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सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप, उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन से संबंधित विषय।

सामान्य अध्ययन -3: संचार नेटवर्कों के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौतियाँ; सुरक्षा चुनौतियाँ और सीमावर्ती क्षेत्रों में उनका प्रबंधन।

संदर्भ: हाल ही में, रक्षा मंत्रालय ने रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2026 का मसौदा जारी किया, जिसके लिए सभी हितधारकों से सुझाव और टिप्पणियाँ आमंत्रित की गई हैं।

अन्य संबंधित जानकारी

• DAP 2026 का मसौदा वर्तमान में प्रभावी DAP 2020 को प्रतिस्थापित करेगा।

• रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया रक्षा मंत्रालय द्वारा किए जाने वाले पूंजीगत अधिग्रहण  के लिए आधारभूत ढांचे के रूप में कार्य करती है।

• इसका प्राथमिक उद्देश्य सशक्त जुड़ाव, आत्मनिर्भरता एवं एकीकरण, सेना का आधुनिकीकरण और उत्पादन के विस्तार के साथ अधिग्रहण की गति में वृद्धि करना है, जिससे देश में रक्षा इकोसिस्टम का विकास और प्रगति हो सके।

• प्रस्तावित मसौदे का लक्ष्य भारत के रक्षा अधिग्रहण को तेजी से बदलते भू-रणनीतिक परिदृश्य, भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास, मानव पूंजी के कौशल विकास, निजी रक्षा उद्योग के विकास और आधुनिक युद्ध की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है।

• नई नीति भारत का ध्यान “मेड इन इंडिया” (भारत में निर्मित) से स्थानांतरित कर “ओन्ड बाय इंडिया” (भारत के स्वामित्व में) पर केंद्रित करती है, जिसमें घरेलू बौद्धिक संपदा (IP), डिजाइन प्राधिकार  और सोर्स कोड तक पहुंच पर बल दिया गया है।

• वर्तमान में यह मसौदा 3 मार्च, 2026 तक रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए उपलब्ध है।

DAP 2020 की तुलना में DAP 2026 में प्रस्तावित मुख्य बदलाव

प्रमुख संरचनात्मक और स्वदेशी सुधार

• स्वदेशी सामग्री (IC) में वृद्धि: ‘बाय इंडियन-IDDM’ (भारतीय स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित) श्रेणी के लिए स्वदेशी सामग्री की आवश्यकता को 50% से बढ़ाकर 60% कर दिया गया है।

• श्रेणी का सरलीकरण: अधिग्रहण ढांचे को सुचारू बनाने के लिए खरीद श्रेणियों की संख्या पाँच से घटाकर चार कर दी गई है।

• अनिवार्य डिजाइन परिभाषा: पहली बार “स्वदेशी डिजाइन” को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है ताकि वास्तविक घरेलू विकास सुनिश्चित हो सके और विदेशी तकनीक की ‘रीब्रांडिंग’ को रोका जा सके।

• प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर (TRL): उत्पादों की परिपक्वता के साथ खरीद को बेहतर ढंग से संरेखित करने के लिए एक नई TRL-आधारित वर्गीकरण प्रणाली शुरू की गई है।

 विषय विशेषज्ञों की सहभागिता: मसौदे में ‘सेवा गुणात्मक आवश्यकताओं’ (SQRs) को अंतिम रूप देने और परीक्षणों की निगरानी में विषय विशेषज्ञों को शामिल करने का प्रस्ताव है।

गति और सरलीकरण के उपाय

• नए खरीद मार्ग:

  • अल्प-लागत पूंजीगत अधिग्रहण (LCCA): भारतीय विक्रेताओं से थोक में शामिल करने से पहले परीक्षण और मूल्यांकन के लिए उपकरण प्राप्त करने हेतु ‘LCCA’ नामक एक नई श्रेणी पेश की गई है।
  • दीर्घकालिक थोक अधिग्रहण (LTBA): पूंजी-प्रधान, उच्च-तकनीकी एवं जटिल उपकरणों, प्रणालियों, प्लेटफॉर्मों और गोला-बारूद के अधिग्रहण के लिए एक ‘दीर्घकालिक थोक अधिग्रहण’ (LTBA) प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इसके माध्यम से भारतीय और विदेशी स्रोतों से लंबी अवधि में और ‘बहु-किस्तों’ में खरीद की जाएगी, जिसमें क्रमिक स्वदेशीकरण और उन्नयन के प्रावधान शामिल हैं।

• परिष्कृत परीक्षण प्रक्रियाएं:

  • समयसीमा को त्वरित करने के लिए द्वि-चरणीय परीक्षण और गुणवत्ता आश्वासन (QA) परीक्षण के विकल्प पेश किए गए हैं।
  • परीक्षण-योग्य विक्रेताओं के लिए मुआवजा: परीक्षणों में सफलतापूर्वक अर्हता प्राप्त करने वाले सभी विक्रेताओं को अब परीक्षण लागत के लिए मुआवजा दिया जाएगा।

• फास्ट ट्रैक प्रक्रिया (FTP): उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए शक्तियों के अधोगामी प्रत्यायोजन के साथ FTP को परिष्कृत किया गया है।

उद्योग और स्टार्ट-अप सशक्तिकरण

• आदेशों का आश्वासन: ‘Make’ और ‘iDEX’ परियोजनाओं को अब पाँच वर्षों के सुनिश्चित आदेशों और  क्रमिक उन्नयन के प्रावधानों के साथ जोड़ा गया है।

• एकल विक्रेता वाले मामले: उच्च-परिपक्वता उपकरणों (TRL 6 से 9) के लिए ‘Buy (Indian-IDDM)’ श्रेणी में आरंभिक स्तर पर ही एकल-विक्रेता खरीद की अनुमति दी गई है।

• समयसीमा की निगरानी: अधिग्रहण समय-सारणी का पालन सुनिश्चित करने के लिए अब ‘सूचना हेतु अनुरोध’ (RFI) चरण से ही ट्रैकिंग शुरू की जाएगी।

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2026 का महत्व

• रक्षा में आत्मनिर्भर भारत का सुदृढ़ीकरण: DAP 2026 ‘बाय इंडियन-IDDM’ को वरीयता देकर आयात पर निर्भरता कम करता है और घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देता है।

• पूंजीगत खरीद और सेना के आधुनिकीकरण में तेजी: यह आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप उन्नत सैन्य प्लेटफार्मों की तीव्र खरीद सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रियाओं को सुचारू करता है।

• स्वदेशी डिजाइन और बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) का संवर्धन: नीति स्वदेशी डिजाइनिंग और IPR को बनाए रखने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करती है ताकि भारत की दीर्घकालिक तकनीकी और नवाचार क्षमता को सुदृढ़ किया जा सके।

• रक्षा विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा: DAP 2026 एमएसएमई (MSMEs) सहित निजी उद्योग की भागीदारी का समर्थन करता है और रक्षा निर्यात को बढ़ावा देता है, जिससे राष्ट्रीय रक्षा इकोसिस्टम मजबूत होता है और आर्थिक विकास में योगदान देता है।

Source:
The Hindu
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