संदर्भ :

हाल ही में, एक राज्यसभा सांसद ने एक विवादास्पद टिप्पणी करी कि राजपूत शासक सांगा ने 16वीं शताब्दी में इब्राहिम लोदी को हराने के लिए मुगल आक्रमणकारी बाबर को भारतीय उपमहाद्वीप में “आमंत्रित” किया था।
राणा सांगा
- राणा सांगा , जिन्हें महाराणा संग्राम सिंह के नाम से भी जाना जाता है , सिसोदिया राजवंश से मेवाड़ के एक राजपूत शासक थे।
- उनका जन्म 1482 में हुआ था, उन्होंने 1508 और 1528 ई. के बीच मेवाड़ पर शासन किया और राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुछ हिस्सों में अपने साम्राज्य का विस्तार किया।
ऐतिहासिक तथ्य
वह मेवाड़ के एक बहादुर शासक थे और उन्होंने अपने जीवन में 100 से अधिक युद्ध लड़े।
खतोली का युद्ध (1517): इस युद्ध में राणा सांगा ने दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी को पराजित किया था।
धौलपुर का युद्ध (1518 ): राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी के विरुद्ध एक और जीत हासिल की , जिससे पूर्वी राजस्थान में उनके प्रभाव का विस्तार हुआ।
गागरोन का युद्ध (1519): राणा सांगा ने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी द्वितीय को पराजित कर क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की थी।
बयाना का युद्ध (1527): राणा सांगा ने बाबर को हराया।
खानवा का युद्ध (1527): राणा सांगा के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण युद्ध था, जो 17 मार्च 1527 को मुगल सम्राट बाबर के विरुद्ध लड़ा गया था।
- विशाल सेना होने के बावजूद, वह युद्ध में पराजित हुए, जिससे अंततः उत्तरी भारत में मुगल शासन मजबूत हो गया।
पराजय के बावजूद राणा सांगा ने अपना प्रतिरोध नहीं छोड़ा और गुरिल्ला युद्ध रणनीति की एक श्रृंखला के माध्यम से मुगल विस्तार का विरोध जारी रखा।
- उन्होंने मुगल खतरे का मुकाबला करने के लिए गुजरात के सुल्तान सहित दस “कुफ़्फ़ार” (गैर-मुस्लिम) सरदारों का गठबंधन बनाया।
घाघरा का युद्ध (1527): राणा सांगा ने पुन: मुगलों के विरूद्ध सेना का नेतृत्व किया लेकिन मुगलों की बेहतर सैन्य रणनीति और अपने एक राज-द्रोही के हस्तक्षेप के कारण पराजित हो गये।
राणा सांगा कला और साहित्य के संरक्षक थे। उन्होंने कई कलाकारों और कवियों का समर्थन किया, जिनमें प्रसिद्ध कवि मलिक मुहम्मद जायसी भी शामिल हैं, जिन्होंने महाकाव्य पद्मावत लिखा था ।
उनकी वीरता के कारण उन्हें ‘हिन्दूपत’ की उपाधि दी गई ।
क्या राणा सांगा ने बाबर को भारत आमंत्रित किया था?
इतिहासकारों का मानना है कि पंजाब के गवर्नर दौलत खां को पता था कि फरगना का शासक बाबर अफगानिस्तान पर विजय प्राप्त करने के बाद भारत आ रहा है।
इसी समय इब्राहिम लोदी के चाचा आलम खान भी सल्तनत पर कब्ज़ा करना चाहते थे।
- आलम खान और दौलत खान ने बाबर को भारत आने का निमंत्रण दिया।
1523 में बाबर को दिल्ली सल्तनत के प्रमुख लोगों ने भारत आने का निमंत्रण दिया। इनमें सुल्तान सिकंदर लोदी के भाई आलम खान लोदी, पंजाब के गवर्नर दौलत खान लोदी और इब्राहिम लोदी के चाचा अलाउद्दीन लोदी शामिल थे।
बाबरनामा ” के अनुसार , राणा सांगा ने अपनी शुभकामनाओं को व्यक्त करने के लिए एक दूत भेजा था और दिल्ली पर कब्जा करने की योजना प्रस्तावित की थी।
बाबर के चचेरे भाई मिर्जा हैदर दुगलत द्वारा लिखित तारीख- ए -रशीदी में भी इसी प्रकार के तर्क बताए गए थे ।
हालाँकि इतिहासकार जीएन शर्मा ने इस दावे को खारिज कर दिया और तर्क दिया कि बाबर को सहयोगी की आवश्यकता थी, राणा सांगा को नहीं।