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सामान्य अध्ययन-2: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

संदर्भ: हाल ही में, भारत और कनाडा ने भारत के सिविल नाभिकीय ऊर्जा रिएक्टरों के लिए ईंधन की आपूर्ति हेतु एक दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह समझौता भारत के सिविल नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम को सहायता प्रदान करने हेतु कनाडा से यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
    • यह अनुबंध भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) और कनाडा की परमाणु कंपनी कैमेको‘ (Cameco) के बीच हस्ताक्षरित किया गया।
  • इस समझौते का मूल्य लगभग 2.6 बिलियन कनाडाई डॉलर है, जिसके अंतर्गत वर्ष 2027 से 2035 के बीच लगभग 10,000 टन यूरेनियम की आपूर्ति की जाएगी।
  • दोनों देश उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों में सहयोग का विस्तार करने पर भी सहमत हुए हैं, जिसमें छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) और अगली पीढ़ी के परमाणु रिएक्टर शामिल हैं।
  • संयोगवश, एक महीने के भीतर भारत का यह दूसरा बड़ा यूरेनियम आपूर्ति समझौता है। दो सप्ताह पूर्व, यह जानकारी सामने आई थी कि भारत ने कजाकिस्तान की सरकारी कंपनी काज़टोमप्रोम‘ (Kazatomprom) के साथ भी इसी प्रकार के एक समझौते को अंतिम रूप दिया है।
  • इसके अतिरिक्त, दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर लगभग 50 बिलियन डॉलर करने का लक्ष्य व्यक्त किया है।

समझौते का महत्व

  • ऊर्जा सुरक्षा का सुदृढ़ीकरण: यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति परमाणु ईंधन की विश्वसनीय उपलब्धता सुनिश्चित करती है, जिससे ईंधन की कमी के जोखिम कम होते हैं और भारत के विस्तार की ओर अग्रसर परमाणु रिएक्टर बेड़े के निर्बाध संचालन को समर्थन मिलता है।
  • स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में सहायक: यूरेनियम की आपूर्ति सुरक्षित करके, यह समझौता ‘लो-कार्बन’ (अल्प-कार्बन) बेसलोड ऊर्जा स्रोत के रूप में परमाणु ऊर्जा की भूमिका को सुदृढ़ करता है। यह भारत को अपने ऊर्जा मिश्रण में विविधता लाने और जलवायु एवं नेट-ज़ीरो‘ (Net-Zero) प्रतिबद्धताओं की दिशा में प्रगति करने में मदद करता है।
  • परमाणु ऊर्जा विस्तार को बढ़ावा: स्थिर ईंधन उपलब्धता भारत को बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने के लिए परमाणु उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सक्षम बनाती है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब देश आने वाले दशकों में परमाणु ऊर्जा में महत्वपूर्ण वृद्धि का लक्ष्य रख रहा है।
  • रणनीतिक और तकनीकी सहयोग: यह साझेदारी भारत-कनाडा संबंधों को मजबूत करती है और साथ ही उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों, जैसे छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) और अगली पीढ़ी के रिएक्टर प्रणालियों में सहयोग के नए मार्ग प्रशस्त करती है।

भारत में यूरेनियम की स्थिति

  • भारत के पास अपेक्षाकृत मामूली यूरेनियम भंडार हैं, जिनमें अयस्क की गुणवत्ता काफी निम्न  है (आमतौर पर लगभग 0.02–0.45%, जबकि वैश्विक औसत लगभग 1–2% है)। इस कारण घरेलू निष्कर्षण अधिक महंगा और कम उत्पादक हो जाता है।
  • सीमित घरेलू उत्पादन क्षमता के कारण, भारत की यूरेनियम आवश्यकताओं का 70% से अधिक आयात के माध्यम से पूरा किया जाता है, जो मुख्य रूप से कनाडा, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और रूस जैसे देशों से किया जाता है।
  • भारत को वर्तमान में प्रति वर्ष लगभग 1,500–2,000 टन यूरेनियम की आवश्यकता होती है, और इस मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है क्योंकि देश अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता का विस्तार कर रहा है।
  • घरेलू यूरेनियम निक्षेप मुख्य रूप से झारखंड (जादूगोड़ा) और आंध्र प्रदेश (तुम्मलापल्ले) में स्थित हैं। इसके अतिरिक्त राजस्थान, तेलंगाना और मेघालय में भी भंडार की पहचान की गई है।
  • यूरेनियम भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के प्रथम चरण का आधार है, जिसका अंतिम लक्ष्य दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए देश के विशाल थोरियम भंडार का उपयोग करना है।
  • भारत वर्तमान में लगभग 9 GW (गीगावाट) की क्षमता वाले 25 परमाणु रिएक्टरों का संचालन कर रहा है। हाल ही में शुरू किए गए परमाणु ऊर्जा मिशन के तहत, भारत का लक्ष्य वर्ष 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ाकर 100 GW करना है।

Source:
Ddnews
Indianexpress
Thehindu
Tribuneindia

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