया करने वाली विभिन्न प्रजातियों की किस्म से है। यह उस पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर जीवन के विविध रूपों और उनके आपसी संबंधों को दर्शाती है, क्योंकि ये उस  पारिस्थितिकी तंत्र के समग्र स्थायित्व और स्वास्थ्य को बनाए रखने में योगदान देते हैं।
  • वन्यजीवों से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए वैश्विक PREDICTS डेटाबेस का उपयोग किया गया, जिसके माध्यम से अक्षुण्ण (प्राकृतिक) आवासों और कृषि भूमि के बीच तुलनात्मक अध्ययन किया गया।
  • सेटेलाइट से ली गई तस्वीरों से पता चला है कि वर्ष 2000 और 2019 के बीच जैव विविधता हॉटस्पॉट के अंतर्गत फसल भूमि में 12 प्रतिशत का विस्तार हुआ, जो 9 प्रतिशत के वैश्विक औसत से अधिक है।
  • भूमध्य रेखा के निकट स्थित उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों  में सबसे अधिक कृषि विस्तार हुआ है, और ये वही क्षेत्र हैं जहाँ विश्व की सर्वाधिक जैव विविधता पाई जाती है।
  • कृषि विस्तार से प्रभावित प्रमुख क्षेत्रों में दक्षिण अमेरिका के सेराडो और अटलांटिक फॉरेस्ट, दक्षिण-पूर्व एशिया के इंडो-बर्मा और सुंडालैंड तथा अफ्रीका के कुछ हिस्से शामिल थे।
  • अध्ययन ने जैव विविधता हॉटस्पॉटों में 3,483 उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान की, जो लगभग 1,741 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हैं और इसमें से तक़रीबन 1,031 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र संरक्षित क्षेत्रों के बाहर स्थित थे।
  • संरक्षित क्षेत्र वे स्थान हैं जिन्हें उनके मान्यता प्राप्त प्राकृतिक अथवा सांस्कृतिक मूल्यों के कारण संरक्षण दिया गया है।
  • भारत में, पश्चिमी घाटमें कृषि विस्तार के कारण भूमि उपयोग में तेजी से बदलाव आया है।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने अपनी वर्ल्ड हेरिटेज आउटलुक 4′ (2025) रिपोर्ट में पश्चिमी घाट को गंभीर चिंताजनक” श्रेणी में रखा है।
  • यूनेस्को (UNESCO) द्वारा मान्यता प्राप्त भारत का पश्चिमी घाट विश्व के सबसे समृद्ध और महत्वपूर्ण जैव विविधता हॉटस्पॉट में से एक है। यहाँ पुष्पीय पौधों की 5,000 से अधिक, स्तनधारियों की 139, पक्षियों की 508 और वैश्विक स्तर पर संकटग्रस्त प्रजातियों की कम से कम  325 प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लक्षित संरक्षण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के बिना, सामूहिक विलोपन (mass extinctions) की प्रक्रिया में तेजी आ सकती है।

रिपोर्ट में मुख्य सिफारिशें:

  • संरक्षित क्षेत्र: जैव विविधता हॉटस्पॉट में रणनीतिक रूप से संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार करना, विशेष रूप से उन स्थानों पर जहाँ सीमित भौगोलिक वितरण वाली दुर्लभ प्रजातियाँ रहती हैं।
  • संरक्षण को बढ़ावा: वन्यजीव सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, मौजूदा संरक्षित क्षेत्रों के भीतर प्रबंधन और कानून के प्रवर्तन को सुदृढ़ करना चाहिए।
  • कृषिउत्पादकता: नए क्षेत्रों को प्रयोग में लाने अर्थात् जंगलों को काटने के बजाय, पहले से ही खेती की जा रही भूमि पर कृषि उत्पादकता में सुधार करना।
  • खाद्य व्यापार में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना: यह सुनिश्चित करना कि जैव विविधता में समृद्ध किन्तु आर्थिक रूप से संघर्ष कर रहे देशों को समृद्ध देशों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपने पारिस्थितिक तंत्र को नष्ट करने के लिए बाध्य न किया जाए।
  • स्थानीय समुदायों को शामिल करना: संरक्षण प्रयासों के एक अभिन्न हिस्से के रूप में, सुरक्षा और निगरानी में स्वदेशी लोगों के योगदान को महत्त्व देना।

अध्ययन का महत्त्व

  • पारिस्थितिकीय प्रभाव: अध्ययन में इस तथ्य पर भी प्रकाश डाला गया है कि वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट के भीतर जैव विविधता की हानि का एक प्रमुख कारण कृषि है।
  • वैज्ञानिक साक्ष्य: अध्ययन में भूमि उपयोग में परिवर्तन के कारण संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्रों में प्रजातियों की संख्या में आ रही कमी के आँकड़े प्रस्तुत किए गए हैं।
  • संरक्षण अंतराल: अध्ययन ने संरक्षण में गंभीर अंतरालों को उजागर किया, क्योंकि उच्च जोखिम वाले जैव विविधता क्षेत्रों का एक बड़ा हिस्सा संरक्षित क्षेत्रों के बाहर स्थित है।
  • नीति और योजना: अध्ययन में पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट होने से बचाने के लिए, संरक्षण की प्राथमिकताओं को टिकाऊ खेती के तरीकों के साथ एकीकृत करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया गया है।

Source:
Down to Earth
National Herald India

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