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सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करार।

संदर्भ: नई दिल्ली में संदर्भ की शर्तों (ToR) पर हस्ताक्षर करने के पश्चात, भारत और कनाडा ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के लिए वार्ता की शुरुआत की। यह वार्ता द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को प्रगाढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • वार्ताओं का शुभारंभ G7 शिखर सम्मेलन 2025 के दौरान दोनों नेताओं के मध्य हुई चर्चाओं के बाद हुआ है, जहाँ दोनों पक्षों ने संदर्भ की शर्तों को अंतिम रूप देने की दिशा में कार्य करने पर सहमति व्यक्त की।
  • ये वार्ताएं कूटनीतिक तनाव के दौर के बाद भारत-कनाडा द्विपक्षीय संबंधों को पुनः बहाल करने का संकेत हैं। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की यात्रा का उद्देश्य व्यावहारिक आर्थिक सहयोग को बढ़ाना है।
  • वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 8.66 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 4.22 बिलियन डॉलर और आयात 4.44 बिलियन डॉलर का रहा।
  • कनाडा को होने वाले प्रमुख भारतीय निर्यातों में औषधियां (ड्रग्स) और फार्मास्यूटिकल्स, लोहा और इस्पात, समुद्री उत्पाद, सूती वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स और रसायन शामिल हैं, जबकि कनाडा से होने वाले आयातों में दालें, कोयला, उर्वरक, मोती और अर्द्ध-कीमती पत्थर तथा कच्चा पेट्रोलियम सम्मिलित हैं।
  • कनाडा को भारत के सेवा निर्यातों में दूरसंचार, कंप्यूटर और सूचना सेवाओं तथा अन्य व्यावसायिक सेवाओं का अग्रणी स्थान है।
  • दोनों देशों का लक्ष्य CEPA के तहत गहन आर्थिक एकीकरण के माध्यम से 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाना है।

भारत-कनाडा CEPA हेतु संदर्भ की शर्तें

  • संदर्भ की शर्तों में भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर वार्ता के लिए रूपरेखा और कार्ययोजना (रोडमैप) का उल्लेख होता है।
  • यह वार्ता के दायरे, बैठकों के प्रारूप और आवृत्ति, तौर-तरीकों, वार्ता के दृष्टिकोण और बातचीत के संचालन के लिए प्रक्रियात्मक रोडमैप की रूपरेखा तैयार करती है।
  • ToR स्वयं में कोई व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि एक मार्गदर्शक फ्रेमवर्क है जो वार्ता प्रक्रिया को संरचित और सुगम बनाता है।
  • वार्ता फ्रेमवर्क के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र निम्नलिखित हैं:
    • वस्तुओं में व्यापार: सीमा शुल्क (टैरिफ) में कमी या समाप्ति, बाजार पहुंच, मूल के नियम (Rules of Origin), सीमा शुल्क प्रक्रियाएं और व्यापार को सुगम बनाना।
    • सेवाओं में व्यापार: सेवाओं की सीमा पार आपूर्ति, पेशेवरों की आवाजाही और नियामक सहयोग।
    • अन्य नीतिगत क्षेत्र (परस्पर सहमति के अनुसार): निवेश को सुगम बनाना, डिजिटल व्यापार, बौद्धिक संपदा अधिकार, सरकारी खरीद, तकनीकी मानक, स्वच्छता और पादप-स्वच्छता (SPS) उपाय और विवाद निपटान तंत्र।
    • उभरते क्षेत्रों में सहयोग: ऊर्जा व्यापार (एलएनजी, एलपीजी, कच्चा तेल), महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में संभावित सहयोग।

महत्व

  • द्विपक्षीय व्यापार का विस्तार: CEPA का लक्ष्य अप्रयुक्त व्यापार क्षमता का लाभ उठाना और वर्तमान द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि करना है।
  • ऊर्जा और संसाधन साझेदारी का विविधीकरण: कनाडा, ऊर्जा संसाधनों और महत्वपूर्ण खनिजों का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बन सकता है, जबकि भारत इसके लिए एक विशाल और विस्तारित बाजार हो सकता है।
  • सेवाओं और कुशल पेशेवरों की आवाजाही को बढ़ावा: आईटी, दूरसंचार और पेशेवर सेवाओं में भारत की क्षमताओं को बेहतर बाजार पहुंच और आवाजाही प्रावधानों से लाभ हो सकता है।
  • आपूर्ति श्रृंखलाओं का सुदृढ़ीकरण: महत्वपूर्ण खनिजों, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा में सहयोग से लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण में सहायता मिलेगी।
  • जन संपर्क को बढ़ावा देना: कनाडा में 425,000 से अधिक भारतीय छात्र और एक बड़ा प्रवासी भारतीय समुदाय रहता है, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ कर सकता है।
  • आर्थिक सहयोग का संस्थागतकरण: CEPA व्यापार, निवेश और नियामक सहयोग के लिए एक पूर्वानुमेय और नियम-आधारित ढांचा प्रदान करेगा, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक संबंध बेहतर होंगे।

व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के बारे में

  • यह दो या दो से अधिक देशों के बीच एक आर्थिक व्यवस्था है जिसके तहत वे बड़ी संख्या में व्यापारिक वस्तुओं पर सीमा शुल्क को समाप्त करने या कम करने पर सहमत होते हैं, साथ ही गैर-टैरिफ बाधाओं, सेवाओं के व्यापार और निवेश प्रवाह से संबंधित चुनौतियों को भी संबोधित करते हैं।
  • पारंपरिक व्यापार समझौतों की तुलना में, CEPA का दायरा अधिक व्यापक होता है क्योंकि इसका उद्देश्य समग्र आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देना है, जिसमें शामिल हैं:
    • वस्तुओं का व्यापार (टैरिफ में कमी या समाप्ति)
    • गैर-टैरिफ बाधाओं में कमी
    • सेवा निर्यात को प्रोत्साहन
    • द्विपक्षीय निवेश को सुगम बनाना
  • CEPA या मुक्त व्यापार समझौते (FTA) जैसे व्यापार समझौतों से कई आर्थिक लाभ होते हैं:
    • भागीदार देश के बाजारों तक शून्य-शुल्क या कम-शुल्क पहुंच निर्यात बाजारों के विविधीकरण और विस्तार में सहायता करती है।
    • ये विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करते हैं, जो घरेलू विनिर्माण और औद्योगिक विकास को गति देता है।
    • मूल्यवर्धित विनिर्माण के लिए आवश्यक कच्चे माल, मध्यवर्ती वस्तुओं और पूंजीगत वस्तुओं तक पहुंच प्रदान करते हैं।
    • वैश्विक बाजारों में घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करते हैं।
  • भारत ने श्रीलंका, भूटान, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और मॉरीशस जैसे देशों के साथ-साथ आसियान (ASEAN) और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA)  जिसमें आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड शामिल हैं, जैसे क्षेत्रीय समूहों के साथ व्यापार समझौते किए हैं।
  • 2014 से, भारत ने मॉरीशस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, EFTA और यूनाइटेड किंगडम सहित कई देशों के साथ प्रमुख व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • भारत की वर्तमान में संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ, चिली, पेरू और इज़राइल सहित अपने कई व्यापारिक भागीदारों के साथ व्यापार समझौतों पर वार्ता चल रही है।

Sources:
New Indian Express
PIB
News On Air
India Briefing

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