संदर्भ:

भारत प्रशांत महासागर में गहरे समुद्र में खनिजों की खोज हेतु लाइसेंस के लिए आवेदन करेगा।

अन्य संबंधित जानकारी

  • संयुक्त राष्ट्र समर्थित अंतर्राष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण (ISA) ने 31 गहरे समुद्र अन्वेषण लाइसेंस जारी किए हैं, जिनमें हिंद महासागर में भारत के लिए दो लाइसेंस भी शामिल हैं, लेकिन अभी तक खनन की अनुमति नहीं दी गई है, क्योंकि अभी तक नियमन नहीं बनाए गए हैं।
  • 36 सदस्यीय आईएसए परिषद खनन नियमों के नवीनतम मसौदे पर बातचीत करने हेतु इसी महीने जमैका में बैठक कर रही है।
  • चीन, रूस और कुछ प्रशांत द्वीप राष्ट्रों ने पहले ही प्रशांत महासागर के लिए अन्वेषण लाइसेंस प्राप्त कर लिया है।
  • लगभग 27 देशों ने महासागरीय खनन संबंधी सभी गतिविधियों पर रोक लगाने या उन्हें स्थगित करने का आह्वान किया है, लेकिन नाउरू और कुक द्वीप समूह सहित कुछ प्रशांत राष्ट्र गहरे समुद्र में खनन के पक्ष में हैं।

अंतर्राष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण (ISA)

  • यह वर्ष 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) और उसी संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन समझौते के भाग XI के कार्यान्वयन से संबंधित वर्ष 1994 के समझौते के तहत गठित एक स्वायत्त अंतर्राष्ट्रीय संगठन है। 
  • मुख्यालय: किंग्स्टन, जमैका
  • अंतर्राष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण का कार्य मानवता के सामूहिक लाभ हेतु संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन द्वारा परिभाषित क्षेत्र में सभी खनिज-संसाधन गतिविधियों की देखरेख करना है। 

प्रशांत महासागर क्यों?

  • भारत क्लेरियन-क्लिपर्टन जोन (जो हवाई और मैक्सिको के बीच एक विशाल मैदान है) पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रहा है, जो बड़ी मात्रा में बहुधात्विक पिंड (Polymetallic nodules) के लिए जाना जाता है।
    यह मध्य प्रशांत महासागर में 5,000 किलोमीटर (3,100 मील) तक फैला हुआ क्षेत्र है, जो ~4,000 – 5,500 मीटर (12,000 – 18,000 फीट) की गहराई पर स्थित है।

बहुधात्विक पिंड क्या हैं?

  • इन्हें मैंगनीज नोड्यूल्स भी कहा जाता है, ये एक कोर के चारों ओर लोहे और मैंगनीज हाइड्रॉक्साइड की संकेंद्रित परतों से बने चट्टानी ठोस होते हैं।
  • इन पिंडों में मैंगनीज, निकल, तांबा और कोबाल्ट सहित इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर पैनलों में उपयोग होने वाले खनिज होते हैं।
  • इनकी खोज 19वीं सदी के अंत में साइबेरिया के पास आर्कटिक महासागर में कारा सागर में हुई थी (1868)।

बहुधात्विक पिंड का महत्व 

  • बहुधात्विक पिंड के खनन को, बढ़ते उच्च-प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों और हरित-ऊर्जा अर्थव्यवस्था के विकास हेतु महत्वपूर्ण धातुओं की आवश्यकता के कारण बढ़ावा मिला है। 
  • लौह-मैंगनीज पर्पटी और गहरे समुद्र की मिट्टी के साथ-साथ बहुधात्विक पिंड भविष्य में दुर्लभ मृदा तत्वों के संभावित समुद्री स्रोत हैं।

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चन्द्रशेखर आज़ाद जयंती

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