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सामान्य अध्ययन-2: शासन व्यवस्था का महत्त्वपूर्ण पक्ष|
सामान्य अध्ययन -3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास और अनुप्रयोग तथा रोजमर्रा के जीवन पर उनके प्रभाव।
संदर्भ: हाल ही में जारी की गई जारी नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स (NRI) 2025 में भारत ने अपनी पिछली रैंकिंग में चार स्थानों का सुधार करते हुए वैश्विक स्तर पर 45वीं रैंक हासिल की है।
नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स (NRI) के बारे में
- यह आकलन करता है कि विभिन्न अर्थव्यवस्थाएं संवृद्धि, नवाचार और सामाजिक विकास को समर्थन देने के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों (ICT) का किस प्रकार लाभ उठाती हैं।
- यह चार स्तंभों प्रौद्योगिकी, लोग, शासन और प्रभाव में उनके प्रदर्शन के आधार पर 127 अर्थव्यवस्थाओं की नेटवर्क तत्परता का आकलन करता है, जिसमें कुल 53 संकेतक शामिल हैं।
- यह रिपोर्ट पोर्टुलन्स इंस्टीट्यूट द्वारा जारी की गई है, जो वाशिंगटन डीसी में स्थित एक स्वतंत्र, गैर-लाभकारी अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थान है।
NRI 2025 के मुख्य निष्कर्ष
- भारत ने न केवल अपनी रैंकिंग (49वीं से 45वीं) में सुधार किया है, बल्कि इसका स्कोर भी 2024 के 53.63 से बढ़कर 2025 में 54.43 (100 में से) हो गया है।
- भारत ने कई प्रमुख संकेतकों में वैश्विक स्तर पर प्रथम स्थान हासिल किया है, जिनमें शामिल हैं:
- दूरसंचार सेवाओं में वार्षिक निवेश
- एआई (AI) वैज्ञानिक प्रकाशन
- सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) सेवा निर्यात
- ई-कॉमर्स विधान
- भारत ने ‘FTTH/भवन इंटरनेट ग्राहकों’, ‘देश के भीतर मोबाइल ब्रॉडबैंड इंटरनेट ट्रैफिक’ और ‘अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट बैंडविड्थ’ में दूसरा स्थान हासिल किया है।
- ‘घरेलू बाजार के आकार’ और ‘आय असमानता’ में इसे तीसरा स्थान मिला है।
- 2025 में विश्व के सर्वाधिक नेटवर्क-रेडी देश हैं:
- संयुक्त राज्य अमेरिका (रैंक 1, स्कोर 79.13)
- फिनलैंड (रैंक 2, स्कोर 75.82)
- सिंगापुर (रैंक 3, स्कोर 75.46)
चिन्हित अंतराल और चुनौतियां
- बुनियादी ढांचे और निवेश में उच्च स्कोर के बावजूद, रिपोर्ट एक तीव्र असममित डिजिटल परिदृश्य को रेखांकित करती है, जिसमें शासन और समावेशन में निरंतर अंतराल बना हुआ है।
- शासन अंतराल: शासन स्तंभ में भारत 73वें स्थान पर है, जहाँ ‘कानून द्वारा गोपनीयता का संरक्षण’ (101वां) और ‘नियामक गुणवत्ता’ (78वां) में खामियाँ बरकरार हैं।
- सामाजिक प्रभाव: जहाँ ‘आर्थिक प्रभाव’ में भारत 14वें स्थान पर है, वहीं इसे ‘सतत विकास लक्ष्य (SDG) योगदान’ (83वां) और ‘जीवन की गुणवत्ता’ (77वां) में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जो दर्शाता है कि डिजिटल लाभों का अभी तक समान रूप से वितरण नहीं हुआ है।
रिपोर्ट की सिफारिशें
- नियामक अंतराल को पाटना: सरकार को अगले $500 बिलियन के डिजिटल निवेश हेतु एक पूर्वानुमेय वातावरण बनाने के लिए नियामक गुणवत्ता (78वां स्थान) में सुधार करना होगा।
- श्रम शासन का आधुनिकीकरण: रिपोर्ट प्रौद्योगिकी-संचालित अर्थव्यवस्था में उत्पादकता और रोजगार परिणामों को बढ़ावा देने के लिए नई श्रम संहिताओं को प्रौद्योगिकी-सक्षम, हाइब्रिड कार्य मॉडल के साथ संरेखित करने की आवश्यकता पर बल देती है।
- विश्वास-आधारित एआई का सुदृढ़ीकरण: भारत के सुदृढ़ एआई अनुसंधान आउटपुट को सुरक्षित और उत्तरदायी एआई परिनियोजन सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ विश्वास, नैतिकता और डेटा-शासन ढांचे द्वारा पूरक होना चाहिए।
