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सामान्य अध्ययन 2: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।; केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन, इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिए गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।
सामान्य अध्ययन 3: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।
संदर्भ: हाल ही में, तेलंगाना राज्य विधानसभा ने तेलंगाना प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स (पंजीकरण, सामाजिक सुरक्षा और कल्याण) विधेयक, 2026 पारित किया, जिसका उद्देश्य गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को विनियमित करना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
तेलंगाना गिग वर्कर्स विधेयक के बारे में:
- इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य डिजिटल अर्थव्यवस्था में गिग वर्कर्स को कानूनी मान्यता देना और उनके अधिकारों, गरिमा तथा आजीविका की रक्षा करना है।
- यह विधेयक गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं को संबोधित करता है, जैसे: न्यूनतम वेतन का अभाव, रोज़गार असुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा और श्रम अधिकार, शिकायत निवारण प्रणाली या कोई अन्य लाभ।
- यह विधेयक चार अन्य राज्यों— कर्नाटक, राजस्थान, झारखंड और बिहार द्वारा पारित विधेयकों के समान है।
विधेयक के मुख्य प्रावधान
- प्लेटफॉर्मों के लिए विनियामक अनुपालन:
- प्लेटफॉर्म कंपनियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे समय-समय पर विवरण प्रस्तुत करें और प्रत्येक तीन महीने में ग्राहकों के लेन-देन का इलेक्ट्रॉनिक रिटर्न दाखिल करें, जिस पर सरकार लेन-देन का 1-2% शुल्क लगाएगी।
- अनुपालन न करने पर कठोर जुर्माना निर्धारित किया गया है: प्रथम उल्लंघन के लिए ₹50,000, दूसरे के लिए ₹1 लाख, तीसरे के लिए ₹1.5 लाख, और उसके बाद बकाया राशि का पाँच गुना तक जुर्माना देना होगा।
- सामाजिक सुरक्षा और कल्याण बोर्ड के लिए प्रावधान:
- गिग वर्कर्स के लिए एक 20-सदस्यीय कल्याण बोर्ड का गठन किया जाएगा। इस बोर्ड के पास एकत्रित शुल्क का उपयोग बीमा, पेंशन और मातृत्व लाभ प्रदान करने के लिए होगा। इसमें महिलाओं और दिव्यांगजनों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य होगा।
- डिलीवरी, राइड-हैलिंग और सर्विस ऐप सहित सभी एग्रीगेटरों को अपने लेन-देन मूल्य का 1 से 2% राज्य-प्रबंधित कल्याण कोष में जमा करना होगा। इस कोष का अधिकतम 5% ही बोर्ड के परिचालन व्यय के लिए उपयोग किया जा सकता है।
- प्रत्येक पंजीकृत गिग वर्कर को एक विशिष्ट आईडी दी जाएगी, जिससे वे सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
- शिकायत निवारण प्रणाली: यह एक सुदृढ़ शिकायत निवारण प्रणाली पेश करता है, जिसके अंतर्गत प्लेटफॉर्म-स्तर की समितियों और जिला-स्तरीय शिकायत तंत्रों का गठन किया जाएगा। इसका उद्देश्य वर्कर्स को अचानक सेवा समाप्ति या भुगतान रोके जाने से बचाना है।
- पारदर्शिता: प्लेटफ़ॉर्मों के लिए वेतन और कटौती के विवरण का स्पष्ट रूप से खुलासा करना अनिवार्य होगा। साथ ही, वर्कर्स को प्रभावित करने वाले एल्गोरिदम का कोई भी मनमाना उपयोग नहीं किया जा सकेगा।
गिग अर्थव्यवस्था और वर्कर्स के बारे में
- गिग अर्थव्यवस्था एक ऐसी बाजार प्रणाली है जिसकी विशेषता अल्पकालिक और लचीली कार्य व्यवस्थाओं की व्यापकता है, जहाँ संगठन विशिष्ट कार्यों या परियोजनाओं के लिए स्वतंत्र वर्कर्स को नियुक्त करते हैं।
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत परिभाषित अनुसार, गिग वर्कर से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंधों से बाहर कार्य करता है या आय अर्जित करने वाली गतिविधियों में भाग लेता है।
- डिजिटलीकरण और लचीले रोजगार के प्रति बढ़ती प्राथमिकता के कारण इस क्षेत्र में तेजी से विस्तार देखा जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रमिक गिग-आधारित भूमिकाओं में प्रवेश कर रहे हैं।
- गिग वर्कर्स के दो प्रकार होते हैं:
- प्लेटफॉर्म-आधारित श्रमिक (Platform-Based Workers): ऐसे व्यक्ति जिनका कार्य ऑनलाइन एप्लीकेशन या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित होता है (जैसे: उबर, स्विगी)।
- नॉन-प्लेटफॉर्म गिग वर्कर्स (Non-Platform Gig Workers): डिजिटल प्लेटफॉर्म के बाहर कार्यरत श्रमिक, जिनमें पारंपरिक क्षेत्रों के आकस्मिक श्रमिक और स्वरोजगार वाले व्यक्ति शामिल हैं, जो अंशकालिक या पूर्णकालिक कार्य करते हैं।
गिग अर्थव्यवस्था का महत्व
- रोजगार सृजन और समावेशिता: गिग अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करती है, विशेष रूप से युवाओं, महिलाओं और कम कुशल वर्कर्स के लिए, जिससे श्रम बाजार में व्यापक भागीदारी संभव हो पाती है।
- लचीलापन और कार्य स्वायत्तता: यह कार्य के लचीले घंटे और स्थान की स्वतंत्रता प्रदान करती है, जिससे वर्कर्स को आय के कई स्रोतों और व्यक्तिगत प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।
- डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: प्लेटफॉर्म-आधारित कार्य का विस्तार डिजिटलीकरण को गति देता है और ई-कॉमर्स, राइड-हैलिंग और ऑनलाइन सेवाओं जैसे क्षेत्रों के विकास का समर्थन करता है।
- व्यवसायों के लिए लागत दक्षता: कंपनियाँ स्थायी कार्यबल बनाए रखने के बजाय कार्य-आधारित या अल्पकालिक आधार पर वर्कर्स को नियुक्त करके कम श्रम लागत और परिचालन लचीलेपन का लाभ उठाती हैं।
- नवाचार की गुंजाइश: गिग अर्थव्यवस्था स्वरोजगार और सूक्ष्म-उद्यमिता को बढ़ावा देती है, जिससे नवाचार और नए सेवा मॉडलों के विकास को प्रोत्साहन मिलता है।
गिग वर्कर्स के समक्ष चुनौतियाँ
- सामाजिक सुरक्षा का अभाव: गिग वर्कर्स के पास अक्सर स्वास्थ्य बीमा, पेंशन और सवैतनिक अवकाश जैसी सुविधाओं तक पहुंच नहीं होती है, जिससे उनकी आय में असुरक्षा बनी रहती है।
- आय की अस्थिरता: उनकी कमाई अनियमित होती है और मांग, प्लेटफॉर्म एल्गोरिदम तथा रेटिंग पर निर्भर करती है, जिससे वित्तीय योजना बनाना कठिन हो जाता है।
- रोजगार सुरक्षा का अभाव: वर्कर्स को बिना किसी पूर्व सूचना के प्लेटफॉर्म से आसानी से हटाया या निष्क्रिय किया जा सकता है, जो कमजोर संविदात्मक सुरक्षा को दर्शाता है।
- एल्गोरिदम नियंत्रण और अस्पष्टता: कार्य का आवंटन, मूल्य निर्धारण और रेटिंग अस्पष्ट एल्गोरिदम द्वारा शासित होते हैं, जिससे पारदर्शिता और श्रमिक स्वायत्तता सीमित हो जाती है।
- सीमित कानूनी सुरक्षा: गिग श्रमिक पारंपरिक श्रम कानूनों के दायरे से बाहर आते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनकी शिकायतों का अपर्याप्त निवारण और उनकी मोलभाव की क्षमता कम होती है।
- लैंगिक और सामाजिक अंतराल: गिग अर्थव्यवस्था अक्सर मौजूदा असमानताओं को सुदृढ़ करती है, जहाँ महिलाएँ और हाशिए पर रहने वाले समूह कम वेतन वाले तथा असुरक्षित कार्यों में केंद्रित होते हैं और सुरक्षा चिंताओं व डिजिटल विभाजन जैसी बाधाओं का सामना करते हैं।
- सामूहिक मोलभाव शक्ति का अभाव: गिग श्रमिक व्यक्तिगत रूप से कार्य करते हैं और उनमें संघीकरण (Unionisation) की कमी होती है, जिससे बेहतर वेतन, कार्य परिस्थितियों या विवाद समाधान तंत्र के लिए बातचीत करने की उनकी क्षमता सीमित हो जाती है।
गिग अर्थव्यवस्था को संबोधित करने वाली प्रमुख सरकारी पहल
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020: यह संहिता गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को मान्यता देती है और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का प्रावधान करती है; हालाँकि, वेतन, कार्य परिस्थितियों, शिकायत निवारण और एल्गोरिदम पारदर्शिता पर प्रवर्तनीय मानक अभी भी सीमित हैं या अपर्याप्त रूप से कार्यान्वित हैं।
- राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड (: ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020’ के तहत इस बोर्ड का गठन किया गया है ताकि संगठित और असंगठित क्षेत्रों (गिग वर्कर्स सहित) के वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा उपायों के कार्यान्वयन की निगरानी और समन्वय किया जा सके और उपयुक्त कल्याणकारी योजनाओं की सिफारिश की जा सके।
- ई-श्रम पोर्टल (2021 में शुरू किया गया): यह गिग वर्कर्स सहित असंगठित वर्कर्स के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस के रूप में कार्य करता है, जो सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा लाभों तक पहुँच को सुगम बनाता है। दिसंबर 2025 तक, इस पोर्टल पर 31.2 करोड़ से अधिक श्रमिक पंजीकृत हैं।
- राज्य-स्तरीय पहल: विभिन्न राज्यों ने गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी सहायता प्रदान करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
- राजस्थान: यह राजस्थान प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स (पंजीकरण और कल्याण) अधिनियम पारित करने वाला पहला राज्य था, जो गिग वर्कर्स के पंजीकरण और एक कल्याण बोर्ड के गठन को अनिवार्य बनाता है, जिसमें एक-तिहाई सदस्य महिलाएँ होंगी।
- बिहार: बिहार प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स (पंजीकरण, सामाजिक सुरक्षा और कल्याण) अधिनियम, 2025, एक कल्याण कोष के माध्यम से भविष्य निधि, बीमा, मातृत्व सहायता, दुर्घटना कवर और वृद्धावस्था संरक्षण जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करता है, साथ ही इसमें न्यूनतम वेतन और शिकायत निवारण के प्रावधान भी शामिल हैं।
- कर्नाटक: कर्नाटक प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स (सामाजिक सुरक्षा और कल्याण) अधिनियम, 2025, एक कल्याण बोर्ड के गठन के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है। इसमें सामाजिक सुरक्षा, बीमा और न्यूनतम वेतन जैसे प्रावधान हैं।
- झारखंड: झारखंड प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स (पंजीकरण और कल्याण) अधिनियम सभी गिग वर्कर्स के पंजीकरण, उन्हें एक आईडी (ID) प्रदान करने, सामाजिक सुरक्षा लाभ और शिकायत निवारण का प्रावधान करता है।
