संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-1: दक्षिण एशिया एवं भारतीय उपमहाद्वीप सहित विश्व भर में प्रमुख प्राकृतिक संसाधनों का वितरण ।

संदर्भ: हाल ही में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) ने भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में गहरे समुद्र एवं दूरस्थ-जलीय मत्स्य संसाधनों पर राष्ट्रीय रिपोर्ट जारी की। यह रिपोर्ट लगभग चार दशकों के समुद्र-विज्ञान संबंधी अनुसंधान और तीन दशकों के व्यवस्थित सर्वेक्षणों को संकलित करती है। भारत का अनन्य आर्थिक क्षेत्र लगभग 23.7 लाख वर्ग किमी है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

• दीर्घकालिक वैज्ञानिक आकलन: रिपोर्ट में 1990 के दशक की शुरुआत से मरीन लिविंग रिसोर्स प्रोग्राम के अंतर्गत किए गए 400 से अधिक समुद्री अनुसंधान अभियानों के निष्कर्षों को संकलित किया गया है।

• मत्स्य अनुसंधान पोत: मत्स्य एवं समुद्र-विज्ञान अनुसंधान पोत (FORV) सागर संपदा ने अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, लक्षद्वीप के जलक्षेत्र, अंडमान सागर तथा दक्षिणी महासागर में बहुविषयक सर्वेक्षणों के लिए एक फ्लोटिंग प्रयोगशाला के रूप में कार्य किया।

• मेसोपेलेजिक “ट्विलाइट ज़ोन”: 200–1,000 मीटर गहराई वाला यह क्षेत्र लैंटर्न मछलियों, गहरे समुद्र के झींगों और सेफेलोपोड्स की सघन आबादी का समर्थन करता है। इन जीवों का ऊर्ध्वाधर प्रवास महासागर के जैविक कार्बन पंप और जलवायु विनियमन में योगदान देता है।

• गहरे समुद्र के तलवासी संसाधन: 200 मीटर से अधिक गहराई में महाद्वीपीय ढाल पर गहरे समुद्र के झींगे, पर्च, स्कॉम्ब्रॉइड्स, चपटी मछलियाँ और ईल जैसे संभावित रूप से महत्वपूर्ण संसाधन पाए जाते हैं।

• दूरस्थ-जलीय संसाधन: रिपोर्ट में उच्च-मूल्य वाले खुले महासागरीय एवं गहरे जल के संसाधनों में टूना, बिलफिश, शार्क, समुद्री स्क्विड और अंटार्कटिक क्रिल को शामिल किया गया है।

• जैव विविधता हॉटस्पॉट: महत्वपूर्ण पारिस्थितिक आवास एवं नर्सरी क्षेत्र कोल्लम बैंक, एंग्रिया बैंक, मंगलुरु के समीप गहरे समुद्र की ढाल, तिरुवनंतपुरम के समीप टेरेस तथा लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में पाए गए हैं।

• प्रौद्योगिकी-आधारित आकलन: रिपोर्ट में मत्स्य ध्वनिकी (Fisheries Acoustics), पर्यावरणीय डीएनए (eDNA), स्वायत्त अवलोकन प्लेटफॉर्म, उपग्रह अवलोकन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा उन्नत पारिस्थितिकी तंत्र मॉडलिंग के एकीकरण पर बल दिया गया है। इसका उद्देश्य समुद्री स्थानिक नियोजन (Marine Spatial Planning) के लिए एक अत्याधुनिक ढाँचा स्थापित करना है।

प्रमुख सिफारिशें

  • सतत दोहन को बढ़ावा देना: गहरे समुद्र के संसाधनों का दोहन अवसंरचना, मानव क्षमता विकास तथा एक मजबूत निगरानी, नियंत्रण एवं सर्विलांस (MCS) व्यवस्था विकसित करने के बाद किया जाना चाहिए। इसके लिए वाणिज्यिक मत्स्य संसाधनों से संबंधित उपलब्ध वैज्ञानिक एवं तकनीकी जानकारी का उपयोग किया जाना चाहिए।
  • अवसंरचना एवं मानव क्षमता का विकास: गहरे समुद्र में मत्स्य पालन के विकास के लिए उपयुक्त अवसंरचना और मानव क्षमता का विकास आवश्यक है।
  • निगरानी, नियंत्रण एवं सर्विलांस को मजबूत करना: गहरे समुद्र के संसाधनों के सतत उपयोग के लिए एक मजबूत निगरानी, नियंत्रण एवं सर्विलांस (MCS) व्यवस्था आवश्यक है।
  • वैज्ञानिक एवं तकनीकी जानकारी का उपयोग: गहरे समुद्र के संसाधनों के सतत दोहन के लिए वाणिज्यिक मत्स्य संसाधनों से संबंधित उपलब्ध वैज्ञानिक एवं तकनीकी जानकारी को आधार बनाया जाना चाहिए।

गहरे समुद्र एवं दूरस्थ-जलीय मत्स्य संसाधन

• मेसोपेलेजिक संसाधन: 200–1,000 मीटर गहराई वाला मेसोपेलाजिक क्षेत्र लालटेन मछलियों, गहरे समुद्र के झींगों और सेफेलोपोड्स का समर्थन करता है।

• गहरे समुद्र के तलवासी संसाधन: 200 मीटर से अधिक गहराई वाली महाद्वीपीय ढाल में गहरे समुद्र के झींगे, पर्च, स्कॉम्ब्रॉइड्स, चपटी मछलियाँ और ईल पाए जाते हैं।

• दूरस्थ-जलीय संसाधन: दूरस्थ-जलीय संसाधनों में टूना, बिलफिश, शार्क, समुद्री स्क्विड और अंटार्कटिक क्रिल शामिल हैं।

• गैर-पारंपरिक संसाधन: भारतीय अनन्य आर्थिक क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में अप्रयुक्त एवं गैर-पारंपरिक संसाधन मौजूद हैं, जिनमें गहरे समुद्र के झींगे, गहरे समुद्र के लॉबस्टर, स्क्विड, माइकोटोफिड्स तथा गहरे समुद्र की कई मछली प्रजातियाँ शामिल हैं।

• टूना एवं टूना-सदृश संसाधन: महासागरीय टूना संसाधनों में येलोफिन टूना, बिगआई टूना और स्किपजैक टूना शामिल हैं। टूना एवं टूना-सदृश प्रजातियाँ महत्वपूर्ण महासागरीय संसाधन हैं।

महत्त्व

• ब्लू इकोनॉमी एवं सततता: संसाधन आकलन, पोषण सुरक्षा, जैविक कार्बन पंप के माध्यम से जलवायु विनियमन तथा समुद्री जैव विविधता संरक्षण द्वारा सतत ब्लू इकोनॉमी के विकास में सहायता करता है।

• विजन 2047: यह रिपोर्ट विजन 2047 को बल प्रदान करती है, जिसमें ब्लू इकोनॉमी को राष्ट्रीय विकास के प्रमुख स्तंभ के रूप में प्राथमिकता दी गई है।

• वैश्विक प्रतिबद्धताएँ: यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य-14 (जल के नीचे जीवन) तथा सतत विकास के लिए समुद्र विज्ञान के संयुक्त राष्ट्र दशक के प्रति भारत की प्रतिबद्धताओं को रेखांकित करती है।

• समुद्री स्थानिक नियोजन: मत्स्य ध्वनिकी, पर्यावरणीय DNA, स्वायत्त अवलोकन प्लेटफॉर्म, उपग्रह अवलोकन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा उन्नत पारिस्थितिकी तंत्र मॉडलिंग का एकीकरण समुद्री स्थानिक नियोजन के लिए एक अत्याधुनिक ढाँचा स्थापित करता है।

Shares: