संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय|
संदर्भ: हाल ही में, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने भारत की बदलती आर्थिक संरचना को बेहतर ढंग से प्रदर्शित करने के लिए कार्यप्रणाली और डेटा सुधारों के साथ, पिछली 2011-12 की श्रृंखला के स्थान पर 2022-23 आधार वर्ष के साथ एक नई जीडीपी श्रृंखला जारी की।
अन्य संबंधित जानकारी
• जीडीपी विकास परिप्रेक्ष्य: MoSPI द्वारा जारी दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.6% रहने का अनुमान है, जो 2024-25 के 7.1% से अधिक है।
• त्रैमासिक विकास प्रवृत्ति: तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) में जीडीपी 7.8% की दर से बढ़ा, जो सतत आर्थिक गति को दर्शाता है।
• नई श्रृंखला के तहत पिछली जीडीपी वृद्धि दर के आंकड़ों का पुनरीक्षण:
- 2023–24: संशोधित होकर 7.2% (पहले 9.2%)।
- 2024–25: संशोधित होकर 7.1% (पहले 6.5%)।

• अर्थव्यवस्था का आकार: 2025-26 के लिए सांकेतिक (Nominal) जीडीपी ₹345.47 लाख करोड़ अनुमानित है, जबकि वास्तविक (Real) जीडीपी ₹322.58 लाख करोड़ रहने का अनुमान है।
• क्षेत्रीय विकास प्रवृत्तियाँ (वित्त वर्ष 2025–26):
- द्वितीयक क्षेत्रक: मुख्य रूप से विनिर्माण (≈12.5%) द्वारा संचालित 9.5% की अनुमानित वृद्धि।
- तृतीयक क्षेत्रक: व्यापार, परिवहन और वित्तीय सेवाओं के नेतृत्व में 8.9% की संभावित वृद्धि।
- प्राथमिक क्षेत्रक: कृषि और खनन में नरमी को दर्शाते हुए वृद्धि धीमी होकर 2.8% रहने की संभावना है।
प्रमुख कार्यप्रणालीगत सुधार
• दोहरी अपस्फीति (Double Deflation) विधि: विनिर्माण और कृषि में पहले की ‘एकल-अपस्फीति’ विधि को ‘दोहरी अपस्फीति’ से बदल दिया गया है। यह मुद्रास्फीति के लिए इनपुट और आउटपुट दोनों को अलग-अलग समायोजित करती है, जिससे वास्तविक विकास की अधिक सटीक माप मिलती है।
• विस्तृत अपस्फीति रणनीति (Granular Deflation Strategy): अब समग्र-स्तर के समायोजन के बजाय मद-वार स्तर पर CPI, WPI और यूनिट वैल्यू इंडेक्स जैसे अपस्फीतिकारकों का उपयोग किया जाता है।
• आपूर्ति-उपयोग तालिकाओं (SUT) का एकीकरण: उत्पादन-आधारित और व्यय-आधारित जीडीपी अनुमानों के बीच विसंगतियों को कम करने के लिए SUT ढांचे को राष्ट्रीय खातों के साथ संरेखित किया गया है।
• बेहतर बेंचमार्किंग तकनीक: त्रैमासिक और वार्षिक डेटा के बीच बेहतर संरेखण सुनिश्चित करने के लिए, त्रैमासिक जीडीपी अनुमान प्राप्त करने हेतु पिछली ‘प्रो-राटा’ पद्धति को डेंटन आनुपातिक बेंचमार्किंग विधि से बदल दिया गया है।
• अनौपचारिक और घरेलू क्षेत्रों का बेहतर मापन: घरेलू क्षेत्र की गतिविधियों का अधिक सटीक अनुमान लगाने के लिए ASUSE और PLFS जैसे नियमित सर्वेक्षणों का उपयोग किया जाता है।
• निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) का बेहतर अनुमान: COICOP 2018 वर्गीकरण के साथ घरेलू उपभोग सर्वेक्षण, उत्पादन डेटा और कमोडिटी फ्लो विधियों के मिश्रित दृष्टिकोण को अपनाया गया है।
प्रयुक्त नए डेटा स्रोत
• जीएसटी (GST) डेटा – कॉर्पोरेट क्षेत्र के अनुमान और त्रैमासिक संकेतकों के लिए।
• ई-वाहन (e-Vahan) डेटाबेस – सड़क परिवहन से संबंधित खपत के अनुमान के लिए।
• सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (PFMS) – सरकारी खातों और व्यय डेटा के लिए।
• असंगठित क्षेत्र के उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण (ASUSE) – अनौपचारिक क्षेत्र की गतिविधि के लिए।
• आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) – रोजगार और श्रम बाजार अनुमानों के लिए।
• कॉर्पोरेट फाइलिंग (MCA-21) – कंपनियों के गतिविधि-वार मूल्यवर्धन के लिए।
आधार वर्ष में संशोधन क्यों किया गया?

• अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तनों को दर्शाना: समय के साथ, भारत की आर्थिक संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जिसमें सेवा क्षेत्र का जीडीपी में आधे से अधिक योगदान है, जबकि कृषि की सापेक्ष हिस्सेदारी कम हुई है। आधार वर्ष को अद्यतन करने से इन परिवर्तनों को सटीकता से मापने में मदद मिलती है।
• बेहतर और अद्यतन डेटा स्रोतों का उपयोग: डिजिटलीकरण और जीएसटी, PFMS एवं ई-वाहन जैसे प्रशासनिक डेटाबेस अधिक विश्वसनीय और सटीक आर्थिक डेटा प्रदान करते हैं।
• अनुमान पद्धति में सुधार: नई श्रृंखला में दोहरी अपस्फीति, विस्तृत अपस्फीतिकारकों, बेहतर बेंचमार्किंग तकनीक और आपूर्ति-उपयोग तालिकाओं जैसे कार्यप्रणालीगत अपग्रेड शामिल हैं।
• एक प्रतिनिधि बेंचमार्क वर्ष का चयन: वित्त वर्ष 2022-23 को आधार वर्ष के रूप में चुना गया क्योंकि यह 2019-21 के कोविड-19 व्यवधानों के बाद सबसे हालिया “सामान्य” वर्ष है।
• अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकीय मानकों के साथ संरेखण: यह संशोधन राष्ट्रीय लेखा प्रणाली (SNA 2008) और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप वैश्विक स्तर की सर्वोत्तम पद्धतियों का अनुसरण करता है।
नए आधार वर्ष को अपनाने के निहितार्थ
• आर्थिक गतिविधि का अधिक सटीक मापन: उन्नत कार्यपद्धतियाँ और नए डेटा स्रोत वास्तविक जीडीपी वृद्धि के अधिक विश्वसनीय अनुमान प्रदान करते हैं।
• उभरते क्षेत्रों का बेहतर समावेशन: संशोधित ढांचा डिजिटल सेवाओं, प्लेटफॉर्म इकोनॉमी और गिग वर्क के योगदान को अधिक सटीक रूप से मापता है।
• राजकोषीय अनुपातों में परिवर्तन: चूंकि सांकेतिक जीडीपी अनुमान पिछली गणनाओं की तुलना में थोड़े कम हैं, इसलिए राजकोषीय घाटा-जीडीपी अनुपात और ऋण-जीडीपी अनुपात उच्च दिखाई दे सकते हैं, भले ही घाटे की राशि अपरिवर्तित रहे।
• बेहतर नीति निर्माण: सटीक डेटा नीति निर्माताओं और निवेशकों को बेहतर आर्थिक योजना बनाने में मदद करता है।
• भारत की सांख्यिकीय प्रणाली का आधुनिकीकरण: यह संशोधन व्यापक सांख्यिकीय सुधारों का हिस्सा है, जिसमें CPI, IIP और WPI के आधार वर्षों को अद्यतन करना भी शामिल है।
