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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण।
संदर्भ: हाल ही में 7 सितंबर को वायु प्रदूषण के विरुद्ध जागरूकता और कार्रवाई को बढ़ावा देने हेतु नीले आकाश के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस मनाया गया।
नीले आकाश के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस के बारे में
- उत्पत्ति: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2019 में 7 सितंबर को स्वच्छ वायु और नीले आकाश के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में नामित किया। इसका पहला आयोजन 2020 में हुआ, जिसमें जन-जागरूकता और वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए कार्रवाई पर जोर दिया गया।
- भारत में आयोजन: भारत इस अवसर को “स्वच्छ वायु दिवस” के रूप में मनाता है। यह स्वच्छ वायु के लिए किए जा रहे उपायों को उजागर करने तथा वैश्विक अभियान को भारत की स्वच्छ वायु प्राथमिकताओं से जोड़ने के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करता है।
- उद्देश्य: इस दिवस का उद्देश्य वायु गुणवत्ता में सुधार तथा इसके स्वास्थ्य, पर्यावरणीय और विकासात्मक प्रभावों से निपटने के लिए सामूहिक एवं अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई को बढ़ावा देना और जन-जागरूकता बढ़ाना है।
- 2026 का विषय: वर्ष 2026 का विषय “जलवायु कार्रवाई के लिए स्वच्छ वायु (Clean Air for Climate Action)” है। यह जलवायु कार्रवाई और स्वच्छ वायु संबंधी प्रयासों को एकीकृत करने के लाभों पर प्रकाश डालता है।
वायु प्रदूषण को समझना
- अर्थ एवं स्रोत: वायु प्रदूषण तब होता है जब वायुमंडल में हानिकारक गैसें, तरल बूंदें या ठोस कण ऐसे स्तर पर एकत्रित हो जाते हैं, जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को प्रभावित कर सकते हैं। इसके स्रोतों में परिवहन, उद्योग, निर्माण एवं जलाना, तथा प्राकृतिक प्रक्रियाएँ शामिल हैं।
- कणिकीय पदार्थ (Particulate Matter): PM10 में ≤10 माइक्रोमीटर आकार के कण होते हैं, जबकि PM2.5 में ≤2.5 माइक्रोमीटर आकार के अधिक सूक्ष्म कण होते हैं। PM2.5 का छोटा आकार इसे श्वसन तंत्र में अधिक गहराई तक प्रवेश करने में सक्षम बनाता है और कुछ कण रक्तप्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं।
- जलवायु एवं मौसम विज्ञान: वायु गुणवत्ता वायुमंडलीय परिस्थितियों से प्रभावित होती है। लू और वायुमंडलीय स्थिरता प्रदूषकों को जमीन के पास फँसा सकती है, जबकि अधिक तापमान जमीनी स्तर पर ओजोन के निर्माण के लिए जिम्मेदार वायुमंडलीय रासायनिक प्रक्रियाओं को तेज कर सकता है।
- स्वास्थ्य एवं विकास: वायु प्रदूषण श्वसन एवं हृदय संबंधी रोगों तथा समय से पहले मृत्यु में योगदान देता है। साथ ही, यह उत्पादकता को कम करता है और व्यापक आर्थिक एवं पर्यावरणीय लागत उत्पन्न करता है।
भारत का स्वच्छ वायु शासन ढाँचा
- मानक एवं निगरानी: राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS) 12 प्रदूषकों के लिए नियामक मानक निर्धारित करते हैं। इनमें वार्षिक मानक PM10 के लिए 60 µg/m³ और PM2.5 के लिए 40 µg/m³ हैं।
- AQI एवं जन सूचना: भारत का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) आठ प्रदूषकों के आधार पर वायु गुणवत्ता को छह श्रेणियों में वर्गीकृत करता है। सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला प्रदूषक समग्र AQI निर्धारित करता है। SAMEER ऐप/वेब पोर्टल 292 से अधिक शहरों के लिए लगभग वास्तविक समय में AQI की जानकारी प्रदान करता है, जबकि सभी NCAP शहरों में शिकायत पोर्टल संचालित हैं।
- पूर्वानुमान एवं उत्सर्जन निगरानी: SAFAR स्थान-विशिष्ट, लगभग वास्तविक समय की वायु गुणवत्ता संबंधी जानकारी तथा 1–3 दिन का पूर्वानुमान प्रदान करता है।
- NCAP: 2019 में शुरू किया गया NCAP, 24 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 130 शहरों को शहर एवं राज्य-विशिष्ट स्वच्छ वायु कार्य योजनाओं के माध्यम से कवर करता है। इन योजनाओं के भौतिक एवं वित्तीय कार्यान्वयन की निगरानी PRANA द्वारा की जाती है।
- दिल्ली-NCR: CAQM, 2021 के अधिनियम के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है, जो क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन का समन्वय करता है। वहीं, GRAP प्रदूषण की स्थिति बिगड़ने के साथ क्रमशः अधिक कड़े आपातकालीन उपाय लागू करता है, जो खराब (Poor) से गंभीर+ (Severe+) वायु गुणवत्ता स्थितियों तक होते हैं।
स्वच्छ वायु के लिए क्षेत्र-विशिष्ट उपाय
- परिवहन: BS-VI उत्सर्जन मानक, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सार्वजनिक परिवहन, चार्जिंग अवसंरचना और वाहन संबंधी उपाय वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में सहायता करते हैं।
- उद्योग एवं ऊर्जा: स्वच्छ ईंधन एवं प्रौद्योगिकियाँ, क्षेत्र-विशिष्ट उत्सर्जन मानक और सतत उत्सर्जन निगरानी औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने पर केंद्रित हैं।
- सड़क की धूल एवं निर्माण: यंत्रीकृत सड़क सफाई, धूल दमन, बेहतर सड़कें और निर्माण एवं विध्वंस (C&D) अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन कणिकीय प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
- अपशिष्ट एवं कृषि: बेहतर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, खुले में जलाने की रोकथाम और फसल अवशेष प्रबंधन जैवभार एवं अपशिष्ट जलाने से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में मदद करते हैं।
- शहरी हरितीकरण: ग्रीन इंडिया मिशन, CAMPA और नगर वन योजना जैसी पहलें पारिस्थितिक पुनर्स्थापन तथा शहरी हरित आवरण के विस्तार में सहायता करती हैं।
