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सामान्य अध्ययन 2: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे।
संदर्भ: अंतर्राष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस (20 मार्च) के अवसर पर जारी विश्व प्रसन्नता रिपोर्ट 2026, डिजिटल युग के प्रभाव पर विशेष ध्यान देते हुए वैश्विक कल्याण (well-being) के रुझानों पर प्रकाश डालती है।
अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
- यह कल्याण पर विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त एक वार्षिक प्रकाशन है, जिसे पहली बार वर्ष 2012 में भूटान द्वारा विकास के माप के रूप में प्रसन्नता पर दिए गए जोर से प्रेरित एक संयुक्त राष्ट्र पहल के बाद जारी किया गया था।
- इसे ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के ‘वेलबीइंग रिसर्च सेंटर’ द्वारा गैलप (Gallup) और संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क (UN SDSN) के साथ साझेदारी में तैयार किया जाता है, जिसमें विभिन्न विषयों के प्रमुख शोधकर्ताओं का योगदान होता है।
- रिपोर्ट का उद्देश्य वैश्विक खुशहाली और उसे प्रभावित करने वाले कारकों की व्यापक समझ प्रदान करना है, साथ ही कल्याण विज्ञान से प्राप्त अंतर्दृष्टियों को नीति-निर्माताओं और आम जनता के लिए सुलभ बनाना है। इसका प्रकाशन प्रति वर्ष 20 मार्च को मनाए जाने वाले ‘अंतर्राष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस’ के साथ होता है।
- पद्धति के अनुसार, यह रिपोर्ट गैलप वर्ल्ड पोल (Gallup World Poll) के आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें 140 से अधिक देशों को शामिल किया गया है।
- इसमें कैंट्रिल सेल्फ-एंकरिंग स्केल (Cantril Self-Anchoring Scale) का उपयोग किया जाता है, जिसमें उत्तरदाता अपने जीवन को 0 (सबसे खराब संभव जीवन) से 10 (सबसे अच्छा संभव जीवन) के पैमाने पर अंक देते हैं।
- स्थिरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए रैंकिंग जीवन मूल्यांकन के तीन वर्ष के औसत (2023-2025) से ली गई है।
- रिपोर्ट प्रति व्यक्ति GDP, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, सामाजिक समर्थन, जीवन विकल्प चुनने की स्वतंत्रता, उदारता और भ्रष्टाचार की धारणा जैसे प्रमुख निर्धारकों के आधार पर प्रसन्नता का मूल्यांकन करती है।
- 2026 का संस्करण विशेष रूप से डिजिटल युग में कल्याण पर केंद्रित है, जो यह परीक्षण करता है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के उपयोग के पैटर्न वैश्विक प्रसन्नता को कैसे नया आकार दे रहे हैं।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
वैश्विक रैंकिंग और रुझान:
- फिनलैंड लगातार 9वें वर्ष दुनिया का सबसे खुशहाल देश बना हुआ है (स्कोर: 7.764)।
- आइसलैंड (दूसरे), डेनमार्क (तीसरे), स्वीडन (पाँचवें), नॉर्वे (छठे) स्थान पर हैं।
- कोस्टा रिका एक प्रमुख उछाल के रूप में उभरकर 4वें स्थान पर पहुंचा, जो किसी लैटिन अमेरिकी देश के लिए अब तक की सर्वोच्च रैंक है।
- स्विट्ज़रलैंड ने शीर्ष 10 (10वें) देशों में फिर से प्रवेश किया है।
अंग्रेजी भाषी देशों की अनुपस्थिति:
- लगातार दूसरे वर्ष शीर्ष 10 में कोई भी अंग्रेजी भाषी देश शामिल नहीं है।
- शीर्ष 20 में केवल कुछ ही हैं: न्यूजीलैंड (11वें), आयरलैंड (13वें), ऑस्ट्रेलिया (15वें)।
- अन्य निचले स्थान पर हैं: अमेरिका (23वें), कनाडा (25वें), यूके (29वें)।
भारत का प्रदर्शन:
- भारत, स्कोर: 4.536 के साथ 116वें स्थान पर है।
- यह क्रमिक सुधार दर्शाता है; 126वां (2024) → 118वां (2025) → 116वां (2026)।
सबसे कम खुशहाल देश:
- संघर्ष और अस्थिरता से प्रभावित देश निचली रैंकिंग में हावी हैं।
- अफगानिस्तान सबसे कम खुशहाल देश बना हुआ है (147वें)।
- इसके बाद सिएरा लियोन, मलावी, जिम्बाब्वे, बोत्सवाना, लेबनान, डीआर कांगो, मिस्र, तंजानिया का स्थान है।
प्रसन्नता में वैश्विक सुधार:
- रिपोर्ट रेखांकित करती है कि 2006-2010 की आधार अवधि की तुलना में 79 देशों ने प्रसन्नता के स्तर में महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किया है, जो समग्र वैश्विक प्रगति का संकेत देता है।
सोशल मीडिया और युवा कल्याण:
- रिपोर्ट का एक मुख्य आकर्षण युवाओं के बीच घटता कल्याण है, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे विकसित देशों में।
- अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग को इस गिरावट के एक प्रमुख कारक के रूप में पहचाना गया है।
उपयोग पैटर्न और व्यवहारिक प्रभाव:
- मध्यम सोशल मीडिया उपयोग (प्रति दिन एक घंटे से कम) उच्चतम कल्याण स्तरों से जुड़ा है, जबकि अत्यधिक उपयोग (प्रतिदिन लगभग 2.5 घंटे) जीवन संतुष्टि को कम करता है।
- संचार और सीखने जैसी गतिविधियाँ कल्याण में सुधार करती हैं, जबकि पैसिव स्क्रॉलिंग और गेमिंग इसे कम करते हैं।
लैंगिक आयाम:
- सोशल मीडिया का नकारात्मक प्रभाव विशेष रूप से किशोर लड़कियों में स्पष्ट है, जो उपयोग के उच्च स्तर पर काफी कम जीवन संतुष्टि दर्ज करती हैं।
प्लेटफ़ॉर्म डिज़ाइन का महत्व:
- जो प्लेटफ़ॉर्म वास्तविक सामाजिक संपर्क को बढ़ावा देते हैं वे प्रसन्नता बढ़ाते हैं, जबकि एल्गोरिदम-संचालित कंटेंट प्लेटफ़ॉर्म उपयोग अत्यधिक होने पर नकारात्मक प्रभाव दिखाते हैं।
नीतिगत निहितार्थ:
- ये निष्कर्ष वैश्विक स्तर पर नीति निर्धारण को प्रभावित कर रहे हैं, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश सोशल मीडिया उपयोग के लिए न्यूनतम आयु बढ़ा रहे हैं, जबकि डेनमार्क, फ्रांस और स्पेन जैसे अन्य देश समान नियमों पर विचार कर रहे हैं।
- उच्च प्रसन्नता के चालक: शीर्ष रैंकिंग वाले देश मजबूत कल्याणकारी प्रणाली (welfare systems), न्यायसंगत आय वितरण, उच्च सामाजिक विश्वास और प्रभावी शासन जैसी सामान्य विशेषताएँ साझा करते हैं, जो सामूहिक रूप से कल्याण के उच्च स्तर का समर्थन करते हैं।
