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सामान्य अध्ययन-2: शिक्षा से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय; कार्यपालिका और न्यायपालिका की कार्यप्रणाली।
संदर्भ: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने महाराष्ट्र सरकार के उस नियम पर रोक लगा दी है, जो निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश को बच्चे के निवास स्थान से केवल 1 किमी के दायरे तक सीमित करता था।
न्यायालय का निर्णय और वर्तमान स्थिति
- न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा 12 फरवरी 2026 को जारी किए गए ‘सरकारी निर्णय’ की दो धाराओं पर रोक लगा दी है।
- कोर्ट ने टिप्पणी की कि सरकार द्वारा लगाया गया प्रतिबंध शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के प्रावधानों के प्रतिकूल प्रतीत होता है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21A (अनिवार्य शिक्षा) के तहत दी गई गारंटी का उल्लंघन कर सकता है।
- पीठ ने अधिकारियों को ऑनलाइन प्रवेश प्रणाली में सुधार करने का निर्देश दिया है, ताकि आवेदन RTE अधिनियम के मूल प्रावधानों और न्यायालय के पिछले निर्णयों के अनुरूप जमा किए जा सकें।
- महाराष्ट्र में RTE प्रवेश प्रक्रिया 17 फरवरी 2026 को शुरू हुई थी और नियमित चयन सूची के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 10 मार्च 2026 निर्धारित थी।
- इस अंतरिम रोक के कारण अब प्रवेश प्रक्रिया में देरी होने की संभावना है, क्योंकि अधिकारियों को न्यायालय के आदेश के अनुपालन में पूरी प्रणाली में संशोधिन करना होगा।
मुद्दे की पृष्ठभूमि को समझना
- वर्ष 2024 में, बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के उस नियम को असंवैधानिक घोषित कर रद्द कर दिया था, जिसके तहत निजी के एक किलोमीटर के दायरे में यदि कोई सरकारी स्कूल स्थित हो तो उन्हें RTE में प्रवेश देने से छूट दी गई थी।
- इसके बावजूद, महाराष्ट्र सरकार ने 12 फरवरी 2026 को एक नया सरकारी निर्णय जारी किया। इसमें RTE कोटे के तहत आवेदन करने के लिए फिर से एक किलोमीटर के दायरे का प्रतिबंध लगा दिया गया।
- इस नए नियम के कारण माता-पिता केवल उन्हीं निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को चुन सकते थे जो उनके पंजीकृत निवास से 1 किमी के भीतर हों। यह पिछले वर्षों की तुलना में भारी कमी थी, जहाँ पहले 3-किलोमीटर या उससे अधिक के दायरे में स्कूलों के लिए आवेदन किया जा सकता था।
- इस प्रतिबंध को चंद्रपुर जिले के एक अनुसूचित जनजाति (ST) अभिभावक ने चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि उनके निवास के एक किलोमीटर के दायरे में कोई भी निजी स्कूल मौजूद नहीं है।
- याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क यह था कि इस संकीर्ण भौगोलिक प्रतिबंध ने उनके बच्चे को RTE कोटे के तहत मिलने वाले शिक्षा के अधिकार से पूरी तरह वंचित कर दिया है।
- उच्च न्यायालय ने इस नियम पर रोक लगा दी है और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सुनिश्चित करें कि प्रवेश प्रक्रिया RTE अधिनियम के मूल प्रावधानों (जो शिक्षा तक व्यापक पहुँच की वकालत करते हैं) के अनुसार ही संचालित की जाए।
RTE कोटा और 25% आरक्षण
RTE कोटा: धारा 12(1)(c) का विश्लेषण
- निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम की धारा 12(1)(c) के तहत, सभी निजी गैर-सहायता प्राप्त (private unaided) स्कूलों के लिए यह अनिवार्य है कि वे प्रवेश स्तर की 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) और वंचित समूहों (DG) के बच्चों के लिए आरक्षित रखें।
- वंचित समूह: इसमें निम्नलिखित श्रेणियों के बच्चे शामिल हैं:
- अनुसूचित जाति (SC)
- अनुसूचित जनजाति (ST)
- अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC-नॉन क्रीमी लेयर) आदि।
- इस प्रावधान का मूल उद्देश्य सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक न्यायसंगत पहुँच सुनिश्चित करना है, ताकि समाज के विभिन्न वर्गों के बच्चे एक ही शैक्षणिक वातावरण में विकसित हो सकें।
- यह कोटा सामान्यतः स्कूल की संरचना के अनुसार नर्सरी, किंडरगार्टन या कक्षा 1 में लागू होता है।
- राज्य सरकार इस कोटे के तहत प्रवेश लेने वाले छात्रों की शिक्षा पर होने वाले व्यय की प्रतिपूर्ति निजी स्कूलों को करती है।
बच्चों का निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009
- RTE अधिनियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत गारंटीकृत शिक्षा के मौलिक अधिकार को प्रभावी बनाने के लिए 2009 में लागू हुआ।
- यह अधिनियम छह से चौदह वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी प्रदान करता है।
- यह अधिनियम स्कूल के बुनियादी ढांचे, शिक्षकों की योग्यता और छात्रों के सीखने की परिस्थितियों के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित करता है।
- अधिनियम के तहत छात्रों के शारीरिक दंड, मानसिक उत्पीड़न और उनके साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है।
- इसका मुख्य उद्देश्य भारत में सार्वभौमिक प्रारंभिक शिक्षा सुनिश्चित करना और विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच शैक्षिक असमानता को कम करना है।
- प्रारंभ में, इस अधिनियम ने कक्षा 8 तक ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ (किसी भी छात्र को अनुत्तीर्ण न करने की नीति) पेश की थी। हालांकि, इसे RTE संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधित किया गया, जिससे राज्यों को नियमित अंतराल पर परीक्षा आयोजित करने की अनुमति मिल गई।
शिक्षा से संबंधित संवैधानिक प्रावधान
- अनुच्छेद 21A अनुच्छेद 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के मौलिक अधिकार की गारंटी देता है। इसे 86वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से जोड़ा गया था।
- अनुच्छेद 45 राज्य को 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा प्रदान करने का निर्देश देता है।
- अनुच्छेद 51A(k) प्रत्येक माता-पिता और अभिभावक का यह मौलिक कर्तव्य है कि वे 6 से 14 वर्ष की आयु के अपने बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करें। इसे भी 86वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा शामिल किया गया था।
