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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।
संदर्भ: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने घोषणा की है कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने ‘तटस्थ’ नीतिगत रुख अपनाते हुए रेपो दर को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है।
अन्य संबंधित जानकारी
नीतिगत दरें और मौद्रिक नीति समिति का रुख:

• स्थायी जमा सुविधा (SDF) दर 5% पर स्थिर बनी हुई है, जबकि सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) दर और बैंक दर 5.5% हैं, जिससे तरलता कॉरिडोर अपरिवर्तित बना हुआ है।
• भारतीय रिज़र्व बैंक ने स्पष्ट किया कि भावी मौद्रिक नीतिगत निर्णय आगामी समष्टि-आर्थिक (Macro-economic) आंकड़ों पर निर्भर करेंगे। इनमें संशोधित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) श्रृंखला पर आधारित मुद्रास्फीति की प्रवृत्तियों और उभरते संवृद्धि परिदृश्य को प्राथमिकता दी जाएगी।
मुद्रास्फीति परिदृश्य:
• वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमानित स्तर 2.1% है, जो भारतीय रिज़र्व बैंक के 2-6% के सहिष्णुता दायरे (Tolerance Band) के भीतर है।
• प्रतिकूल आधार प्रभाव के कारण मुद्रास्फीति में धीरे-धीरे वृद्धि होने की संभावना है, जिसके अनुमान इस प्रकार हैं:

- Q4 FY26: 3.2%
- Q1 FY27: 4.0%
- Q2 FY27: 4.2%
• अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में हेडलाइन CPI मुद्रास्फीति 1.33% रही, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच नीति निर्माताओं को राहत प्रदान करती है।
वृद्धि अनुमान:
• घरेलू मांग में लचीलेपन को देखते हुए RBI ने अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि अनुमान में संशोधन किया है:
- FY26: 7.4% (पूर्व में 7.3%)
- Q1 FY27: 6.9%
- Q2 FY27: 7.0%
• सम्पूर्ण वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के वृद्धि अनुमान नई जीडीपी श्रृंखला के अधिसूचित होने के बाद जारी किए जाएंगे।
तरलता और बाह्य क्षेत्र:
• प्रणालीगत तरलता दैनिक आधार पर औसतन लगभग ₹75,000 करोड़ रही, जिसमें RBI तरलता प्रबंधन में सक्रिय रहा।
• जनवरी के अंत तक विदेशी मुद्रा भंडार $723.8 बिलियन के स्तर पर था, जो बाह्य स्थिरता को मजबूती प्रदान करता है।
नियामक और विकासात्मक उपाय
• RBI ने कम मूल्य के धोखाधड़ी वाले डिजिटल लेनदेन से होने वाले नुकसान के लिए ग्राहकों को ₹25,000 तक के मुआवजे का प्रस्ताव दिया है।
• निम्नलिखित विषयों पर मसौदा दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे:
- वित्तीय उत्पादों की गलत तरीके के बिक्री।
- ऋण वसूली प्रक्रियाएँ और वसूली एजेंट।
- अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन में ग्राहक की देयता को सीमित करना।
• ऋण प्रवाह और व्यापार सुगमता में सहायता हेतु:
- संपार्श्विक-मुक्त (Collateral-free) MSME ऋण सीमा को ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख करने का प्रस्ताव है।
- बैंकों को विवेकपूर्ण सुरक्षा उपायों के साथ REITs (रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट) को ऋण देने की अनुमति दी गई है।
- कुछ NBFCs को उनके आकार और गतिविधि मानदंडों के आधार पर पंजीकरण और शाखा खोलने के लिए मंजूरी लेने से छूट दी गई है।
मौद्रिक नीति समिति (MPC) के बारे में
• इसका गठन सितंबर 2016 में भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (RBI Act) की धारा 45ZB (1) के तहत किया गया था।
• उर्जित पटेल समिति ने MPC के गठन की सिफारिश की थी।
• MPC की प्राथमिक भूमिका मुद्रास्फीति लक्ष्य प्राप्त करने के लिए आवश्यक नीतिगत दर निर्धारित करना है।
• RBI अधिनियम की धारा 45ZB (2) के अनुसार, MPC में शामिल होते हैं:
- RBI के गवर्नर, जो पदेन अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं।
- पदेन सदस्य के रूप में RBI के डिप्टी गवर्नर, जो मौद्रिक नीति के लिए जिम्मेदार होते हैं।
- पदेन सदस्य के रूप में केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित RBI का एक अधिकारी।
- सदस्यों के रूप में केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त तीन व्यक्ति।
• केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त सदस्य चार वर्ष की अवधि के लिए या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, अपना पद धारण करते हैं।
• RBI अधिनियम की धारा 45ZA के अनुसार, मुद्रास्फीति का लक्ष्य 4% निर्धारित किया गया है, जिसमें ऊपरी सहिष्णुता स्तर 6% और निचला सहिष्णुता स्तर 2% है।
- यदि मुद्रास्फीति लगातार तीन तिमाहियों तक 6% से अधिक या 2% से कम बनी रहती है, तो इसे लक्ष्य प्राप्त करने में विफलता माना जाता है।
