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सामान्य अध्ययन–3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।
संदर्भ: एक नए वैज्ञानिक अध्ययन से पता चला है कि वायुमंडलीय ऊष्मन में एरोसोल की तुलना में जलवाष्प अधिक प्रभावी है और इसके जलवायु गतिकी तथा भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून पर उल्लेखनीय प्रभाव पड़ता है।
अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
- यह अध्ययन ‘एटमॉस्फेरिक रिसर्च’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ था| इसे आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES), नैनीताल तथा भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), बेंगलुरु द्वारा किया गया था।
- ये दोनों संस्थान भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत कार्य करते हैं।
- ग्रीस की यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न मैसेडोनिया और जापान की सोका यूनिवर्सिटी इस अध्ययन में अंतर्राष्ट्रीय सहयोगी थे।
अध्ययन क्षेत्र और प्रयुक्त डेटा
- यह अध्ययन सिंधु-गंगा मैदान पर केंद्रित है, जो एरोसोल लोडिंग का एक वैश्विक हॉटस्पॉट है।
- एरोसोल लोडिंग हॉटस्पॉट वे क्षेत्र होते हैं जहाँ वायुमंडल में एरोसोल (हवा में निलंबित सूक्ष्म ठोस या तरल कण) की सांद्रता लगातार अधिक रहती है, जिसे मुख्यतः एरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ (AOD) के माध्यम से मापा जाता है।
- अध्ययन में AERONET (एरोसोल रोबोटिक नेटवर्क) के छह ग्राउंड-बेस्ड प्रेक्षण स्थलों के डेटा का उपयोग किया गया।
- विकिरणीय स्थानांतरण सिमुलेशन SBDART मॉडल के माध्यम से किए गए।
- SBDART मॉडल (सांता बारबरा डिसॉर्ट एटमॉस्फेरिक रेडिएटिव ट्रांसफर) एक व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला मॉडल है जो यह बताता है कि सौर (लघु तरंग) और स्थलीय (दीर्घ तरंग) विकिरण पृथ्वी के वायुमंडल और सतह के साथ कैसे अन्योन्यक्रिया करते हैं।
अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष
- अध्ययन में पाया गया कि जलवाष्प, निम्नलिखित कारणों से एरोसोल की तुलना में वायुमंडलीय ऊष्मन में अधिक प्रभावी है:
- प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव: जलवाष्प एक प्रमुख ग्रीनहाउस गैस है, जो बाहर जाने वाले दीर्घ तरंगदैर्ध्य (अवरक्त) विकिरण को प्रभावी ढंग से अवशोषित करती है।
- सकारात्मक फीडबैक तंत्र: तापमान बढ़ने से वाष्पीकरण बढ़ता है, जिससे अधिक जलवाष्प बनती है और ऊष्मा के ट्रैप होने की प्रक्रिया तेज होती है।
- जलवाष्प के विकिरणीय प्रभाव एरोसोल की उपस्थिति से काफी प्रभावित होते हैं, और इसका प्रभाव वायुमंडल के शीर्ष पर अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
- विकिरणीय प्रभाव से आशय है कि कोई पदार्थ विकिरण को कैसे अवशोषित, उत्सर्जित और प्रकीर्णित करता है, तथा यह पृथ्वी के ऊर्जा संतुलन को प्रभावित करता है।
- एरोसोल-रहित वायुमंडल में जलवाष्प के विकिरणीय प्रभाव अधिक पाए गए।
- एरोसोल और जलवाष्प के बीच की अंतःक्रियाएँ वायुमंडलीय विकिरण बजट को महत्वपूर्ण रूप से नियंत्रित करती हैं।
जलवायु और नीतिगत महत्व
- यह अध्ययन जलवायु फीडबैक प्रक्रियाओं में जलवाष्प की प्रमुख भूमिका को उजागर करता है।
- जलवाष्प बादल निर्माण, वर्षा, एरोसोल में वृद्धि और वायुमंडलीय परिसंचरण को प्रभावित करती है।
- अध्ययन दर्शाता है कि जलवाष्प की उपेक्षा करने से जलवायु पूर्वानुमान गलत हो सकते हैं।
- यह जलवायु मॉडलों में एरोसोल और जलवाष्प दोनों को शामिल करने की आवश्यकता पर बल देता है।
- ये निष्कर्ष क्षेत्रीय जलवायु गतिकी और भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
व्यापक प्रभाव
- यह अध्ययन पृथ्वी के विकिरण संतुलन की वैज्ञानिक समझ विकसित करता है।
- यह वैश्विक ऊष्मायन में जलवाष्प को एक महत्वपूर्ण सकारात्मक फीडबैक कारक के रूप में रेखांकित करता है।
- यह क्षेत्रीय जलवायु पूर्वानुमान को बेहतर बनाने और साक्ष्य-आधारित जलवायु नीति निर्माण में सहायक है।
