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सामान्य अध्ययन-3: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-प्रौद्योगिकी, जैव-प्रौद्योगिकी और बौद्धिक संपदा अधिकार से संबंधित प्रमुख विषयों के क्षेत्र में जागरूकता।

संदर्भ: हाल ही में, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने मिलिट्री क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क जारी किया। यह एक व्यापक दस्तावेज़ है जिसमें सशस्त्र बलों में क्वांटम प्रौद्योगिकियों के कार्यान्वयन की नीति और रोडमैप शामिल है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने 22 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में थल सेना, नौसेना और वायु सेना के प्रमुखों तथा वरिष्ठ रक्षा नेतृत्व की उपस्थिति में इस फ्रेमवर्क को जारी किया।
  • यह दस्तावेज़ भारतीय सशस्त्र बलों में क्वांटम प्रौद्योगिकियों को शामिल करने के लिए नीतिगत विजन और कार्यान्वयन रोडमैप निर्धारित करता है।

मिलिट्री क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क की मुख्य विशेषताएँ

  • उद्देश्य: भविष्य के युद्धों के लिए तैयार रहने और तेजी से बदलती दुनिया में तकनीकी प्रभुत्व प्राप्त करने हेतु सशस्त्र बलों के तीनों अंगों में क्वांटम के निम्नलिखित चार स्तंभों को एकीकृत करना:
    • क्वांटम कम्युनिकेशन: अत्यंत सुरक्षित सैन्य संचार नेटवर्क को सक्षम बनाना।
    • क्वांटम कंप्यूटिंग: रक्षा अनुप्रयोगों के लिए हाई-स्पीड गणना (Computation) को बढ़ावा देना।
    • क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी: दुर्गम वातावरण में नेविगेशन सटीकता और पहचान क्षमताओं में सुधार करना।
    • क्वांटम सामग्री और उपकरण: अगली पीढ़ी के रक्षा प्लेटफॉर्म और हार्डवेयर का समर्थन।
  • आगे की राह को परिभाषित करना:
    • क्वांटम प्रौद्योगिकियों के एकीकरण में सामंजस्य और राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के साथ संरेखण, जिसका रक्षा बल एक अभिन्न अंग हैं।
    • रक्षा बलों में इस विशिष्ट क्षेत्र के कार्यान्वयन के लिए एक सांकेतिक रोडमैप और नीति तैयार करना।
  • नागरिक-सैन्य एकीकरण : यह दस्तावेज़ विभिन्न सरकारी क्षेत्रों के सदस्यों से बने समर्पित शासी निकायों के माध्यम से नागरिक-सैन्य एकीकरण का उपयोग करके प्राप्त किए जाने वाले लक्ष्यों और उपलब्धियों पर प्रकाश डालता है।
  • भविष्य के युद्धों के लिए तत्परता: यह फेमवर्क भविष्य के युद्धक्षेत्र में तकनीकी सर्वोच्चता प्राप्त करने हेतु क्वांटम तकनीक को अपनाने में संयुक्तता और एकीकरण की आवश्यकता पर बल देता है।

संस्थागत और रणनीतिक महत्त्व

  • त्रि-सेवाओं में समेकित अनुपालन: यह नीति थल सेना, नौसेना और वायु सेना में संयुक्तता और एकीकरण की आवश्यकता पर बल देती है, जिससे अंतर-संचालनीयता में वृद्धि होगी।
  • नागरिक-सैन्य एकीकरण: अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के साथ सहयोग से आंतरिक विशेषज्ञता और कौशल पूल विकसित होगा, जिससे तकनीकी विकास में तेजी आएगी।
  • उभरते क्वांटम युद्ध परिदृश्य में रणनीतिक सर्वोच्चता:  यह फ्रेमवर्क वैश्विक सैन्य रुझानों को दर्शाता है जहाँ क्वांटम और ‘पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी’ रणनीतिक प्राथमिकताएं बन रही हैं।
  • राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अनुरूप: यह सशस्त्र बलों के तीनों अंगों के मध्य समन्वय स्थापित कर सेना में नवोन्मेषी क्वांटम प्रणालियों के समावेशन का मार्ग प्रशस्त करता है।

रक्षा क्षेत्र के हितधारकों द्वारा वर्तमान में संचालित क्वांटम-संबंधित अनुसंधान पहल:

  • रक्षा अनुसंधान और विकास परिषद (DRDO) राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत एक प्रमुख हितधारक है। इसने मई 2025 में दिल्ली में ‘क्वांटम प्रौद्योगिकी अनुसंधान केंद्र’ की स्थापना की थी।
  • थल सेना, महू स्थित सैन्य दूरसंचार इंजीनियरिंग कॉलेज (MCTE) में एक क्वांटम प्रयोगशाला का संचालन करती है।
  • वायु सेना  ‘उड़ान’ फ्रेमवर्क के तहत एक एआई उत्कृष्टता केंद्र का संचालन करती है।
  • नौसेना सुरक्षित क्वांटम-आधारित समुद्री संचार के लिए रमन अनुसंधान संस्थान (RRI) के साथ सहयोग करती है।

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