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सामान्य अध्ययन-2: केंद्र और राज्यों द्वारा देश के अति-संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन।
संदर्भ: गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए सरकार की एक प्रमुख योजना प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के नौ वर्ष पूरे हो चुके हैं।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के बारे में

- शुभारंभ: 1 जनवरी 2017 को।
- नोडल मंत्रालय: महिला और बाल विकास मंत्रालय।
- मुख्य घटक है: महिला सशक्तिकरण के लिए ‘मिशन शक्ति’ की उप-योजना ‘सामर्थ्य’ का।
- प्रकार: केंद्र प्रायोजित प्रमुख (फ्लैगशिप) योजना
- उद्देश्य:
- पारिश्रमिक के नुकसान की आंशिक क्षतिपूर्ति के लिए नकद प्रोत्साहन प्रदान करना ताकि महिला अपने पहले बच्चे के जन्म से पहले और बाद में पर्याप्त आराम कर सके;
- गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं (PW&LM) को स्वास्थ्य में सुधार के प्रति जागरूक करना;
- यदि दूसरा बच्चा लड़की है तो दूसरे बच्चे के लिए अतिरिक्त नकद प्रोत्साहन प्रदान करके बालिकाओं के प्रति सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देना।
- वित्तीय सहायता:
- गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को नकद राशि दी जाती है:
- पहले बच्चे के लिए 5,000 रुपये (गर्भावस्था का पंजीकरण कराने पर 3,000 रुपये की पहली क़िस्त दी जाती है और 2,000 रुपये की दूसरी क़िस्त बच्चे के जन्म के बाद दी जाती है)।
- दूसरा बच्चा यदि लड़की है तो PMMVY 2.0 के तहत 6,000 रुपये दिए जाते हैं।
- पात्र लाभार्थियों को जननी सुरक्षा योजना (JSY) के तहत भी नकद प्रोत्साहन राशि मिलती है।
- जननी सुरक्षा योजना (JSY) एक सुरक्षित-मातृत्व हस्तक्षेप योजना है, जिसे 2005 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य विशेष रूप से गरीब और वंचित महिलाओं में संस्थागत प्रसव (अस्पताल में जन्म) की आदतों को बढ़ावा देकर मातृ और नवजात मृत्यु दर में कमी लाना है।
- गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को नकद राशि दी जाती है:

योजना का महत्त्व:
- महिला सशक्तिकरण: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत 4.50 करोड़ लाभार्थी पंजीकृत हैं और लाभार्थियों को 19 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि का संवितरण किया जा चुका है।
- संस्थागत प्रसव में वृद्धि: प्रसव-पूर्व जाँच (ANC) और संस्थागत प्रसव (अस्पताल में जन्म) से जुड़ी शर्तें सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देती हैं, जिससे मातृत्व मृत्यु दर और नवजात मृत्यु दर (NMR) में कमी आती है।
- बेहतर बाल स्वास्थ्य परिणाम: गर्भावस्था के शीघ्र पंजीकरण और समय पर टीकाकरण को प्रोत्साहित करने से जन्म के समय बच्चे के वजन में सुधार किया जा सकता है और प्रारंभिक बाल देखभाल में मदद मिलती है।
- सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का समर्थन: प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सतत विकास लक्ष्य 2 (शून्य भुखमरी), सतत विकास लक्ष्य 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण) और सतत विकास लक्ष्य 5 (लैंगिक समानता) को प्राप्त करने में महत्त्वपूर्ण योगदान देती है।
