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संदर्भ: हाल ही में, बेंगलुरु में आयोजित छठे भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा संवाद में भारत ने फ्रांस की छठी पीढ़ी की लड़ाकू विमान परियोजना फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (Future Combat Air System – FCAS) फ्रेमवर्क से जुड़ने के लिए अपनी रुचि जाहिर की। 

अन्य संबंधित जानकारी

• रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने FCAS फ्रेमवर्क के तहत छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के सह-विकास और सह-विनिर्माण की संभावनाओं को तलाशने के लिए भारत की तत्परता को रेखांकित किया।

• FCAS में भारत की रुचि इसलिए भी है क्योंकि वह अपने स्वयं के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) पांचवीं पीढ़ी के कार्यक्रम को विकसित कर रहा है।

  • AMCA कार्यक्रम की पहली उड़ान 2028-29 के आसपास होने की संभावना है, और इसे 2035 के आसपास सेना में शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

• लड़ाकू विमान वार्ताओं के साथ-साथ, भारत ने फ्रांस के समक्ष स्वदेशी पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के निर्यात का भी प्रस्ताव रखा।

• हाल के वर्षों में, भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर ₹23,000 करोड़ से अधिक हो गया है, जबकि सरकार ने 2029 तक रक्षा विनिर्माण में ₹3 लाख करोड़ और रक्षा निर्यात में ₹50,000 करोड़ प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) के बारे में

• फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) एक यूरोपीय रक्षा कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य छठी पीढ़ी के हवाई युद्ध इकोसिस्टम को विकसित करना है।

• इसे शुरुआत में 2017 में फ्रांस और जर्मनी द्वारा शुरू किया गया था, जिसमें 2019 में स्पेन भी शामिल हो गया।

• FCAS केवल एक लड़ाकू विमान परियोजना नहीं है, बल्कि एक ‘सिस्टम-ऑफ-सिस्टम’ अवधारणा है जिसे कई लड़ाकू प्लेटफार्मों को एकीकृत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

• यह कार्यक्रम एक अगली पीढ़ी के लड़ाकू (NGF) जोकि छठी पीढ़ी का स्टील्थ विमान है, के इर्द-गिर्द केन्द्रित है। इन विमानों को निम्नलिखित द्वारा सहायता प्राप्त होगी:

  • मानवरहित लड़ाकू हवाई प्रणाली (UCAVs)
  • रिमोट कैरियर ड्रोन
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सक्षम निर्णय समर्थन प्रणाली
  • एक सुरक्षित “कॉम्बैट क्लाउड” के माध्यम से जुड़े सभी सिस्टम।

• इस सिस्टम का उद्देश्य नेटवर्क-केंद्रित युद्ध वातावरण में कार्य करना है, जिससे मानवयुक्त और मानवरहित प्लेटफार्मों के बीच समन्वित संचालन संभव हो सके।

• FCAS के 2040 के आसपास परिचालन सेवा में शामिल होने की उम्मीद है, जो यूरोपीय वायु सेनाओं में राफेल और यूरोफाइटर जैसे पुराने विमानों का स्थान लेगा।

भारत के लिए महत्व

• उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकी तक पहुँच: इसमें भागीदारी से भारत को एआई-सक्षम युद्ध प्रणाली, उन्नत स्टील्थ डिज़ाइन और स्वायत्त ड्रोन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों का अनुभव प्राप्त हो सकता है।

• फ्रांस के साथ रणनीतिक साझेदारी को उन्नत करना: हाल के वर्षों में भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है, जिसमें विमान खरीद और संयुक्त सैन्य अभ्यास शामिल हैं।

• स्वदेशी एयरोस्पेस उद्योग को प्रोत्साहन: सहयोग से घरेलू विनिर्माण क्षमताओं में वृद्धि हो सकती है और भारत के एयरोस्पेस इकोसिस्टम विकास में सहायता मिल सकती है।

• भारत के AMCA कार्यक्रम का पूरक: FCAS से प्राप्त तकनीकी अंतर्दृष्टि भारत के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर और भविष्य के लड़ाकू प्लेटफार्मों को विकसित करने के चल रहे प्रयासों में सहायक सिद्ध हो सकती है।

छठी पीढ़ी की लड़ाकू विमान प्रणालियों के बारे में

• छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान लड़ाकू विमानन के अगले विकास का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो अमेरिका के F-35, रूस के Su-57 और चीन के J-20 जैसे वर्तमान पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर्स के उत्तरवर्ती हैं।

• पिछले लड़ाकू विमानों के विपरीत, छठी पीढ़ी की प्रणालियों को स्टैंडअलोन विमान के बजाय एकीकृत लड़ाकू नेटवर्क के रूप में डिज़ाइन किया गया है।

• इन विमानों में निम्नलिखित विशेषताएं हो सकती हैं:

  • उन्नत स्टील्थ और निम्न-अवलोकन योग्य प्रौद्योगिकियां।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सहायता प्राप्त निर्णय प्रणाली।
  • स्वायत्त ड्रोन के साथ मानव-मानवरहित टीमिंग।
  • निर्देशित-ऊर्जा हथियार और उन्नत सेंसर।
  • नेटवर्क-केंद्रित युद्ध के लिए उच्च गति डेटा लिंक।

• FCAS के अलावा, इस क्षेत्र में अन्य प्रमुख परियोजनाओं में यूनाइटेड किंगडम-इटली-जापान कंसोर्टियम का ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) और संयुक्त राज्य अमेरिका का नेक्स्ट जनरेशन एयर डोमिनेंस (NGAD) कार्यक्रम शामिल हैं।

SOURCES
The Hindu
The Guardian
FT
The Guardian
IDGA

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