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सामान्य अध्ययन-3: अंतरिक्ष के क्षेत्र में जागरूकता।

संदर्भ: हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने तेलंगाना के हैदराबाद में स्काईरूट के ‘इन्फिनिटी कैंपस’ का उद्घाटन किया।

अन्य संबंधित जानकारी

• प्रधानमंत्री ने स्काईरूट के पहले कक्षीय रॉकेट ‘विक्रम-1’ का भी अनावरण किया। इसमें उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने की क्षमता है।

• उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के अंतरिक्ष सुधार जैसे-अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलना, IN-SPACe की स्थापना, और स्टार्ट-अप्स को सक्षम बनाना, देश को एक प्रमुख वैश्विक स्पेस लॉन्च हब में बदल रहे हैं।

• उन्होंने राष्ट्रीय अनुसंधान फ़ाउंडेशन, वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन, और 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष के माध्यम से अनुसंधान को गति देने के सरकार के प्रयासों को रेखांकित किया।

• प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत का लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में अपनी प्रक्षेपण क्षमता को बढ़ाना और अंतरिक्ष क्षेत्र में पाँच नए यूनिकॉर्न स्थापित करना है।

स्काईरूट का इन्फिनिटी कैंपस

• इन्फिनिटी कैंपस का उद्घाटन एक अत्याधुनिक सुविधा के रूप में किया गया, जिसे प्रक्षेपण वाहनों के संपूर्ण विकास में सहायता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

• यह सुविधा भारत में निजी अंतरिक्ष कंपनियों की उन्नत होती क्षमता का प्रतीक है और देश के मुक्त तथा नवाचार-प्रधान अंतरिक्ष इकोसिस्टम की ओर संक्रमण को दर्शाती है।

• यह कैंपस कक्षीय रॉकेटों के डिज़ाइन, एकीकरण, परीक्षण और विनिर्माण प्रक्रियाओं को तीव्र कर सकता है, जिससे भारत की निजी प्रक्षेपण अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण होगा।

विक्रम-I रॉकेट

• कंपनी के पूर्ववर्ती उप-कक्षीय मिशन की सफलता के बाद, स्काईरूट का पहला कक्षीय रॉकेट विक्रम-I भारत की निजी अंतरिक्ष उड़ान क्षमता में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

• विक्रम-I को छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए बनाया गया है, ताकि वैश्विक स्तर पर बढ़ती मांग और दुनिया भर में बढ़ती प्रक्षेपण आवृत्तियों की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

• विक्रम-I रॉकेट, विक्रम श्रृंखला का पहला रॉकेट है और इसमें तीन ठोस ईंधन चरण (Solid-Fuel Stages) हैं, जिनमें से प्रत्येक का जलने का समय लगभग 80 से 100 सेकंड है।

• चौथे और अंतिम चरण में रमन इंजन का उपयोग किया जाता है, जो मोनोमिथाइलहाइड्राज़िन (MMH) और नाइट्रोजन टेट्रॉक्साइड (NTO) द्रव प्रणोदकों का उपयोग करता है और इसमें चार इंजनों का समूह (क्लस्टर) होता है।

• रमन इंजन क्लास कुल 3.4 kN का प्रणोद (थ्रस्ट) उत्पन्न करता है और मिशन के अंतिम चरण में सटीक कक्षीय समायोजन के लिए उपयोग किया जाता है।

• रॉकेट को 290 किलोग्राम के पेलोड को 500 किमी ऊँचाई की सूर्य समकालिक ध्रुवीय कक्षा में स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह 500 किमी ऊँचाई पर 45° झुकी हुई लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 480 किलोग्राम के पेलोड को भी ले जा सकने में सक्षम है।

• विक्रम-II को 2026 में प्रक्षेपित किया जाएगा।

Source:
Business Outreach
PM India
PIB

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