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सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप, उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से संबंधित विषय।

संदर्भ: राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 के वर्तमान में लागू किए जा रहे प्रावधान मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्तर के खेल निकायों जैसे-राष्ट्रीय ओलंपिक समिति, राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति, राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSFs) और क्षेत्रीय खेल महासंघों की स्थापना और उनके प्रशासनिक ढांचे को विनियमित करने से संबंधित हैं।

अन्य संबंधित जानकारी

  • केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के आंशिक रूप से लागू होने के साथ ही, देश में राष्ट्रीय खेल बोर्ड (NSB) और एक समर्पित खेल न्यायाधिकरण के गठन की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है।
  • इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, सभी मान्यता प्राप्त खेल निकायों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे निर्वाचन प्रक्रिया के उपरांत अपनी कार्यकारी समितियों का पुनर्गठन करें।
  • अधिनियम के अनुसार, कार्यकारी समितियों की सदस्य संख्या अधिकतम 15 निर्धारित की गई है, जिसमें एथलीटों की भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु कम से कम दो मेधावी खिलाड़ियों (SOM) का शामिल होना अनिवार्य है।
  • अधिनियम के आंशिक रूप से प्रभावी होने के साथ ही, निगरानी और विवाद समाधान संस्थानों की स्थापना की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
  • आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, इस अधिनियम की निम्नलिखित धाराएँ 1 जनवरी, 2026 से लागू हो गईं हैं:
  • धारा 1 to 3: प्रारंभिक और परिभाषाएं
  • धारा 4 (1, 2, 4): राष्ट्रीय खेल निकायों की स्थापना
  • धारा 5 (1, 2): अनुपालन और प्रशासन ढांचा
  • धारा 14 और 15: राष्ट्रीय खेल बोर्ड से संबंधित प्रावधान
  • धारा 17 (1-7, 10):  निर्वाचन प्रक्रियाएं और NSEP (राष्ट्रीय खेल निर्वाचन पैनल
  • धारा 30 और 31: राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण का गठन और शक्तियाँ
  • धारा 33 से 38: नियम बनाने की शक्तियां और पूरक प्रावधान

राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025:

  • यह भारत में खेल प्रशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक कानून है, जो राष्ट्रीय खेल संस्थाओं के कामकाज को नियंत्रित करने के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है।
  • वर्ष 2011 की स्वैच्छिक खेल संहिता को प्रतिस्थापित करते हुए, यह कानून जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु एक अनिवार्य ढांचा प्रदान करता है, जो 2036 ओलंपिक के आयोजन हेतु भारत की दावेदारी प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • यह अधिनियम भारतीय खेलों की निगरानी के लिए तीन प्राथमिक वैधानिक निकायों की स्थापना का प्रावधान करता है:
  • राष्ट्रीय खेल बोर्ड (NSB): यह शीर्ष नियामक प्राधिकरण है, जिसके पास राष्ट्रीय खेल संस्थाओं की मान्यता स्वीकृत करने, उनके नवीनीकरण और उन्हें निरस्त करने का अधिकार है। यह न केवल वित्तीय परिचालन की निगरानी करता है, बल्कि एथलीट कल्याण और निधियों के दुरुपयोग जैसे गंभीर विषयों की भी जांच कर सकता है।
  • राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण (NST): खेल से संबंधित विवादों के न्यायनिर्णयन के लिए एक विशेष निकाय, जिसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश अथवा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश करेंगे। इसके निर्णयों के विरुद्ध तब तक सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है, जब तक कि अंतर्राष्ट्रीय नियमों के तहत स्विट्जरलैंड स्थित खेल मध्यस्थता न्यायालय (CAS) में अपील की आवश्यकता न पड़े।
  • राष्ट्रीय खेल निर्वाचन पैनल (NSEP): यह सेवानिवृत्त निर्वाचन अधिकारियों (जैसे पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों) का एक उच्च-स्तरीय पैनल है। इसका मुख्य कार्य राष्ट्रीय खेल निकायों की कार्यकारी समितियों हेतु पारदर्शी, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करना और उसकी निगरानी करना है।

अधिनियम का महत्त्व

  • “सत्ता के एकाधिकार” का अंत: इस अधिनियम का उद्देश्य सत्ता के एकाधिकार का अंत करने के लिए सख्त आयु सीमा (आमतौर पर 70 वर्ष) और कार्यकाल की सीमाएं लागू करके खेल निकायों में राजनीतिक अभिजात वर्ग के लंबे समय से चले आ रहे प्रभुत्व को समाप्त करना है।
  • विधायी मान्यता: यह अधिनियम 2011 की ‘राष्ट्रीय खेल विकास संहिता’ के स्थान पर एक वैधानिक तंत्र स्थापित करता है। यह सरकार और नियामक संस्थाओं को खेल निकायों में पारदर्शिता तथा वित्तीय शुचिता सुनिश्चित करने हेतु अनिवार्य कानूनी शक्ति प्रदान करता है।
  • वैश्विक संरेखण: यह अधिनियम भारतीय खेल शासन को ओलंपिक और पैरालंपिक चार्टर तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों (IOC/FIFA) के अनुरूप बनाता है, जो 2036 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत की दावेदारी हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • एथलीट-केंद्रित प्रशासन: यह निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में एथलीटों को शामिल करना अनिवार्य बनाता है, जिसमें यह शर्त भी रखी गई है कि कार्यकारी समितियों में कम से कम दो “उत्कृष्ट मेधावी खिलाड़ी” और चार महिलाएँ होनी चाहिए।

Source:
Thehindu
Swarajyamag
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